पीरियड्स के दौरान याद रखें ये 10 हाइजिन टिप्स

पीरियड्स शुरू होने के साथ ही लड़की नारीत्व की एक अलग ही दुनिया में प्रवेश करती है। पीरियड्स के दौरान उनकी हाइजिन से जुड़ी 10 खास टिप्स।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:40 AM IST

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

हम सभी के लिए पीरियड्स एक बहुत ही निजी मामला है। जिसके बारे में हम कभी न तो किसी से पूछते हैं कि पीरियड्स के दौरान सही तरीके से हाइजिन का ध्यान कैसे रखा जाए और हमारा तरीका सही है या नहीं। कई बार हम दिनभर एक ही नैपकीन इस्तेमाल करते हैं। ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में महिलाएं अब भी कपड़े का इस्तेमाल करती हैं जो अक्सर कई बार इस्तेमाल किया जाता है। चूंकि पीरियड्स को गंदा माना जाता है और इसी के चलते कुछ घरों में गंदे कपड़े को धोने के लिए डिटर्जेंट का इस्तेमाल करने की भी मनाही होती है। ऐसे में निश्चित तौर पर इन महिलाओं के लिए साफ-सफाई रखना काफी मुश्किल हो जाता है।

हम बता रहें हैं पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई से जुड़ी कुछ टिप्स जिनमें से शायद कुछ के बारे में आप जानते भी न हों।

1. सही सैनिटेशन उत्पाद चुनें-

आज महिलाओं के लिए बाज़ार में कई प्रकार के सैनेटरी पैड के साथ टैम्पोन और मेन्स्ट्रूअल कप उपलब्ध हैं। भारत में ज्यादातर अविवाहित लड़कियां सैनेटरी पैड का इस्तेमाल करना पसंद करती हैं। लेकिन अगर आप टैम्पोन इस्तेमाल करने जा रही हैं तो ऐसे उत्पाद का चुनाव करें जो सबसे कम फ्लो को भी सोख सके। हालांकि कई महिलाएं अलग-अलग दिन अलग-अलग तरह के पैड या तरीके इस्तेमाल करती हैं तो कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो किसी एक प्रकार के उत्पाद या किसी खास कंपनी के ही उत्पादों का प्रयोग करती हैं। यहां हम आपको यह सलाह देंगे कि किसी कंपनी का एक उत्पाद आप एक निश्चित अवधि तक इस्तेमाल करें। ताकि ये समझा जा सके कि वह उत्पाद आपके लिए कितना उपयोगी है। बार-बार और जल्दी-जल्दी उत्पाद बदलते रहना आपके लिए असुविधाजनक हो सकता है क्योंकि आप ही की तरह इन उत्पादों की अपनी विशेषताएं होती हैं जो हर व्यक्ति के लिए अलग तरह के परिणाम दर्शाते हैं।पढ़ें -पीरियड्स में कमज़ोरी और दर्द से बचने के लिए क्या खाएं?

2. पैड बदलते रहें-

मेन्स्ट्रूअल ब्लड (रक्त) एक बार शरीर से निकलने के बाद शरीर के अंदर मौजूद विभिन्न जीवों के साथ मिलकर दूषित हो जाता है। ऐसा कम बहाव वाले दिनों में भी होता है क्योंकि तब भी आपका पैड वैजाइना और पसीने के माध्यम से कीटाणुओं के संपर्क में आता है। जब इन जीवों को लम्बे समय तक नमी और गर्मी प्राप्त होती रहती है तो ये पेशाब से जुड़ी परेशानियां, रैशेज और वैजाइनल इंफेक्शन पैदा करते हैं। पैड बदलने का आदर्श समय हर 6 घंटे के बाद माना जाता है जबकि टैम्पोन को हर दो घंटे में बदल देना चाहिए। आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से भी चेंज करती रहें। जिन महिलाओं को अत्यधिक बहाव (फ्लो) होता है तो उन्हें बार-बार पैड बदलना होगा जबकि जिन्हें कम फ्लो होता है उन्हें उतने ज्यादा चेंज की जरूरत महसूस नहीं होती। अक्सर और खासतौर पर कम फ्लो वाले दिनों में आपका पैड या टैम्पोन पूरी तरह से साफ दिखता है लेकिन फिर भी नियमित समय पर उसे चेंज करतें रहें। अगर आप टैम्पोन को प्रयोग कर रही हैं तो आपको थोड़ी सावधानी बरतने की भी जरूरत होगी क्योंकि लंबे समय तक टैम्पोन यूं हीं पड़ा रहा तो टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम या टीएसएस की स्थिति बन जाएगी। टीएसएस एक ऐसी सिंड्रोम है जहां बैक्टेरिया शरीर के अंदर प्रवेश कर गंभीर इंफेक्शन पैदा कर सकते हैं। इससे आपको शॉक लग सकता है और मृत्यु भी हो सकती है। पढ़ें - यूरीन इंफेक्शन को नजरअंदाज करने से किडनी हो सकती है फेल

