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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:41 AM IST
जोड़ों में दर्द चिकनगुनिया के सबसे पहले लक्षणों में गिना जाता है। डेंगू में जहां डॉक्टर रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर अधिक ध्यान देते हैं वहीं चिकनगुनिया में बुखार और जोड़ों के दर्द पर काबू पाने की कोशिश अधिक की जाती है। जोड़ों का यह दर्द हल्का, गंभीर या बहुत गंभीर हो सकता है और मरीज़ को चलने और हिलने-डुलने में भी परेशानी होने लगती है। दर्द की गंभीरता के आधार पर डॉक्टर इलाज तय करते हैं। फोर्टिस हॉस्पिटल, मुंबई के कंसल्टेंट फ़िज़िशियन डॉ. प्रदीप सिंह बता रहे हैं कि चिकनगुनिया के समय किस तरह जोड़ों के दर्द का इलाज किया जाता है। बुखार हुआ है? इस तरह पता कीजिए चिकनगुनिया, डेंगू या मलेरिया में अंतर।
अगर आपको हल्का जॉइंट पेन है तो दर्द से राहत के लिए आपका डॉक्टर आपको पेनकिलर्स या ऐनल्जीसिक की सलाह दे सकता है। चिकनगुनिया को ठीक करने का कोई निश्चित इलाज या दवा नहीं है, बस बुखार और जोड़ों के दर्द को कम करने की कोशिश की जाती है। चिकनगुनिया का पता लगने पर अधिकांश मरीज़ों को पैरासिटेमल या कॉम्बिफ्लेम जैसी दवाइयों की सलाह दी जाती है। इसके अलावा कुछ दिनों तक आराम करना चाहिए। इस तरह सूजन कम होती है और मरीज़ को आराम मिलता है। ज़ल्दी ठीक होना चाहते हैं तो चिकनगुनिया में डायट टिप्स फॉलो करें।
बहुत गंभीर दर्द होने पर पीड़ित को इंडोमेथसिन हाइड्रोकोडोन (indomethacin hydrocodone) जैसी एंटी-इन्फ्लैमटॉरी दवाइयों की सलाह दी जाती है। कुछ विशेष स्थितियों में डॉक्टर मरीज़ को कुछ समय के लिए स्टेरॉइड लेने की सलाह दे सकता है। अगर दर्द काफी दिनों तक रहता है तो स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए दवाइयां खाते रहें। हालांकि, आपका डॉक्टर दर्द की गंभीरता के आधार पर दवा की मात्रा तय करेगा। इसके साथ ही नियमित रूप से हीट-पैक लगाने से भी दर्द कम होता है।
दूसरी दवाइयों की तरह चिकनगुनिया की दवाइयों के भी साइड-इफेक्ट हो सकते हैं। साइड-इफेक्ट्स नज़र में आने पर डॉक्टर से सम्पर्क करें ताकि वह दवाइयों के डोज़ में आवश्यक बदलाव कर सके। आइस पैक का इस्तेमाल न करें, खट्टी चीजें न खाएं, कोल्ड्रिंक न पीएं क्योंकि ठंडी चीजों या मौसम से जोड़ों का दर्द गंभीर हो सकता है। कभी भी बिना डॉक्टरी सलाह के खुद से दवाइयां खरीदकर न खाएं।
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत- Shutterstock