पीरियड में होने वाला पेट दर्द दूर करे ये जूस

दवा नहीं, जूस से दूर करें पीरियड्स का दर्द।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:36 AM IST

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अनुवादक – Shabnam Khan

पीरियड से पहले और उसके दौरान महिलाओं को अक्सर बहुत तेज़ दर्द होता है, जिससे उनके रोज़मर्रा के कामकाज में परेशानी पैदा हो जाती है। इस दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोन का असंतुलन हो जाता है जिसकी वजह से घबराहट, हाई बीपी, मूड स्विंग, थकान, गुस्सा, चिड़चिड़ापन, डिप्रेशन, ध्यान न लगना, पेट में दर्द, मरोड़, सूजन, मुंहासे जैसी समस्याएं होने लगती हैं। ये माना जाता है कि नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करने से इन समस्याओं और दर्द में कमी लाई जा सकती है। कई महिलाएं ऐसे में कुछ घरेलू उपाय अपनाती हैं, ऐसा ही एक प्रभावी घरेलू उपाय है वीट ग्रास जूस। वेट ग्रास गेहूं की घास को कहते हैं।

आपने पहले सुना होगा कि वीट ग्रास जूस से वज़न कम करने में मदद मिलती है, और इसके कई और फायदे हैं। लेकिन आपने शायद ये न सुना हो कि पीरियड के दौरान होने वाले क्रैंप्स और दर्द में भी ये राहत दिलाता है। पैनाकी स्किन एंड हेयर क्लिनिक एंड स्लिमिंग सेंटर की डॉक्टर नम्रता भारंबे कहती हैं कि वीट ग्रास जूस में मैग्नीशियम, पोटैशियम और विटामिन ए, बी, सी और ई होते हैं, जो पीडियड्स की समस्याओं में राहत दिलाते हैं।

इरानी जर्नल ऑफ फार्मासूटिकल्स रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन कहता है कि वीट जर्म (wheat germ) भी पीएमएस के लक्षणों में फायदा पहुंचाता है। अध्ययन कहता है कि वीट जर्म में कैल्शियम और मैग्नीशियम के साथ-साथ विटामिन बी6 भी होता है जो पीरियड्स में होने वाले दर्द को कम करता है। इससे ब्लीडिंग पर कोई फर्क नहीं पड़ता न ही इसके साइड इफेक्ट्स होते हैं।

इस्तेमाल का तरीका

वीट ग्रास ताज़ी और पाउडर के रूप में आसानी से मिल जाती है। आप इसे घर में उगाएंगे तो और अच्छा रहेगा। इसके लिए गेहूं के कुछ दानों को गमले में डाल दें। इसे लगातार पानी दें औऱ बड़ा होने दें। डॉक्टर नम्रता कहती हैं कि 7 दिन की वेटग्रास को इस्तेमाल करें। इसे काटें, धोएं और मिक्सी में डालकर पीस लें। फिर पानी मिलाकर इसका जूस बनाएं।

चित्र स्रोत – Shutterstock

संदर्भ:

1. Ataollahi M, Akbari SAA, Mojab F, Alavi Majd H. The Effect of Wheat Germ Extract on Premenstrual Syndrome Symptoms. Iranian Journal of Pharmaceutical Research : IJPR. 2015;14(1):159-166.


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