3. खुद की साफ-सफाई का रखें ध्यान –

आपके पीरियड्स के दौरान आपके शरीर से निकलनेवाला रक्त आपके वैजाइना की ओपनिंग के पास मौजूद लेबीअ और क्रस्ट जैसे छोटे-छोटे अंगों तक पहुंच जाता है। इसके अतिरिक्त रक्त को साफ करें। इस तरह आप वैजाइना और आसपास से उत्पन्न होनेवाली दुर्गंध को भी खत्म करती है। इसीलिए पैड बदलने से पहले वैजाइना और लेबीअ की सफाई करें। अगर ऐसा संभव नहीं तो टॉयलेट पेपर या टिश्यू पेपर से उस एरिया को पोंछ जरूर लें।

4. साबुन या वजाइनल हाइजन उत्पादों का न करें इस्तेमाल-

वजाइन के पास खुद की सफाई का एक प्राकृतिक तरीका है जो गुड और बैड बैक्टेरिया को संलुतिल करता है। साबुन से साफ करने पर गुड बैक्टेरिया खत्म हो सकते हैं और इंफेक्शन हो सकता है। हां पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई का ध्यान रखना ज़रूरी है और उसके लिए आप केवल गर्म पानी का इस्तेमाल करें। आप बाहरी हिस्सों पर साबुन का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन वजाइन या वल्व पर नहीं।

5. अपनाएं सफाई का सही तरीका-

सफाई करते समय हमेशा वैजाइना से शुरु करके एनस की तरफ जाएं। इससे उल्टी दिशा में सफाई न करें। ऐसा करने से बैक्टेरिया वैजाइना  और मूत्रमार्ग तक फैल जाएगा, जो इंफेक्शन का कारण बनता है।

6. सैनिटरी उत्पादों को सही ढंग से फेंके-

इस्तेमाल के बाद आपके सैनेटरी पैड या टैम्पोन को सही ढंग से फेंकना भी ध्यान देने लायक बात है क्योंकि उनसे इंफेक्शन और दुर्गंध फैलती है। इस्तेमाल के बाद उन्हें अच्छी तरह कागज में लपेटें। पैड या टैम्पोन को कभी भी टॉयटेल में फ्लश न करें क्योंकि इस तरह नालियां ब्लॉक हो सकती हैं। साथ ही साथ पैड फेंकने के बाद अपने हाथों को अच्छी तरह साफ करें क्योंकि इस पूरी प्रक्रिया के दौरान आपके हाथ कीटाणुओं के संपर्क में आ जाते हैं।

7. पैड रैश से ऐसे करें बचाव-

अधिक बहाव वाले दिनों में आपको पैड रैश की समस्या हो सकती है। अगर पैड बहुत देर तक गीले रहें तो जांघों के साथ घर्षण से पैड रैश हो जाता है। इससे बचने के लिए साफ-सफाई का ध्यान रखें। अगर रैशेज हो गए हैं तो बार-बार पैड चेंज करते रहें। नहाने और सोने से पहले एंटीसेप्टिक मरहम लगाएं। इससे आपको आराम भी मिलेगा और त्वचा को छिलने से भी बचाया जा सकेगा। अगर स्थिति गंभीर हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें जो आपको किसी मेडिकेटेड पाउडर की सलाह देगा।

