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ब्रेस्ट कैंसर इलाज के बाद भी दोबारा शुरु हो सकता है। कारण चाहे जो भी हो लेकिन ब्रेस्ट कैंसर के दोबारा उभरने की संभावना बहुत अधिक होती है। लेकिन नियमित जांच और डॉक्टरी सहायता के इसकी रोकथाम की जा सकती है। वैसे दोबारा होनेवाले कैंसर की संभावना कैंसर के अलग-अलग स्टेज पर निर्भर करती है। लेकिन सही समय पर इलाज से इसका सामना किया जा सकता है।
जैसा कि ब्रेस्ट कैंसर किसी विशेष स्थान या प्रणालीगत तरीके से शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैल सकता है। लेकिन दोबारा उभर रहे ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण दोनों प्रकार के हो सकते हैं। यह कहना है डॉ.पवन गुप्ता का जो जेपी हॉस्पिटल्स के एडिशनल डायरेक्टर, कैंसर सर्जन और आईकैनविन फाउंडेशन के नेशनल प्रेसिडेंट हैं।
दोबारा होनेवाले ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण
एक ही स्थान पर फैलनेवाला- अगर ब्रेस्ट कैंसर स्थिर या किसी एक स्थान पर हुआ हो तो यह दोबारा उसी स्थान पर हो सकता है। यहां तक कि प्रभावित ब्रेस्ट को पूरी तरह या हिस्सों में निकालने के बाद भी यह फिर लौट सकता है। इसके कुछ लक्षणों के तौर पर कैंसर वाली जगह या ब्रेस्ट में गांठ और ब्रेस्ट के आसपास की त्वचा मोटी होने लगती है। कुछ मामलों में डिस्चार्ज या घाव जैसी गंभीर समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसी स्थितियों में ब्रेस्ट को पूरी तरह निकालने के बाद भी त्वचा पर गांठें और गर्दन में गांठ (ट्यूमर के लसिका तक फैलने के कारण) देखी जा सकती है।
शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलनेवाला कैंसर- प्रणालीगत कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में फैलनेवाला कैंसर होता है। इसीलिए इस कैंसर में लक्षण भी विभिन्न प्रकार के दिख सकते हैं। कैंसरस सेल्स आमतौर पर फेफड़े, हड्डियों, दिमाग और लीवर पर हमला करते हैं। जिनका पता नियमित और सही जांच के ज़रिए ही चल पाता है। विभिन्न अंगों में कैंसर के लक्षण इस प्रकार दिखायी पड़ते हैं।
फेफड़े- अगर कैंसर के सेल्स फेफड़ों को प्रभावित कर रहे हैं तो सांस उखड़ने, छाती में दर्द, खांसी( बलगम या बलगम के बिना) और सांस लेते समय दर्द जैसी तकलीफें आमतौर पर दिखायी पड़ती हैं।
लीवर- अगर लीवर में कैंसर के सेल्स पहुंच चुके हैं तो वज़न और भूख कम होने जैसे लक्षण दिखायी पड़ेगें।
हड्डियां- कैंसर के हड्डियों तक पहुंचने पर तेज़ दर्द होने लगता है जो जोड़ों में दर्द से काफी अलग होता है।
दिमाग- दिमाग तक कैंसर पहुंचने पर उल्टी, सरदर्द, चक्कर, चिड़चिड़ापन, दौरे और मरोड़ जैसी समस्याएं लक्षण के तौर पर महसूस होती हैं।
ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने का एकमात्र तरीका है मोलेक्यूलर की जांच और उसके बाद लक्षणों का मूल्यांकन और आंकलन। कैंसर जिस स्थान पर दोबारा दिखायी पड़ा हो वहां सर्जरी या हार्मोनल थेरेपी, किमोथेरेपी या रेडिएशन थेरेपी की सलाह दी जाती है।
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
चित्र स्रोत- Shutterstock