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अनुवादक – Mousumi Dutta
बवासीर कहें या पाइल्स इसके कष्ट का बयान करना मुश्किल है। ये जिसको होता है वही इस दर्द को जानता है। मल त्याग करने या मोशन पास करने के समय खून निकलने के साथ-साथ भयंकर दर्द होना बवासीर का आम लक्षण है।
बवासीर गुदा और मलाशय की दीवारों के साथ चिकनी मांसपेशियों के रक्त वाहिकाओं की परत होती हैं। इस दौरान रक्त वाहिकाओं में अक्सर सूजन आ जाता है और इन वाहिकाओं से खून बहने लगता है, दर्द होता है, रक्त का गाढ़ा होना शुरू हो जाता है और जिसके कारण रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर दबाव पड़ने लगता है। पाइल्स ज्यादातर 45-65 साल के उम्र में होता है। शायद आपको जानकर आश्चर्य होगा कि बवासीर होने के लिए प्रमुख कारणों में से एक कब्ज है जो उम्र के बढ़ने के साथ अपना प्रभाव दिखाने लगता है।
द प्रीमानेन्टा जर्नल (The Premanente Journal) के अनुसार अगर बवासीर से बचना है तो कब्ज़ के बीमारी को सबसे पहले ठीक करने की ज़रूरत है। कब्ज़ के परेशानी को दूर करने के लिए फाइबर रीच फूड खाने की ज़रूरत होती है। स्टडी के अनुसार जो लोग बवासीर से परेशान रहते हैं उन्हें अपने रोज के डायट में कम से कम 30-35 ग्राम फाइबर ज़रूर लेना चाहिए। बीन्स, फ़्रूट, वेजटबल और होल ग्रेन में भी फाइबर रहता है। इसके साथ ही बवासीर के मरीज़ को अपने डायट में सूखा अंजीर, आलूबुखारा, ब्लैकबेरी, रस्पबेरी, नाशपाती, किडनी और पिन्टो बीन्स, लेन्टीन्स और ब्राउन राईस आदि को शामिल करना चाहिए ताकि बॉवेल मूवमेंट बेटर हो सके। ये सारे फूड्स मल को नरम करने में मदद करते हैं। अध्ययन के अनुसार ईसबगुल से भी नैचुरल तरीके से कब्ज़ के बीमारी से राहत पाया जा सकता है।
इन फूड्स के अलावा सबसे ज्यादा जिस चीज की ज़रूरत हैं वह है पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की जिससे कुछ हद तक बवासीर के समस्या को कम किया जा सकता है।
चित्र स्रोत - Shutterstock