अचानक दिल की धड़कन रुकने (Cardiac arrest) के संकेत और बचाव के उपाय

Sudden cardiac arrest से पीड़ित व्यक्ति की ऐसे करें मदद

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:42 AM IST

अचानक दिल की धड़कन रुकना यानि सडन कार्डिक अरेस्ट (Sudden Cardiac arrest) हार्ट अटैक की तरह नहीं है। यह एक ऐसी जटिल समस्या है, जिसका सही समय पर इलाज नहीं कराने से ये असामयिक मौत का कारण बन सकती है। हार्ट अटैक में ब्लॉक्ड आर्टरी के कारण दिल को रक्त की आपूर्ति नहीं हो पाती है जबकि कार्डिक अरेस्ट में इलेक्ट्रिक इनबैलेंस की वजह से दिल धड़कना बंद कर देता है। दिल का सही तरह से काम ना करना अनियमित दिल की धड़कन (arrhythmia) का कारण बन सकता है, जिसमें व्यक्ति भावशून्य हो जाता है। इसमें व्यक्ति सांस नहीं ले पाता है और हांफने लगता है। इस स्थिति में आप इमरजेंसी कॉल कर सकते हैं या सीपीआर (कार्डियो पल्मोनरी रिससाइटेशन) यानि मुंह से सांस देना या छाती को थपथपाना शुरू कर सकते हैं।

सडन कार्डिअक अरेस्ट (एससीए) की ऐसे करें पहचान

आमतौर पर एससीए के चेतावनी या लक्षण नहीं होते हैं। हालांकि इसके तीन मुख्य संकेत होते हैं, जिनके पहचानकर आप व्यक्ति की मदद कर सकते हैं।

  • व्यक्ति अचानक होश खो बैठता है। यही कारण है कि पीड़ित अचानक गिर पड़ता है। कंधों को थपथपाने पर भी मरीज कोई प्रतिक्रिया नहीं देता है।
  • व्यक्ति नॉर्मल तरीके से सांस नहीं ले पाता है और दिल अचानक तेजी से धड़कना शुरू कर देता है।
  • पल्स और ब्लड प्रेशर थम जाते हैं और शरीर व दिमाग के अन्य हिस्सों में खून की आपूर्ति नहीं हो पाती है।

कार्डिक अरेस्ट से पीड़ित की ऐसे करें मदद

फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी के अडिशनल डायरेक्टर डॉक्टर अपर्णा जसवाल के अनुसार, ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन नंबर पर फोन करें या फिर सीपीआर शुरू करें। अगर सीपीआर को सही तरीके से किया जाए, तो मरीज की जान बचाई जा सकती है। इस तकनीक से मेडिकल हेल्प नहीं मिलने तक बॉडी में ब्लड और ऑक्सीजन संचारित होता रहता है। अगर आपके पास एम्ब्यूलेटरी एक्सटर्नल डीफाइब्रलेटर (AED) डिवाइस है, तो आपके पास रोगी की जान बचाने का सबसे अच्छा मौका है।

इससे कैसे बचाव किया जा सकता है?

सडन कार्डिअक डेथ से बचने का सबसे सही तरीका इम्प्लान्टबल कार्डियोवर्टर डीफाइब्रलेटर (ICD) है। हालांकि इस बात का पता लगाना थोड़ा मुश्किल होता है कि किसी व्यक्ति को आईसीडी लगाना कब जरूरी होता है। इसलिए अगर आप कभी आर्टरी डिजीज, हाइपरटेंशन, हाई कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज या अनियमित दिल की धड़कन से पीड़ित रहे हैं, तो आपको आईसीडी के बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

इम्प्लान्टबल कार्डियोवर्टर डीफाइब्रलेटर क्या है?

ये बैटरी से चलने वाली एक ऐसी मशीन है, जिसे चेस्ट में स्किन के नीचे लगाया जाता है। ये दिल की असामान्य धड़कन को नियंत्रित कर अचानक से होने वाली हृदय विफलता और मृत्यु के खतरे को कम कर देती है। वास्तव में इस डिवाइस की पाइप हृदय से जुड़ी रहती है और हर धड़कन का रिकॉर्ड रखती है। दिल का दौरा आने पर मरीज को यह डिवाइस झटका देता है। इससे धड़कनों पर नियंत्रण होता है।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

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