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Written By: Editorial Team | Published : January 11, 2017 11:28 AM IST
ओवेरियन सिस्ट की समस्या सभी महिलाओं को उनके जीवनकाल में कभी न कभी जरूर होती है। दरअसल ओवरी के भीतर द्रव्य से भरी थैलीनुमा संरचनाएं होती हैं। हर महिने पीरियड के दौरान इस थैली के आकार की एक संरचना उभरती है, जो फॉलिकल के नाम से जानी जाती है। इन फॉलिकल्स से एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्ट्रॉन नाम के हॉर्मोन्स निकलते हैं, जो ओवरी से मैच्योर एग की निकासी में सहायक होते हैं। कुछ मामलों में पीरियड की निश्चित अवधि खत्म हो जाने के बाद भी फॉलिकल का आकार बढ़ता जाता है, जिसे ओवेरियन सिस्ट कहा जाता है। सिस्ट भी कई तरह के होते हैं।
फंक्शनल सिस्ट- यह पीरियड्स की समस्यायों के कारण विकसित होता है। यह तब होता है जब फॉलिकल्स एग्स का उत्पादन नहीं करता है या फॉलिकल्स एग्स जारी करने के बाद तरल पदार्थ का निर्वहन नहीं करता है।
पैथोलॉजिकल सिस्ट- यह एग्स बनाने वाली सेल्स के असामान्य वृद्धि के कारण होता है। सेल्स के बढ़ने से ओवरी को सही तरह ब्लड की सप्लाई नहीं हो पाती है या ओवरी फट सकती है।
पैथोलॉजिकल सिस्ट- यह आमतौर पर प्रभावी नहीं है लेकिन कई बार यह घातक हो सकता है। इसके तीन प्रकार हैं-
(1) डर्मोइड सिस्ट- इस तरह के सिस्ट में आपके हेयर, स्किन और टीथ टिश्यू हो सकते हैं और कैंसर का कम खतरा होता है।
(2) सिस्टडेनोमस- इस तरह के सिस्ट पानी और मकस से भरे होते हैं।
(3) एंडोमेट्रियोमस- कई बार गर्भाशय की भीतरी सेल्स जिन्हें एंडोमेट्रियम कहा जाता है, गर्भाशय के बाहर से बढ़ना शुरू कर देती हैं। कुछ टिश्यू ओवरी से जुड़े रहते हैं या सिस्ट के रूप में। इस तरह के सिस्ट खून से भर जाते हैं।
पॉलीसिस्टिक सिस्ट- इसमें फॉलिकल्स अंडाशय पर बनने वाले सिस्ट को तोड़ने में असफल होते हैं।
ओवेरियन सिस्ट रप्चर के लक्षण
पेट में तेज दर्द- पेट के निचले हिस्से में दर्द के साथ-साथ सूजन का होना, ओवेरियन सिस्ट का पहला गंभीर लक्षण है। यदि आप अक्सर ऐसा महसूस करती हैं, तो स्त्री रोग विशेषज्ञ से जरूर संपर्क करें। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसा अंडाशय की ब्लड वेसल्स के भीतर विभिन्न संरचनाओं में अंतर की वजह से हो सकता है जिससे राइट ओवरी में हाई प्रेशर पड़ता है जिसकी वजह से राइट साइड में सिस्ट के फटने का खतरा होता है।
ब्लीडिंग- रप्चर सिस्ट के पीरियड्स के दौरान होने के अधिक संभावना होती है। इसलिए इस दौरान ब्लीडिंग के लक्षण को इससे जोड़कर देखा जाता है। रप्चर ओवेरियन सिस्ट से लगातार ब्लीडिंग होती है। इसके अलावा ब्लीडिंग सिस्ट और फंक्शनल सिस्ट सबसे आम हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि कॉर्पस लुटेअल सिस्ट अधिक ब्लीडिंग का कारण बनता है।
पेट में दबाव और फैलावट- सिस्ट पेट में ज्यादा जगह घेरता है जिससे आसपास के अंगों पर दबाव बनता है। हालांकि दबाव उस समय कम हो जाता है जब सिस्ट फट जाता है। लेकिन तरल पदार्थ के निकलने से पेट में फैलाव होता रहता है जिससे आपका पेट अधिक फूला हुआ लगता है।
चक्कर आना- चक्कर आना, मतली, उल्टी, और हल्का बुखार इसके कुछ अन्य आम लक्षण हैं।
ओवेरियन सिस्ट रप्चर के कारण
हार्मोनल में परिवर्तन- पीरियड्स और हार्मोनल में परिवर्तन सिस्ट रप्चर के आम कारण हैं। फंक्शनल सिस्ट रप्चर हानिरहित है और इसमें मेडिकल की जरूरत नहीं पड़ती है।
गर्भावस्था- गर्भावस्था के दौरान सिस्ट रप्चर का खतरा बढ़ जाता है। इसका खतरा गर्भावस्था के बाद अधिक होता है। यह काफी दर्दनाक होता है और इससे आपको काफी नुकसान हो सकता है।
एंटी- कोऐग्युलेशन थेरेपी- एंटीकोऐग्युलेशन लेने वाली और क्लोटिंग फैक्टर की कमी से पीड़ित महिलाओं को कॉर्पस ल्युटियम रप्चर का अधिक खतरा रहता है।
सेक्सुअल इंटरकोर्स- कई बार इंटरकोर्स के बाद बड़ा सिस्ट लीक होने लगता है। यह सिस्ट रप्चर के सबसे आम कारणों में से एक है।
कब्ज- कई बार मल त्याग के लिए दबाव बनाने से सिस्ट पर भी दबाव बनता है जिससे वो फट सकता है।
अचनक झटका लगना- कई बार खेलते हुए या झुकते हुए भी झटका लगने से सिस्ट रप्चर का खतरा रहता है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock
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