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क्या HIV/Aids का इलाज हो सकता है? जानिए भारत में क्या-क्या इलाज हैं संभव

जानिए HIV/Aids के इलाज के लिए Antiretroviral therapy सहित क्या-क्या इलाज होते हैं?

एचआईवी/ एड्स एक जानलेवा बीमारी है, जो तेजी से अपने पांव पसार रही है। एड्स के कारण पिछले तीन दशकों में 25 मिलियन से ज्‍यादा लोगों की मौत हो गई है। वर्तमान में दुनियाभर में लगभग 34 मिलियन से ज्‍यादा एचआईवी वायरस से संक्रमित हैं। क्या आप जानते हैं एड्स कैसे होता है? दरअसल इस बीमारी के तेजी से फैलने के मुख्‍य कारणों में एक जानकारी का अभाव भी है। भविष्‍य में एचआईवी का इलाज संभव हो या नहीं लेकिन वर्तमान में इससे बचने का सबसे आसान तरीका बचाव ही है। मुंबई स्थित पीडियाट्रिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कंसल्टेंट पीडियाट्रिक एचआईवी टेलीमेडिसिन डॉक्टर ममता एम लाला आपको एचआईवी/एड्स के इलाज के बारे में तमाम जानकारी दे रही हैं।

एचआईवी क्या है? 

एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस) एक ऐसा वायरस है, जिसकी वजह से एड्स होता है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है। जिस इंसान में इस वायरस की मौजूदगी होती है, उसे एचआईवी पॉजिटिव कहते हैं। आमतौर पर लोग एचआईवी पॉजिटिव होने का मतलब ही एड्स समझने लगते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। एचआईवी के शरीर में दाखिल होने के बाद शरीर की प्रतिरोधक क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है और शरीर पर तरह तरह की बीमारियां और इन्फेक्शन पैदा करने वाले वायरस अटैक करने लगते हैं। एचआईवी पॉजिटिव होने के करीब 8 से 10 साल बाद इन तमाम बीमारियों के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं। इस स्थिति को ही एड्स कहा जाता है। वैसे, एचआईवी पॉजिटिव होने के बाद से एड्स होने तक के गैप को दवाओं की मदद से बढ़ाया जा सकता है और कुछ बीमारियों को ठीक भी किया जा सकता है। एचआईवी पॉजिटिव होना या एड्स अपने आप में कोई बीमारी नहीं हैं, बल्कि इसकी वजह से बीमारियों से लड़ने की शरीर की क्षमता कम हो जाती है और तरह तरह बीमारियां अटैक कर देती हैं।

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एचआईवी इन्फेक्शन रोकने के उपाय

कंडोम- कंडोम के सही इस्तेमाल से आप एचआईवी इन्फेक्शन से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं। कंडोम लगाकर सेक्स करने से स्पर्म योनि में नहीं जा पाता है। इसी तरह फीमेल कंडोम भी सुरक्षित है। कंडोम आपको बाजार में आसानी से 100 रुपये तक का मिल सकता है।

प्री-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस- यह दो एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं एम्ट्रीसिटाबिन (emtricitabine) और टेनोफोविर (tenofovir) की एक मिश्रित खुराक है। एचआईवी-नेगेटिव पार्टनर को डॉक्टर की सलाह पर रोजाना एक गोली लेनी चाहिए। यह दवा वायरस के ब्लॉक करने और उसे बॉडी में फैलने से रोकने में मददगार है। इसकी कीमत 1400/30 टेबलेट्स है।

पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस-एचआईवी के जोखिम को 72 घंटे के भीतर कम करने के लिए एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। हेल्थ केयर वर्कर्स को इसके इस्तेमाल की सलाह दी जाती है क्योंकि कार्यस्थल पर उन्हें नीडल चुभ सकती है। इसके अलावा काउंसिलिंग, फर्स्ट ऐड केयर और एचआईवी टेस्ट भी इसमें शामिल है। इन दवाओं की कीमत 3000/30 टेबलेट्स है।

एचआईवी/एड्स के लिए ट्रीटमेंट

एंटीरेट्रोवाइरल ट्रीटमेंट (एआरटी) को बॉडी में वायरस की रफ्तार को कम करने के लिए प्रभावी पाया गया है। इसमें तीन दवाएं शामिल होती हैं जिन्हें रोजाना सही समय पर लेना जरूरी है। इन्हें लेने से व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। ये दवाएं बॉडी में वायरस को बढ़ने से रोकती हैं।साथ ही मरीज का इम्युनिटी सिस्टम मजबूत करती हैं जिससे वो इन्फेक्शन से लड़ सके। इन दवाओं की कीमत व्यक्ति, उम्र और उपचार पर निर्भर करती है।

इस उपचार की कमियां

  • लो लेवल पर वायरस का गठन फिर से हो सकता है और जमा हो सकता है।
  • आपको नियमित रूप से लंबे समय तक इलाज की जरूरत होती है।
  • लंबे समय तक इलाज कराने से शरीर में विषाक्त जमा होने का खतरा होता है।
  • दवा परहेजों का पालन करने में कठिनाइयां होती हैं।
  • कुछ दवाओं को झेलना मुश्किल होता है।

क्या एचआईवी का इलाज संभव है?

