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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:43 AM IST
जिन लोगो को अर्थराइटिस यानि गठिये के दर्द की परेशानी रहती है उनका दर्द सर्दी के मौसम में पूरे जोर पर रहता है, उसके साथ सर्दी-खांसी परेशानी से हाल बेहाल हो जाता है। सबसे अचरज की बात ये है कि कल तक ये बीमारी सिर्फ बुजुर्ग लोगों को परेशान करती थी लेकिन अब इस बीमारी के लिए कोई उम्र का बंदिश नही रह गई है। ऑस्टियोपोरोसीस या अर्थराइटिस जैसी ये बीमारियां जवान लोगों को भी होने लगे है। इस तरह के दर्द से राहत पाने के लिए हड्डी या अस्थि मज्जा (bone marrow) को मजबूत होने की ज़रूरत है लेकिन सिर्फ कैल्शियम खाने से इस ज़रूरत को पूरा नहीं किया जा सकता है। इसके लिए आपको अपने डायट में कैल्शियम से भरपूर डायट, विटामिन डी और पोटाशियम शामिल करने की ज़रूरत है।
डॉ. शिखा न्यूट्रिहेल्थ की सिनियर आयुर्वेदिक डॉक्टर, हमारी एक्सपर्ट डॉ. शिल्पा कपूर ऑस्टियोपोरोसीस का उपचार करते वक्त अस्थि मज्जा को मजबूत करने की सलाह देती है साथ ही कैल्शियम से भरपूर डायट के साथ ऐसे चीजों को खाने की सलाह देती हैं जो वात दोष को भी संतुलित करें।
एक चौथाई कप (36 gms) तिल में 200 कैलोरी और 351 एमजी कैल्शियम होता है। इसके अलावा तिल में लो ग्लिसेमिक इंडेक्स होने के कारण ये डायबिटीज़ वाले भी ले सकते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि तिल गर्मी पैदा करने वाला फूड है इसलिए ये वात-दोष को संतुलित रखने में मदद करता है जो ऑस्टियोपोरोसीस के खतरे को बढ़ाने के साथ-साथ हड्डियों से संबंधित बीमारी लो बोन डेन्सिटी और बोन लॉस संबंधित समस्याओं का कारण होता है।
गर्मी के मौसम में आप एक चम्मच सफेद तिल को थोड़े-से पानी में भिगोकर रात भर पानी में रख दें और सुबह इसके सेवन से हड्डी और अस्थि मज्जा को मजबूती मिलती है। जबकि जाड़े के मौसम में हर दिन एक छोटा चम्मच तिल धीरे-धीरे चबाकर खायें इससे आपको फायदा ज़रूर मिलेगा। अगर आप इसको कच्चा नहीं खा पा रहे हैं तो इसके साथ गुड़ मिलाकर लड्डू या चिक्की बनाकर खा सकते हैं।
अगर आपको जोड़ों में असहनीय दर्द हो रहा है तो आप तिल के तेल या महानारायण तेल से मसाज़ कर सकते हैं इससे वात दोष भी कम होता है। लेकिन यदि आपके शरीर को कफ दोष है तो तिल का तेल आपके लिए सही नहीं होगा इसके लिए आप रोज नियम करके दूध पियें इससे शरीर को कैल्शियम की ज़रूरत पूरी होने के साथ-साथ अस्थि मज्जा को भी मजबूती मिल जाती है। कफ दोष वाले शरीर के लिए आप केसर, खजूर, बादाम के साथ ले सकते हैं या इलायची, दालचीनी, अदरक या हल्दी का जड़ भी मिला सकते हैं। जिन लोगों को ऑस्टियोपोरोसीस होता है वे अपने डायट में तिल के साथ आप हरी सब्जियों में पालक, शलगम के साथ आप होल ग्रेन, फोर्टीफाइड ओट मील, ब्रोक्ली, बंदगोभी, स्प्राउट, बीन्स, उड़द और काबुली चना ले सकते हैं।
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अनुवादक: Mousumi Dutta
चित्र स्रोत: Shutterstock.