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Written By: Editorial Team | Published : February 7, 2017 5:15 PM IST
'मैं डिप्रेशन में हूं'- यह एक ऐसा वाक्य है जो हमारी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में बार-बार इस्तेमाल होते हैं। आए दिन कोई कलाकार बताता है कि वह डिप्रेशन से गुज़र चुका है या उसे डिप्रेशन महसूस हो रहा है। जहां इस दिमागी अवस्था के बारे में बात करने के लिए हिम्मत की ज़रूरत पड़ती है। साथ ही यह हमें रोज़-रोज़ महसूस होनेवाले चिड़चिड़ेपन और झल्लाहट के बारे में सचेत करता है और उसके बारे में सोचने के लिए मज़बूर करता है। क्या हमारी यह भावनाएं हमारे डिप्रेशन के शिकार होने का सबूत हैं?
तनाव और डिप्रेशन क्या है
हमारे मन की स्थिति को परिभाषित करने के लिए 'तनाव' और 'अवसाद या डिप्रेशन' जैसे शब्दों का अक्सर इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन बहुत से लोग इनके बीच का अंतर समझ नहीं पाते। हमें जो बात समझने की ज़रूरत है वह यह है कि यह दोनों स्थितियां अलग हैं और इनका हमारी ज़िंदगी और मन पर अलग-अलग तरीकों से असर पड़ता है।
तनाव एक घटना या एक स्थिति से शुरू हो रहा है, जबकि अवसाद एक मानसिक विकार है जो दिमाग के काम करने के तरीके को प्रभावित करता है। डिप्रेशन या अवसाद किसी आनुवंशिक गड़बड़ी के कारण भी हो सकता है।
अक्सर डिप्रेशन और तनाव के लक्षण वाली समस्याएं एक जैसी होती हैं और इसलिए इनके बीच अंतर समझ पाना मुश्किल होता है। लाइफस्टाइल से जुड़े बदलाव करने या उनका सामना करने से तनाव के लक्षणों से राहत पायी जा सकती है। लेकिन डिप्रेशन से राहत पाने के लिए आपको डॉक्टरी मदद की आवश्यकता पड़ सकती है। सबसे अच्छी बात यह है कि डिप्रेशन से परेशान व्यक्ति अगर सही समय पर डॉक्टर के पास जाए तो उसका इलाज संभव हो सकता है।
तनाव केवल बुरा नहीं होता
‘अगर आप काफी समय तक तनाव से पीड़ित रहते हैं तो इसका आपके स्वास्थ्य पर हानिकारक असर होता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि तनाव आपके लिए फायदेमंद भी हो सकता है। जी हां, मुंबई से मनोवैज्ञानिक और फैमिली साइकाइट्रिस, सईदा रुकशेदा बताती हैं, कि कई बार तनाव आपको जीवन में कुछ अच्छा करने के लिए प्रेरित करता है और आपको एक बेहतर इंसान के तौर पर उभरने में सहायता करता है।
तनाव के दो प्रकार होते हैं
तनाव सकारात्मक या नकारात्मक हो सकता है। ‘ज़्यादातर लोग असफलता, ब्रेक-अप, ऑफिस में बहुत अधिक काम के दबाव या नौकरी छूटने की वजह से उदास, नाखुश या तनाव में रहते हैं। ध्यान रखिए, शादी , परीक्षा या नयी नौकरी जैसे खुशी वाले मौकों पर भी व्यक्ति तनाव में रहता है। हम विभिन्न स्थितियों के अनुसार खुद को किस तरह तैयार करते हैं, उनका किस तरह सामना करते हैं या कैसी प्रतिक्रिया देते हैं, वे सब हमारा तनाव बढ़ानेवाले विभिन्न कारकों का सामना करने में सहायता करते हैं।,’ डॉ. सईदा ने बताया। हालांकि, तनाव डिप्रेशन की शुरुआत भी हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि हर तनावग्रस्त व्यक्ति को आगे चलकर डिप्रेशन हो सकता है।
तनाव बनाम डिप्रेशन
‘तनाव और डिप्रेशन में प्रमुख अंतर है यही है कि तनाव वाली स्थिति के गुज़रने के बाद आप सामान्य रुप से अपनी ज़िंदगी जी सकते हैं। लेकिन डिप्रेशन की स्थिति में अकेले, उदास, निरुत्साही होने की भावना पूरी ज़िंदगी भर महसूस हो सकती है। डॉ. सईदा ने बताया कि, डिप्रेशन के शिकार व्यक्ति के मन से ये भावनाएं उनके मनपसंद कामों में उन्हें शामिल करने के बाद भी जल्दी नहीं जाती।’
डिप्रेशन के बाद जो मानसिक और शारीरिक बदलाव आते हैं वो काफी गम्भीर और लम्बे समय तक टिकनेवाले होते है। डिप्रेशन के कुछ लक्षण हैं सोने का वक़्त बदलना, थकान, मूड स्विंग, पश्चताप, निराशा और ज़िंदगी न जीने की इच्छा। यह दिमाग में केमिकल्स से जुड़े बदलावों के कारण होते हैं जो खुद-ब-खुद ठीक नहीं होते।
तनाव और डिप्रेशन के लक्षणों में अंतर
वैसे तो तनाव और डिप्रेशन के लक्षण समान ही होते हैं। लेकिन कुछ विशेष अंतरों के आधार पर आप समस्या का पता लगा सकते हैं। जैसे-
सोने में दिक्कत- तनाव होने पर हो सकता है कि आपको काफी देर रात तक नींद न आए या फिर साधारण से काफी अधिक समय तक सोते रहें। लेकिन डिप्रेशन होने पर आपकी नींद में इस तरह के बदलाव होंगे कि शायद आपको अनिद्रा या एक्सेसिव स्लीप डिसॉर्डर जैसी तकलीफें हों। यही नहीं कई-कई घंटों नींद लेने के बाद भी मरीज़ सुस्त महसूस करेगा और उसकी थकान नहीं मिटेगी।
अभिभूत या निराशाजनक महसूस करना- तनाव होने पर व्यक्ति किसी कार्य को सम्पन्न करने में बहुत अधिक मेहनत करते हुए अपनी असमर्थता का सामना करने की कोशिश करता है। जबकि डिप्रेशन में मरीज़, हर वक़्त और हर जगह निराशावादी और उदास महसूस करता है।
प्रदर्शन में दिक्कत- तनाव के कारण या तो पीड़ित व्यक्ति या तो बहुत अच्छा प्रदर्शन करता है या बहुत निराशाजनक। यह बात इस पर भी निर्भर करती है वह किसी स्थिति का किस तरह सामना कर रहा है। हालांकि, डिप्रेशन में पीड़ित व्यक्ति को फैसले लेने, काम पर ध्यान देने और मदद के बावजूद बेहतर प्रदर्शन करने में परेशानी होगी।
शारीरिक लक्षण- तनाव और डिप्रेशन के अपने शारीरिक लक्षण दिखायी पड़ते हैं। वजन बढ़ना, थकान, बुखार और झटके लगना ऐसी ही समस्याएं हैं। हालांकि, तनाव की स्थिति में सही कारण का पता लगने के बाद इन समस्याओं पर काबू पाया जा सकता है जबकि डिप्रेशन में ये लक्षण दिन-ब-दिन गम्भीर होते जाते हैं और पीड़ित व्यक्ति केवल असहाय और उदास महसूस करने लगता है।
आत्महत्या की कोशिशें- तनाव चाहे कितना भी गम्भीर हो पीड़ित व्यक्ति जान देने या आत्महत्या करने के बारे में कभी नहीं सोचता लेकिन, डिप्रेशन होने पर आत्महत्या की कोशिशें करना एक आम बात बन जाती है।
मूड बदलना- तनावग्रस्त होने पर व्यक्ति का बेचैन, परेशान, चिड़चिड़ा या उदास महसूस करना आम बात है। लेकिन जब व्यक्ति डिप्रेशन या अवसाद से ग्रस्त हो तो बिना किसी विशेष कारण के व्यक्ति बार-बार बहुत अधिक गुस्सा और झुंझला जाता है। इन प्रबल भावनाओं की वजह डिप्रेशन से परेशान व्यक्ति बहुत अधिक पश्चाताप और उदासी से भर जाता है।
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अनुवादक-Sadhna Tiwari
चित्रस्रोत- Shutterstock.