COPD के लिए मददगार फ़िज़ियोथेरेपी ट्रीटमेंट

डॉ. सोनू सिंह बता रहे हैं कुछ फ़िज़ियोथेरेपी एक्सरसाइज़ेस के बारे में जो सीओपीडी से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:43 AM IST

क्रोनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मनरी डिज़िज (Chronic obstructive pulmonary disease) या सीओपीडी की वजह से ब्रोन्कीअल ट्यूब में सूजन हो जाती है और इसलिए ट्रीटमेंट के दौरान कोशिश की जाती है सीओपीडी के लक्षण मानी जानेवाली समस्याओं पर काबू पाया जा सके और यह सूजन कम हो सके। एक समस्या के तौर पर इसका इलाज नहीं किया जा किया सकता लेकिन इसे नियंत्रण में रखने के लिए फ़िज़ियोथेरेपी की सहायता ली जा सकती है। फ़िज़ियोथेरेपिस्ट एक रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ चेस्ट फ़िज़िशियन और रिहैब स्पेशलिस्ट के साथ मिलकर फेफड़ों तक आवश्यक मात्रा में हवा पहुंचाने और उनके कार्य करने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने की कोशिश करते है।

फ़िज़िकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन स्पेशलिस्ट (एक्टिवऑर्थो) डॉ. सोनू सिंह बता रहे हैं कुछ फ़िज़ियोथेरेपी एक्सरसाइज़ेस के बारे में जो सीओपीडी से पीड़ित लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती हैं।

पोस्ट्युरल ड्रेनेज- यह एक चेस्ट फ़िज़ियोथेरेपी तकनीक है जो सांस लेने में तकलीफ से जुड़ी समस्याओं (जो ब्रोन्कीअल या फेफड़ों में अत्यधिक कफ के कारण होती हैं) से राहत दिलाने का काम करती है। पोस्ट्युरल ड्रेनेज (Postural drainage) का प्रयोग क्रोनिक ब्रोन्काइटिस से पीड़ित लोगों की मदद के लिए की जाती है जबकि तीव्र वातस्फीति या अक्यूट एम्फज़िमा (acute emphysema) से परेशान लोगों के लिए यह इंफेक्शन को साफ करने का एक तरीका हो सकता है। पोस्ट्युरल ड्रेनेज में आपको एक ऐसी स्थिति तक पहुंचना होगा जहां फेफड़ों से तरल पदार्थों को निकालने का काम करेगी और आपको आराम मिलेगा। यह सीओपीडी से पीड़ित सभी मरीज़ों के लिए ज़रूरी है।

क्लैपिंग और शेकिंग- इस तकनीक में एक्सपर्ट फेफड़े और वायुमार्ग से बलगम निकालने के लिए हाथों की अंजुली बनाकर या पर्कसर (percussor) जैसे किसी साधन का उपयोग कर सकता है। चेस्ट की क्लैपिंग करने से सीने के अंदर के हिस्से को झंझोड़ा जाता है जिससे बलगम या कफ का जमाव ढीला हो जाता है और वह आसानी से मरीज़ के शरीर से बाहर निकल जाता है। अगर मरीज़ खांसने में असमर्थ है या उसके शरीर से कफ निकलने में परेशानी होती है तो वेंटिलेशन और नमी बढ़ाने के लिए इंटरमिटेंट पॉज़िटिव प्रेशर ब्रीदिंग (Intermittent Positive Pressure Breathing) तकनीक की सलाह दी जाती है।

ब्रीदिंग एक्सरसाइज़ेस- इस तकनीक का मकसद चेस्ट के ऊपरी भाग में कम गतिविधियों और कंधों को आराम देते हुए डायफ्रागमैटिक ब्रीदिंग (diaphragmatic breathing) कराने की होती है। जैसे-जैसे आप सांस लेते हैं वैसे-वैसे आपके फेफड़े फूलते हैं और इस तरह फेफड़ों तक पर्याप्त हवा पहुंच पाती है। इसी तरह पर्स्ड लिप ब्रीदिंग (pursed lip breathing) एक्सरसाइज़ भी की जा सकती है। यह तकनीक काफी देर तक चलती है और यह ऐसे मरीज़ों के लिए फायदेमंद है जो फेफड़ों में आसामान्य एयरस्पेस या एम्फिसिमेटस बुले (emphysematous bullae) से पीड़ित हैं।

पॉश्चर करेक्शन- इस तकनीक में फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए डायफ्रागमैटिक गतिविधियों को सरल बनाने और उसे नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है। मरीज़ों को शरीर को सही मुद्रा या पॉस्चर में रखने के लिए कहा जाता है ताकि छाती के ऊपरी भाग और छाती के निचले हिस्से की गतिविधियों के बीच सही तालमेल बिठाया जा सके। मरीज़ को सर झुकाने या कंधों को सिकोड़ने से मना किया जाता है।

थोरासिस मोबिलिटी एक्सरसाइज़- इस तकनीक में ऐसी एक्सरसाइज़ेस का समावेश होता है जो आपकी रीढ़ की हड्डी की सेहत अच्छी करती हैं और कूबड़ या काइफोसिस (kyphosis) से बचाने का काम करती हैं। यह समझना आवश्यक है कि सही पॉस्चर की मदद से शोल्डर ग्रिडल को भींचने (shoulder girdle retraction) और भुजाओं को घुमाने में मदद मिलेगी। साथ ही सीओपीडी में ट्रंक टर्निंग भी शामिल होती है जिसमें भुजाओं को आराम की मुद्रा में रखते हुए गर्दन को घुमाना पड़ता है।

मरीज़ को सक्रिय रहने की सलाह दी जाती है क्योंकि इस तरह वे सीओपीडी के लक्षणों और इससे राहत पाने की तकनीकों में सकारात्मक परिणामों में मदद मिलेगी। साथ ही धूम्रपान छोड़ने और सही खान-पान जैसे जीवनशैली से जुड़े बदलाव भी सीओपीडी की समस्या से राहत दिलाने में एक अहम भूमिका निभाते हैं।

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock

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