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अनुवादक – Usman Khan
आजकल बहुत से लोग एसिडिटी की समस्या से परेशान रहते हैं। इससे राहत पाने के लिए लोग धड़ल्ले से एंटीएसिड दवाएं भी खाते हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि ये समस्या और एंटीएसिड दवाएं कई गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। अगर आपको कभी-कभी ये समस्या होती है, तो ठीक है लेकिन अगर हफ्ते या दैनिक आधार पर होती है, तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए। मुंबई स्थित एसवीआर हॉस्पिटल में गैस्ट्रोएन्टरोलोजिस्ट डॉक्टर जय कोटेचा के अनुसार, एसिडिटी में दवा खाने से आपको तुरंत राहत तो मिल सकती है लेकिन इससे मूल समस्या का इलाज नहीं हो पाता है। इसलिए आपको किसी अच्छे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। हो सकता है ये मात्र एसिडिटी की समस्या ना होकर किसी गंभीर समस्या का संकेत हो। एसिडिटी के कारण आपको ये समस्याएं भी हो सकती हैं। पढ़ें- एसिडिटी और सीने में जलन से परेशान? पियें नारियल पानी
1. हृदय की समस्याएं- जीईआरडी या कोरोनरी हार्ट डिजीज (सीएचडी) की समस्या को एक साथ जोड़कर देखा जाता है। सीएचडी से पीड़ित लोगों को दिल के किसी भी रोग से पीड़ित नहीं होने वाले लोगों की तुलना में कम से कम दो बार जीईआरडी से ग्रस्त होने की संभावना होती है। इसलिए ऐसे लोगों को एंटीएसिडिटी दवा खाने से उन्हें एसिडिटी या रिफ्लक्स की समस्या हो सकती है। यानि एसिडिटी के कारण आपको दिल की समस्याएं भी हो सकती हैं।
2. माइनर हार्ट अटैक- इन दिनों कई बार एसिडिटी के साथ माइनर हार्ट अटैक पड़ना आम समस्या है। लेकिन आपको इसकी अनदेखी नहीं करनी चाहिए। आपको एसिडिटी और हार्टअटैक के बीच के अंतर को समझना चाहिए। अगर पेट का दर्द बाएं हाथ या जबड़े की तरफ बढ़ता है, तो इसका एंटीएसिड से इलाज संभव है लेकिन अगर दर्द सुबह के समय या दिन में बिना कुछ मसालेदार खाने के बावजूद कभी भी होता है, तो ये हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है।
3. गॉल ब्लैडर स्टोन- हालांकि एसिड रिफ्लक्स या गॉल ब्लैडर स्टोन के कारण होने वाला दर्द बिल्कुल अलग है। लेकिन कभी-कभी इन दोनों को समझना मुश्किल होता है। गॉल स्टोन का दर्द पेट के ऊपरी दाहिने चक्र में होता है और कभी-कभी पीठ या साइड में होता है। क्योंकि एसिडिटी का दर्द भी पेट के ऊपरी हिस्से में इसी तरह होता है।
4. पेट में अल्सर- ये पेट की अंदरूनी लाइन में हेलिकोबेक्टर या एच पाइलोरी जैसे बैक्टीरिया की वजह से होता है जिसका इलाज संभव है। हालांकि पेट के अल्सर का एक लक्षण एसिडिटी और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द होना भी है। इसमें खाना खाने के बाद सूजन, ईर्ष्या और बेचैनी होने लगती है। इसका इलाज करना जरूरी है अन्यथा बैक्टीरिया गैस्ट्रिक कैंसर का कारण बन सकता है।
5. खराब पाचन ग्रंथि- लोग ऐसा मानते हैं कि केवल शराब से पाचन ग्रंथि ख़राब होती है। आपको जानकार हैरानी होगी कि एसिडिटी का सही इलाज नहीं कराने पर भी पाचन ग्रंथि अस्वस्थ हो सकती है। अगर आप केवल एंटीएसिड पर निर्भर हैं तो इसका मतलब है कि आप पाचन ग्रंथि की अनदेखी कर रहे हैं।
6. घेघा (oesophagu) में समस्या- एसिडिटी का इलाज नहीं कराने से घेघा नष्ट हो सकते हैं। अध्ययनों के अनुसार, एसिड दवाओं के लंबे समय तक निरंतर इस्तेमाल से घेघा कैंसर होने का खतरा होता है। इसलिए एसिडिटी दवा लेने से बेहतर है कि आप डॉक्टर की सलाह लें।
एसिडिटी का इलाज कब संभव है?
चित्र स्रोत - Shutterstock
सन्दर्भ- 1: Pulkowski G, Majer M, Budzyński J, Swiatkowski M. [Gastroesophageal reflux disease and coronary heart disease--coexistence or interrelationship?]. Pol Merkur Lekarski. 2006 Jan;20(115):104-8. Review. Polish. PubMed PMID: 16617748.
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[3] Rodriguez, L. G., Lagergren, J., & Lindblad, M. (2006). Gastric acid suppression and risk of oesophageal and gastric adenocarcinoma: a nested case control study in the UK. Gut, 55(11), 1538-1544.