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स्लीप टेस्ट कैसे होता है?

इस टेस्ट में पता लगाने की कोशिश की जाती है कि आपको नींद से जुड़ी परेशानियां क्यों महसूस हो रही हैं।

स्लीप टेस्ट, स्लीप स्टडी या नींद की जांच की प्रक्रिया को पोलीसोम्नोग्राफी (polysomnography) कहा जाता है। इस टेस्ट के दौरान आपके स्लीप पैटर्न की जांच की जाती है और यह पता लगाने की कोशिश की जाती है कि आपको नींद से जुड़ी परेशानियां क्यों महसूस हो रही हैं। पोलीसोम्नोग्राफी की मदद से आपकी स्लीप डिसॉर्डर (sleep disorder)से राहत के लिए सही इलाज के तरीका चुनने के लिहाज से भी मदद होती है।

पोलीसोम्नोग्राफी में जांच के दौरान एक साथ एकत्र किए गए विभिन्न शारीरिक संकेतों को रिकॉर्ड, उनका विश्लेषण और व्याख्या की जाती है। इन शारीरिक संकेतों में मस्तिष्क तरंगे (ईईजी), हार्ट रेट (ईसीजी), सांसों की गति, खून में ऑक्सिजन का स्तर, आंखों और पैरों में गतिविधियां शामिल हैं

इन चीज़ों का पता लगाने के लिए स्लीप स्टडी की जाती है -

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  • नींद के समय सांसों की गति या स्लीप एप्निया ( sleep apnoea)
  • आरईएम (REM) और नींद से जुड़ी गड़बड़ियां (sleep behaviour disorder)
  • नींद में चलना या सोते वक़्त अज़ीब हरकतें करना
  • अनिद्रा की पुरानी बीमारी (Chronic insomnia)
  • नींद में हाथ-पैर या शरीर के अंगों का हिलना-डुलना (Periodic limb movement disorder)

पोलीसोम्नोग्राफी एक कम-नुकसानदायक और सुरक्षित तरीका है जिसमें मरीज़ को एक दिन रातभर के लिए हॉस्पिटल में रहना होगा। आप रोज़ जिस समय सोते हैं, उसे ध्यान में रखते हुए आपको कम-से –कम दो घंटे पहले अस्पताल बुलाया जाएगा। आप अपने काम की चीज़ें जैसे पजामा, किताबें, आईपैड आदि अपने साथ ला सकते हैं। जब आप सोने के लिए तैयार हो जाएंगे, तो टेक्नीशियन आपके सिर, कनपटी, सीने और पैरों पर सेंसर अटैच कर देगा। ये सेंसर तारों या वायर की मदद से कम्प्यूटर से जोड़े जाएंगे। ये वायर पर्याप्त लम्बे होते हैं और इनकी वजह से आपको बिस्तर पर करवट लेने या उठने-बैठने में दिक्कत नहीं होगी। इसके साथ एक क्लिप आपकी उंगली पर लगा दी जाएगी जिसकी मदद से आपके रक्त में ऑक्सिजन के स्तर की जांच की जाएगी।

आपकी नींद का मेजरमेंट एक सतत ग्राफ के रूप में दर्ज किया जाएगा। टेक्नीशियन आपको पूरी रात सोते हुए देखेगा और साथ ही ज़रूरत पड़ने पर आपकी मदद करेगा। सुबह सेंसर्स हटा दिए जाएंगे, और उसके बाद आप घर जा सकेंगे। आपका डॉक्टर आपको दोबारा आने का समय बताकर आपको फिर बुला सकता है।

इन बातों का रखे ध्यान-

  • टेस्ट वाले दिन कैफीन वाली चीज़ें न खाएं न पीएं। कैफीन की वजह से आपके टेस्ट के परिणाम ग़लत आ सकते हैं।
  • आपके रक्त में ऑक्सिजन के स्तर की जांच सेंसर की मदद से की जाती है। इस जांच में सुइयों का इस्तेमाल नहीं किया जाता और यह पूरी तरह सुरक्षित है।
  • सेंसर्स को चिपकाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे पदार्थ से कुछ लोगों को त्वचा पर खुजली या जलन हो सकती है।
  • स्लीप टेस्ट के लिए पूरी रात अस्पताल में सोने की ज़रूरत नहीं, इसलिए आप सो सकेंगे या नहीं इस बात को लेकर ज़्यादा चिंता न करें।

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अनुवादक-Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत Shutterstock .

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