... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
बूढ़े लोगों में अल्जाइमर की समस्या होना एक आम बात है लेकिन शायद आपको यह पता नही कि अगर आप सही समय पर इसकी पहचान कर लें तो इस समस्या से बच सकते हैं। अल्जाइमर जैसी बीमारी के साथ सबसे बड़ी दिक्कत यही है कि जब तक आपको इसके बारे में पता चलता है तब तक आप पूरी तरह इसकी चपेट में आ जाते हैं। हम यहाँ आपको अल्जाइमर के शुरुवाती लक्षणों के बारे में बता रहे हैं जिससे आसानी से आप इस रोग की पहचान कर सकते हैं।
ब्लड सैंपल: ब्रिटिश साइंटिस्ट द्वारा जर्नल अल्जाइमर एंड डीमेंशिया में प्रकाशित एक शोध के अनुसार ऐसे लोग जो बहुत जल्दी बाते भूलने लगते हैं उन लोगों में एक ख़ास तरह का ब्लड प्रोटीन पाया जाता है जो दिमाग को नुकसान पहुंचाता रहता है और आगे चलकर मरीज इस बीमारी का शिकार हो जाता है। इस शोध में जिन लोगों को शामिल किया गया उनमें से लगभग 87% लोग एक साल के भीतर ही अल्जाइमर के शिकार हो गये। अल्जाइमर मुख्यतया टॉक्सिक प्रोटीन के कारण होता है जो दिमाग की कोशिकाओं को लगातार नुकसान पहुंचाते रहते हैं और फिर धीरे धीरे आप इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।
आपके चलने-फिरने का ढंग: जर्नल न्यूरोलॉजी द्वारा किये एक ऑनलाइन सर्वे में पांच देशों के लगभग 27000 लोगों को शामिल किया गया और उनके आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया कि लोगों के तेज चलने या धीमे चलने से उनके अल्जाइमर होने के खतरे का पता लगाया जा सकता है। हालांकि सिर्फ चलने से ही आप इसका अंदाज़ा नहीं लगा सकते बल्कि इसके साथ उनसे किये गये सवाल जवाब के आधार पर आप काफी हद तक अंदाज़ा लगा सकते हैं। लेकिन ये अंदाज़ा सिर्फ न्यूरोफिजिशियन या सायकोथेरेपिस्ट ही लगा सकते हैं आप खुद नहीं।
ब्लड ग्लूकोज लेवल: जो लोग डायबिटीज से पीड़ित रहते हैं उनका ब्लड ग्लूकोज लेवल हमेशा बदलता रहता है खासतौर पर खाना खाने के बाद अक्सर कुछ लोगों का ग्लूकोज लेवल अचानक से बढ़ जाता है। चूहों पर किये एक अध्ययन में पाया गया कि अचानक से ब्लड ग्लूकोज के बढ़ने से एमीलॉईड बीटा का लेवल बढ़ जाता है जो कि सीधे तौर पर अल्जाइमर के लिए ज़िम्मेदार है। इसलिए आप बढ़े हुए ब्लड ग्लूकोज लेवल से भी अल्जाइमर होने के खतरे को पहचान सकते हैं।
देखने और सुनने की क्षमता: विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आपकी किसी चीज को सूंघने की क्षमता कम हो रही है तो ये भी अल्जाइमर का शुरुवाती लक्षण हो सकता है। इसके अलावा एमीलॉईड बीटा के बढ़ जाने के कारण भी कुछ मामलों में रेटिना पर बुरा असर पड़ता है जिससे देखने की क्षमता में कमी आ जाती है। ऐसा कुछ भी महसूस होने पर डॉक्टर से अपनी जांच करवाएं।
आपकी आवाज: एक भारतीय मूल के वैज्ञानिक के अनुसार आपकी आवाज से भी इस बात का अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि आप पार्किन्सन डिसीज या अल्जाइमर के शिकार हो सकते हैं। हालांकि अभी इस विषय पर शोध चल ही रहा है इसलिए पूरी तरह इस बात की पुष्टि नहीं की जा सकती है लेकिन आने वाले कुछ ही सालों में ऐसे तकनीक विकसित हो जाएगी जिसमें फोन पर भी किसी की आवाज सुनकर यह अंदाज़ा लगाया जा सकेगा कि वह अल्जाइमर से पीड़ित है या नहीं।
Read this in English
अनुवादक: Anoop Singh
चित्र स्रोत: Shutterstock