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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:40 AM IST
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अनुवादक: Anoop Singh
शरीर के मेटाबॉलिज्म और सही विकास के लिए थायरॉइड हार्मोन का बनना बहुत ज़रूरी है लेकिन इसकी ज़रूरत से ज्यादा मात्रा शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचाती है। हाइपरथाइरोडिज़्म के कारण शरीर का वजन अचानक से कम होने लगता है और इससे आपकी इम्युनिटी पॉवर कमजोर होने लगती है। हालांकि कुछ दवाइयों के सेवन से आप इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं लेकिन इसके अलावा आप अपनी डाइट में कुछ बदलाव करके भी आसानी से इसे कंट्रोल कर सकते हैं। जानी मानी न्यूट्रीशिनिस्ट प्रिया काठपाल यहाँ हाइपरथाइरोडिज़्म को कंट्रोल करने के लिए डाइट प्लान बता रही हैं।
नाश्ता : आप नाश्ते में गाय के दूध में सेरेल डालकर खा सकते हैं। हाइपरथाइरोडिज़्म कारण खून में कैल्शियम की कमी हो जाती है और ऐसे में फिर शरीर, हड्डियों से कैल्शियम की अपनी ज़रूरतें पूरी करने लगता है।इसलिए ज़रूरी है कि नाश्ते में आप उचित मात्रा में डेरी प्रोडक्ट का सेवन करें जिससे शरीर में कैल्शियम की कोई कमी न हो।
मिड मॉर्निंग: थायरॉइड में असंतुलन के कारण इम्यून सिस्टम भी ठीक से काम करना बंद कर देता है इसलिए आप नाश्ते और लंच के बीच में एक प्लेट बेरी खा लें। इसमें पाये जाने वाले एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर की इम्युनिटी को बेहतर कर देते हैं।
लंच : हाइपरथाइरोडिज़्म के कारण अचानक से वजन कम होने लगता है जो सबसे मुख्य समस्या है और इससे आप कमजोर होने लगते हैं। इससे बचने के लिए ज़रूरी है कि आप अपनी डाइट में प्रोटीन युक्त चीजें जैसे कि मछली, सोया, दाल इत्यादि को ज़रूर शामिल करें। इसलिए लंच में दो चपाती के साथ एक कटोरी दाल लें और इसके साथ ग्रिल्ड की हुई मछली खाएं। तुलसी, रोजमेरी या ऑरेगैनो जैसे हर्ब्स में भी एंटी-इंफ्लेमेटरी क्षमताएं होने के कारण ये थाइरॉइड को सही तरीके से काम करने में मदद करते हैं।
शाम का स्नैक: स्नैक के रूप में आप हमेशा ऐसी चीजें खाएं जिससे अच्छी मात्रा में जिंक मिले। बादाम और अखरोट जिंक के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। इसके अलावा दही में अलसी के बीज मिलाकर या स्मूदी में मिलाकर इसका सेवन करें। इससे प्रेगनेंसी में होने वाले हाइपरथाइरोडिज़्म से बचाव होता है।
डिनर : डिनर में दो चपाती के साथ एक कटोरी गोभी या ब्रोकली खाएं। इस तरह की पत्तेदार सब्जियां हाइपरथायरॉइडिज्म से बचाव करती हैं।
चित्र स्रोत: Shutterstock