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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:42 AM IST
अगर आपको कई ब्लॉक हैं, तो बाईपास सर्जरी कराना ही आपके पास एकमात्र विकल्प है। बाईपास सर्जरी में दिल को रक्त पहुंचाने के लिए ब्लॉक्ड धमिनियों को काटे या साफ किए बिना एक नया रास्ता बनाया जाता है। यह सब तब किया जाता है, जब हार्ट पम्पिंग करता रहता है और मरीज बेहोश होता है। क्या आपको पता है बाईपास सर्जरी की जरूरत कब होती है? मुंबई स्थित एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी एंड रिहैबिलीटैशन विभाग के प्रमुख डॉक्टर निलेश गौतम आपको बता रहे हैं कि बाईपास सर्जरी के दौरान और बाद में क्या होता है।
1) तकनीकी तौर पर इसे सीएबीजी (कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्ट) के रूप में जाना जाता है। इस सर्जरी को करने में लगभग आठ घंटे का समय लगता है। सर्जरी के दौरान सीने की हड्डी स्टर्नम को काटा जाता है और सर्जन दिल पर काम करता है। यह एक नया तरीका है।
2) इससे पहले पैर की नसों का बाईपास सर्जरी के लिए ग्राफ्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। कई सालों बाद समग्र उपचार की प्रक्रिया में सुधार करने के लिए डॉक्टरों नसों के बजाय धमनियों का उपयोग करना शुरू कर दिया। इसलिए वर्तमान में इंटरनल मैमरी आर्टरीज़ (ब्रेस्ट्बोन के प्रत्येक पक्ष पर मौजूद दो धमनियां) और हाथ की धमनी रेडियल आर्टरी को बाईपास सर्जरी के लिए उपयोग किया जाता है। इससे सुनिश्चित होता है कि यहां 20 से 25 सालों से कोई ब्लॉकेज नहीं है। इस प्रक्रिया को टोटल आर्टेरियल रेवेस्कुलेरीजेशन (Total Arterial Revascularization) के नाम से जाना जाता है।
3) पूरी सर्जरी को करने में छह से आठ घंटे का समय लगता है और मरीज को आईसीयू या वेंटीलेटर पर रखा जाता है। मरीज जब खुद सांस लेना शुरू कर देता है, तो वेंटीलेटर हटा दिया जाता है।
4) खून बहने की वजह से छाती के अंदर कुछ ट्यूब रखी जाती हैं। इन्हें एक या दो दिन तक रखी जाती है और खून बंद होने पर इन्हें हटा दी या जाता है। सर्जरी के दौरान खून बहने की वजह से मरीज को ब्लड ट्रैन्स्फ्यूश़न (blood transfusion) की जरूरत होती है।
5) मरीज को लगभग चार दिन आईसीयू और उसके बाद चार दिन वार्ड में रखा जाता है। इस दौरान रोगी को इंसेंटिव साइकोथेरपी, ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ और मोबिलाइजेशन से गुजरना पड़ता है।
6) सर्जरी के 14वें दिन मरीज को टाँके खुलवाने के लिए हॉस्पिटल जाना होता है। ये टाँके छाती की ऐन्टिरीअर वाल पर लगे होते हैं। सर्जरी के दौरान छाती की हड्डी को काटा जाता है और सर्जरी के बाद इसे थामने के लिए स्टील वायर डाली जाती हैं।
7) 14वें दिन के बाद व्यक्ति ठीक हो जाता है और नॉर्मल लाइफ जी सकता है। वैसे पूरी तरह से सही होने के लिए छह हफ्ते लग सकते हैं। हड्डियों को सही होने में छह महीने लग सकते हैं।
8) सर्जरी के बाद मरीज को पहले चार से छह महीने तक किसी भी भारी चीज को नहीं उठाने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा पहले चार हफ्ते तक आगे ना झुकने की भी सलाह दी जाती है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock