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अनुवादक: Anoop Singh
स्पर्म या शुक्राणु जीवन चक्र को बनाये रखने के लिए सबसे ज़रूरी चीज है। पुरुषों के टेस्टिकल्स में विकसित होने वाले ये स्पर्म स्खलन के दौरान वीर्य के रूप में शरीर से बाहर निकलते हैं। सीमेन या वीर्य की पूरी गुणवत्ता ही इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें उपस्थित स्पर्म की मात्रा और क्वालिटी कैसी है। स्पर्म की गतिशीलता वह क्षमता होती है जिससे वो आगे बढ़ते हुए महिला के गर्भ में अंडे तक पहुँच पाता है। पुरुषों के टेस्टिकल्स में रोजाना लगभग लाखों स्पर्म बनते हैं। औसतन एक बार के वीर्य स्खलन में करीब 1.5-5 मिलीलीटर स्पर्म निकलता है। डब्लूएचओ के अनुसार एक मिलीलीटर सीमेन में करीब 15 मिलियन स्पर्म होते हैं। स्पर्म की संख्या कम होने को ओलिगस्पेर्मिया कहा जाता है। आइये जानते हैं स्पर्म की संख्या कम होने के पीछे क्या क्या कारण हो सकते हैं.
उम्र : स्पर्म की क्वालिटी और उसकी गतिशीलता की क्षमता उम्र बढ़ने के साथ साथ घटती जाती है और इस कारण से बच्चे पैदा करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है। एक शोध के अनुसार, जो लोग बच्चे पैदा करने के लिए बहुत दिनों तक इंतज़ार करते हैं ऐसे में उनके बच्चे के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता है क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ सीमेन का वॉल्यूम और उसकी क्षमता दोनों ही कम हो जाती है। पढ़ें: पुरुषों में होने वाले मेनोपॉज को इन 7 लक्षणों से पहचानें
चोट: अंडकोष में चोट लगने के कारण स्पर्म सेल्स की क्वालिटी पर कोई फर्क नहीं पड़ता है लेकिन इससे स्पर्म उत्पन्न करने वाले ऊतकों में खून का प्रवाह बंद हो जाता है जिससे स्पर्म बनने की क्षमता प्रभावित हो जाती है।
बॉडी बिल्डिंग सप्लीमेंट: कई लड़के यंग ऐज में बॉडी बनाने के चक्कर में आवश्यकता से ज्यादा सप्लीमेंट का सेवन करने लगते हैं। जबकि ऐसा पाया गया है कि ज्यादा सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने से भी स्पर्म काउंट घट जाते हैं। जिससे उनके बच्चे पैदा करने की क्षमता कम हो जाती है।
गर्मी : शरीर के स्पर्म गर्मी के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील होते हैं। कुछ शोधो में यह बात सामने आई है कि जो लोग ज्यादा गर्मी वाले क्षेत्र में रहते हैं उनके स्पर्म की संख्या काफी कम होती है। हॉट बाथटब, हॉट शावर और ज़कूजी में ज्यादा देर समय बिताने वाले लोगों को भी ऐसी ही समस्या का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा ज्यादा टाइट अंडरवियर पहनने से भी स्पर्म काउंट घट जाते हैं।
रेडिएशन: एक रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि जो लोग ऐसी जगहों पर काम करते हैं जहाँ बहुत अधिक रेडिएशन होता रहता है। उनमें भी स्पर्म काउंट काफी कम हो जाता है यहाँ तक कि कई मामलों में तो उनकी स्पर्म की क्वालिटी भी ख़राब हो जाती है। इसलिए बहुत देर तक रेडिएशन वाली जगह के संपर्क में न रहें।
स्मोकिंग: धूम्रपान करना हर मायनों में आपके स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है। ज्यादा धूम्रपान करने से सीमेन में कैडमियम की मात्रा बढ़ जाती है साथ ही जिंक की मात्रा घट जाती है। कैडमियम स्पर्म के डीएनए को ख़त्म कर देते हैं जिससे स्पर्म काउंट घट जाता है।
अल्कोहल: अल्कोहल के ज्यादा सेवन से आपकी सेक्स क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। रिसर्चर के अनुसार, हफ्ते में पांच बार अल्कोहल का सेवन करने वाले लोगों की स्पर्म क्वालिटी ख़राब हो जाती है।
ड्रग्स: मारिजुआना और कोकीन जैसी ड्रग्स आपके स्वास्थ्य को तो नुकसान पहुंचाते ही हैं साथ ही ये आपके स्पर्म क्वालिटी और उनकी संख्या पर भी बुरा असर डालते हैं।
स्ट्रेस: बहुत हद तक तनाव में रहने के कारण आपके खून में भी स्ट्रेस हार्मोन की मात्रा बढ़ जाती है जिससे स्पर्म के बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है। हाल ही में किये एक शोध के अनुसार, सायकोलॉजिकल स्ट्रेस आपके स्पर्म और सीमेन क्वालिटी को ज्यादा प्रभावित करते हैं।
प्रदूषण: शायद आपको यह जानकार आश्चर्य हो कि आपके आस पास का प्रदूषित माहौल भी आपके स्पर्म की क्वालिटी को ख़राब कर देता है। इसलिए बहुत देर तक प्रदूषित वातावरण में ना रहें।
दवाइयां: कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं जिनके सेवन से भी स्पर्म के बनने की प्रक्रिया बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। ऐसी दवाइयों का नियमित सेवन आपके स्पर्म काउंट को कम कर देता है।
सोया युक्त चीजें: कुछ शोधों में यह बात पता चली है कि बहुत ही अधिक मात्रा में सोया या सोया से बनी हुई चीजों को खाने से भी शरीर में टेस्टोस्टेरोन लेवल कम होने लगता है साथ ही स्पर्म क्वालिटी भी ख़राब होने लगती है।
अविकसित अंडकोष : जन्म के 3 से 6 महीनों के बाद पुरुषों में उनका अंडकोष स्क्रोटम से अपने आप ही बाहर आ जाता है लेकिन कुछ मामलों में किन्ही कारणवश ये अंडकोष पूरी तरह से बाहर नहीं निकल पाते हैं जिससे इनमें बनने वाले स्पर्म की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है साथ ही स्पर्म काउंट भी कम हो जाता है।
मोटापा: मोटापे की वजह से कई पुरुष और महिलायें बांझपन के शिकार हो जाते हैं। पुरुषों में मोटापे के कारण भी उनके स्पर्म काउंट कम होने लगता है।
डायबिटीज: हाल ही में कुछ अध्ययनों में यह बात सामने आयी कि डायबिटीज के कारण स्पर्म के डीएनए ख़राब होने की संभावना दोगुनी हो जाती है। डायबिटीज का असर स्पर्म कि क्वालिटी को उनकी संख्या दोनों पर पड़ता है।
सेक्स से जुड़ी बीमारियां: सेक्स से जुड़ी बीमारियां होने पर भी स्पर्म प्रोडक्शन प्रभावित हो जाता है। जिससे आपके स्पर्म की गुणवत्ता कम हो जाती है।
बीमारियां: कुछ बीमारियांभी ऐसी होती हैं जिनसे पीड़ित होने पर मरीज के स्पर्म की क्वालिटी ख़राब होने लगती है। जैसे कि क्लिनेफेल्टर सिंड्रोम से पीड़ित मरीजों का टेस्टोस्टेरोन लेवल काफी कम हो जाता है। ऐसे मरीजों में स्पर्म का बनना बंद हो जाता है।
स्पर्म की क्वालिटी कैसे बेहतर करें:
अच्छे खानपान से और अपनी डाइट में ऐसी चीजों को शामिल करके जिनमें जिंक और विटामिन बी6 की मात्रा ज्यादा होती है, आप अपने स्पर्म की क्वालिटी बेहतर कर सकते हैं। अंडे, मछली और स्ट्रॉबेरी में जिंक के अच्छे स्रोत होते हैं, इनका नियमित सेवन करें। इसके अलावा अखरोट को रोजाना खाने से भी स्पर्म की क्वालिटी बेहतर होती है। रोजाना एक्सरसाइज करते रहें और खुद को तनावमुक्त रखें।
चित्र स्रोत: Shutterstock