8. एक ही तरीके का सैनिटेशन अपनाएं-

कुछ महिलाएं जिन्हें पीरियडस के दौरान बहुत अधिक फ्लो होता है वो एकसाथ दो पैड या एक टैम्पोन और एक पैड या कपड़े के साथ एक पैड का इस्तेमाल करती हैं। ये शायद उन्हें एक अच्छा तरीका लगता हो लेकिन ये तरीका बिल्कुल सही नही है। इस तरह के तरीके से शायद आपके पैड का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं होता और आपको पैड बदलने के लिहाज से भी कोई सहूलियत नहीं मिलती। इससे आपको रैशेज और इंफेक्शन हो सकता है और अगर टेम्पोन इस्तेमाल कर रही हैं तो टीएसएस का भी खतरा हो सकता है। अगर आप पैड के साथ किसी कपड़े का इस्तेमाल कर रही हैं तो उस कपड़े का साफ होना बहुत ज़रूरी है क्योंकि कपड़ा साफ नहीं होने पर वह आपके प्राइवेट एरिया को नुकसान पहुंचा सकता है। जबकि एकसाथ दो पैड इस्तेमाल करना असुविधाजनक हो सकता है जिससे आपको रैशज हो सकते हैं और आपका मूड भी चिड़चिड़ा हो सकता है।

9. नहाना ना भूलें

शायद आपको हमारी यह सलाह बेफिज़ूल लगे लेकिन कुछ जगहों पर ऐसे रिवाज़ हैं जहां महिलाओं को पीरियड्स के दौरान नहाने नहीं दिया जाता। पहले महिलाओं को खुले या सार्वजनिक स्थानों जैसे नदी या तालाब पर नहाना पड़ता था और ये उस मान्यता के पीछे का कारण था। लेकिन अब घर-घर में नल मौजूद हैं और नहाना सुविधाजनक बन गया है। ऐसे में आप पीरियड्स के दौरान नहाकर अपनी साफ-सफाई का सबसे अच्छा तरीका अपना सकती हैं। नहाने से आप अपने शरीर और प्राइवेट पार्टस् की सफाई हो जाती है साथ ही पीरियड्स के दौरान होनेवाले पेट दर्द, पीठ और कमर दर्द से भी राहत मिलती है और आपका मूड अच्छा होता है। बस आपको शॉवर के नीचे खड़े होकर गुनगुने पानी से नहाना है। पानी का प्रवाह आपकी पीठ और पेट की तरफ ज्यादा रहे और नहाने के बाद आपको पहले से कहीं ज्यादा आराम महसूस होगा।

10. अपने साथ रखें ज़रूरत की चीजें-

पीरियड्स के दौरान जब भी आपको बाहर जाना हो तो अपने साथ ज़रूरत का सामान कुछ चीजें जरूर रखें। अपने बैग में एक्स्ट्रा टैम्पोन और पैड रखना कभी न भूलें। साथ ही एक नरम तौलिया, थोड़े टिश्यू पेपर, हैंड सैनिटाइज़र, खाने के लिए कोई हेल्दी स्नैक, पानी की बोतल और एक ऐंटिसेप्टिक क्रीम (अगर इस्तेमाल करती हों तो) भी रखें जो आपको थोड़ी कम तकलीफ कर देंगी। नियमित समय पर आपके पैड और टैम्पोन बदलना ज़रूरी है और इसीलिए साथ रखे एक्स्ट्रा पैड और टैम्पोन काम आएंगे। उन्हें किसी साफ सुथरे पाउच या कागज की थैली में ठीक ढंग से और कीटाणुओं से बचाकर रखें। आपके बैग में यूं ही पड़े पैड या टैम्पोन वैजाइनल इंफेक्शन और मूत्रमार्ग संबंधी(urinary tract infection) समस्याएं पैदा कर सकते हैं। मुंह और हाथों की सफाई के बाद उन्हें पोंछने के लिए साथ रखे तौलिए का इस्तेमाल करें। प्राइवेट पार्ट्स की सफाई के बाद अतिरिक्त पानी को पोंछने के लिए पेपर टिश्यू काम आएंगें। टॉयलेट पेपर ना इस्तेमाल करें क्योंकि वह पानी लगने पर गीला हो जाता है और फट सकता है। आपका हैंड सैनिटाइज़र यहां बहुत काम आएगा क्योंकि आप उससे अपने हाथों के साथ-साथ फ्लैश नॉब और नल की टोंटी भी साफ कर सकती हैं। अगर दिनभर की भागदौड़ और काम से आपको कमज़ोरी या थकान महसूस हो तो अपने साथ रखा हुआ हेल्दी स्नैक खाएं औऱ आपको हाइड्रेट रखने के लिए साथ रखी पानी की बॉटल काम आएगी।

चित्र स्रोत: Shutterstock


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