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अनुवादक: Anoop Singh
गैस्ट्रोएन्टराइटिस (Gastroenteritis) या सामान्य शब्दों में कहे तो पेट में जलन होने के कई कारण हो सकते हैं और यह एक संक्रामक बीमारी है। पेट और आँतों में यह जलन बैक्टीरिया, वायरस या प्रोटोजोआ(Protozoa) के कारण होती है। अधिकांश मामलों में यह संक्रमित खाना को खाने या गंदे पानी को पीने से या फिर किसी ऐसे आदमी के संपर्क में आने के कारण होता है जो इससे पीड़ित हो। लेकिन कुछ दवाइयां भी ऐसी होती हैं जिनके इस्तेमाल से आपको यह समस्या हो सकती है। पेट में जलन होने के लक्षणों को आसानी से पहचानना बहुत मुश्किल होता है, क्योंकि पेट से जुड़ी अन्य बीमारियों के भी लक्षण इससे काफी मिलते जुलते हैं। और ये लक्षण इस बात पर भी निर्भर करते हैं की इनके होने के पीछे क्या कारण हैं जैसे कि ये किसी बैक्टीरिया या वायरस से हुए हैं या फिर किसी अन्य चीज की वजह से। यहाँ सभी तरह के गैस्ट्रोएन्टराइटिस से जुड़े लक्षणों के बारे में बताया जा रहा है।
डायरिया : डायरिया, गैस्ट्रोएन्टराइटिस के मुख्य लक्षणों में एक है। जब बैक्टीरिया या वायरस आँतों पर आक्रमण करते हैं तो उसमें फ्लुइड(Fluid) का बना रहना मुश्किल हो जाता है। फलस्वरूप शरीर से बहुत अधिक मात्रा में पानी मल के रूप में बाहर निकल जाता है। माइल्ड गैस्ट्रोएन्टराइटिस से पीड़ित व्यक्ति को एक दिन में 2 से 3 बार दस्त हो सकता है, जिसके कारण गैस्ट्रोएन्टराइटिस से पीड़ित व्यक्ति बहुत जल्द ही डिहाइड्रेटेड हो जाता है।
उल्टियां: अगर डायरिया से पीड़ित मरीज को उल्टियां भी होने लगे तो डिहाइड्रेशन और भी खतरनाक हो जाता है। शुरुवात में मरीज को दिन में सिर्फ 2 या 3 बार ही उल्टियां होती हैं लेकिन इससे ज्यादा मात्रा में उल्टियां हो रहीं है तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिये।
तेजी से वजन कम होना : गैस्ट्रोएन्टराइटिस के दौरान होने वाले डिहाइड्रेशन से कई लोगों में यह देखा गया है कि उनका वजन अचानक तेजी से घटने लगता है। अधिक मात्रा में शरीर से पानी निकल जाने से और साथ ही भूख कम लगने के कारण ऐसा होने लगता है। सही समय पर इसकी पहचान कर लेने और उचित इलाज से इस अवस्था से बचा जा सकता है।
पेट में मरोड़ (Stomach Cramps): गैस्ट्रोएन्टराइटिस में पेट में होने वाली मरोड़ से बहुत तेज दर्द होता है। इस दर्द में मरीज ठीक से समझ नहीं पाता कि दर्द कहाँ हो रहा है क्योंकि उसे पूरे पेट में दर्द महसूस होता है। कभी-कभी पेट के एक हिस्से से शुरू होकर यह दर्द धीरे धीरे दूसरे हिस्से में पहुँच जाता है।
बुखार: इस बीमारी में बैक्टीरिया और वायरस से इम्यून सिस्टम के लगातार संघर्ष के कारण शरीर का तापमान बढ़ जाता है। इस दौरान शरीर का तापमान 100 से 102 डिग्री फारेनहाईट तक पहुँच जाता है।
सिरदर्द और मिचली आना: बहुत तेज बुखार और डायरिया के कारण, आपको सिर में तेज दर्द और मिचली आने जैसी समस्याएं भी होने लगती हैं। अधिकांश मामलों में खासकर वायरल गैस्ट्रोएन्टराइटिस में ये लक्षण अपने आप ही सही होने लगते हैं। लेकिन अगर ऐसा न हो और बहुत तेज दर्द हो तो आपको तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिये।
चित्र स्रोत: Shutterstock
सन्दर्भ:
Diseases and Disorders, Volume 2 by Marshall Cavendish Corporation