एचआईवी का कोई इलाज नहीं है। एक बार शरीर में आ जाने के बाद वायरस ताउम्र शरीर में रहता है। फिर भी दवाओं की मदद से एचआईवी पॉजिटिव होने से लेकर एड्स होने तक के गैप को बढ़ाया जा सकता है। कोशिश की जाती है कि एचआईवी पीड़ित शख्स लंबे समय तक बीमारियों से बचा रहे। यह वक्त कितना बढ़ाया जा सकता है, यह उस शख्स पर निर्भर करता है। अलग-अलग मामलों में यह वक्त अलग-अलग हो सकता है। इसी तरह एड्स हो जाने के बाद व्यक्ति कितने दिनों तक जिंदा रहेगा, यह भी उसके अपने रहन-सहन, खानपान और इलाज पर निर्भर करता है। एचआईवी पॉजिटिव व्यक्ति को इलाज के दौरान एंटी-रेट्रोवायरल ड्रग्स दिए जाते हैं। एजेडटी, डीडीएल, डीडीसी कुछ कॉमन ड्रग्स हैं। बर्लिन के टिमोथी रे ब्राउन कैंसर से इलाज के जरिए पूरी तरह ठीक होने वाले दुनिया के पहले व्यक्ति माने जाते हैं। ब्राउन को ल्यूकीमिया था जिसे एचआईवी प्रतिरोधी जीन वाले व्यक्ति के स्टेम सेल ट्रांस्प्लांट द्वारा उनका इलाज किया गया था।

एचआईवी टीके

रिसर्चर कुछ ऐसे टीके विकसित करने पर काम कर रहे हैं, जिससे रोगी का इम्युनिटी सिस्टम बढ़ाया जा सके ताकि वो एचआईवी वायरस का मुकाबला कर सके।

एड्स को रोकने के लिए एचआईवी वायरस

एक शोध के दौरान एक वैज्ञानिक ने लेबोरेटरी में एचआईवी से लड़ने के लिए एचआईवी का इस्तेमाल किया। उसने एक मौजूदा एचआईवी प्रोटीन को परिवर्तनशील कर (Nullbasic) प्रोटीन बनाया, जो वायरस को रोकने के लिए मजबूती प्रदान करता है। लेकिन इसका उद्देश्य वायरस के इलाज के लिए नहीं है।

पैसिव इम्मुनोथेरेपी (Passive immunotherapy)

इस थेरेपी का इस्तेमाल एचआईवी पीड़ित को वायरस को कंट्रोल करने के लिए किया जाता है। एक अध्ययन के अनुसार, इस थेरेपी से एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं का सहारा लिए बिना एचआईवी इन्फेक्शन को कंट्रोल किया जाता है।

एमएक्स2 जीन (MX2 gene)

वैज्ञानिकों ने एमएक्स2 जीन की खोज की है। इस जीन से बॉडी के अंदर एचआईवी वायरस को बाधित किया जाता है जिससे वो फैल नहीं पाता है।

जेनेटिकली मॉडिफाइड सेल्स (Genetically modified cells)

इस थेरेपी के पहले मेडिकल ट्रायल में सफलता मिलने से एक एचआईवी के इलाज में एक उम्मीद जगी है। ट्रायल के दौरान यह देखा गया कि मरीजों की नैचुरल इम्यून सेल्स को रिप्लेस करने के बाद उन्हें एचआईवी के खिलाफ मजबूती से लड़ने में मदद मिली।

मेलीटिन (Melittin)

एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने मधुमक्खी के जहर में एक टोक्सिन मेलीटिन (Melittin) पाया जिसमें एचआईवी वायरस को मारने की शक्ति हो सकती है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इससे एक जेल बनाया जा सकता है जिसे एचआईवी को फैलने से रोकने के लिए योनि पर लगाया जा सके।

इम्मुनोटोक्सिन (Immunotoxin)

शोधकर्ताओं ने एक माउस मॉडल के तहत यह प्रमाणित किया कि एक एचआईवी-स्पेसिफिक पॉइजन सेल्स को खत्म कर सकता है। इसमें वायरस एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के बावजूद सक्रिय रूप से पैदा हो जाता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि एंटीरेट्रोवाइरल की तुलना में इम्यूनटोक्सिन से इन्फेक्टेड सेल्स को कम किया जा सकता है जिनसे विभिन्न अंगों में वायरस का उत्पादन होता है और ब्लड में एचआइवी का लेवल बढ़ता है।

रेडियोइम्यूनोथेरेपी (Radioimmunotherapy)

इस थेरेपी में इन्फेक्टेड सेल्स को जकड़ लिए जाता है और रेडिएशन द्वारा खत्म किया जाता है। शोधकर्ताओं ने एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी के साथ इलाज के बाद रोगियों के ब्लड टेस्ट में बचे हुए एचआईवी संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए आरआईटी का इस्तेमाल किया। एचएएआरटी और आरआईटी का वायरस और इन्फेक्टेड सेल्स को खत्म करने के लिए एक साथ इस्तेमाल किया जाता है।

एनईएफ प्रोटीन (NeF protein)

शोधकर्ताओं ने एक नए प्रोटीन एनईएफ की पहचान की है। यह प्रोटीन अगली पीढ़ी के लिए एंटी- एचआईवी दवा साबित होगी।

न्यू प्रोटीन (VRC07-αCD3)

वैज्ञानिकों ने एक नया प्रोटीन (VRC07-αCD3) बनाया है जो एचआईवी को कमजोर करने और एचआईवी के इलाज में सहायक है।

टेनासिन- सी (टीएनसी) प्रोटीन (Tenascin-C (TNC) protein)

वैज्ञानिकों ने ब्रेस्ट मिल्क में इस प्रोटीन को पाया है जो संक्रमित मां से उसके बच्चे को वायरस से बचा सकता है। यह प्रोटीन ब्रेस्ट में वायरस को बेअसर कर देता है। अन्यथा बार-बार संपर्क में आने से शिशु भी संक्रमित हो सकता है।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

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