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Written By: Mousumi Dutta | Updated : January 5, 2017 8:29 AM IST
पेट की कृमि (worm) या कीड़े से परेशान होकर शिशु या बच्चे का रोना तो हर माँ के लिए आम समस्या है। बच्चों के चॉकलेट या टॉफी खाने की आदत उनके दाँतों से लेकर पेट तक को तकलीफ में डाल देता है। वैसे देखा जाये तो ये समस्या सिर्फ बच्चों तक सीमित नहीं रहता है इससे बड़े बच्चे भी परेशान रहते हैं। पेट या आंतो में विभिन्न तरह के कीड़े होते हैं, जैसे- टेपवर्म्स, थ्रेडवर्म्स, पिनवर्म्स, राउंडवर्म्स आदि। वैसे तो कीड़ों के किस्म के आधार पर डॉक्टर कृमिनाशक दवायें देते हैं या बाजार में उपलब्ध होते हैं।
लेकिन इनके अलावा आप पहले घर पर नैचुरल तरीके से कृमि को नष्ट करने का तरीका अपनाकर देख सकते हैं। इसके साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं और बच्चे को जल्दी आराम मिल जाता है। क्योंकि पेट में ज्यादा कृमि हो जाने पर दस्त, उल्टी या बेचैनी जैसा महसूस होती है जिससे बच्चे और भी कष्ट में आ जाते हैं।
पेट में कीड़े होने के बहुत सारे कारण होते हैं, जैसे- मीठा खाना से, अशुद्ध पानी या गंदा पानी पीने से, साग-सब्ज़ी बिना साफ-सफाई के या बिना धोकर खाने के साथ सही तरह से साफ-सफाई का ध्यान न रखने से पेट में कीड़ा का प्रकोप होता है।
पेट की कीड़ा होने के प्रमुख लक्षणों में बच्चे या शिशु के पीछे गुप्त अंग के मुँह में खुजली जैसा एहसास होना, भूख न लगना, दस्त, पेट दर्द, अचानक वज़न कम होना, हमेशा उल्टी का एहसास होना आदि। चलिये आपको ऐसे दो तरह के नैचुरल तरीकों के बारे में बताते हैं जो आपके घर और किचन में आसानी से मिल जायेगा। इसके बारे में हमारी आयुर्वेद विशेषज्ञ शीव आयुर्वेदिक महाविद्यालय और रूग्णालयाच्या प्रोफेसर और वैद्द रजनी पाटणकर बता रही हैं।
• जीरा और अजवाइन दोनों का कृमिनाशक गुण इस मामले में बहुत काम करता है। रोज़ सुबह खाली पेट आधा छोटा चम्मच जीरा और अजवाइन का पाउडर समान मात्रा में ले लें। या आप इस मिश्रण को रात को सोने से पहले भी ले सकते हैं।
• तुलसी का औषधीय गुण कृमिनाशक के रूप में भी काम करती है। आपको सिर्फ 10-15 तुलसी के पत्ते सुबह खाली पेट चबाकर पानी के साथ खा लेना पड़ेगा।
इन घरेलू उपचारों को अपनाकर देखें अगर फिर भी आराम न मिलें तो डॉक्टर से सलाह लें क्योंकि ये दवाई नहीं सिर्फ घरेलू उपचार है।
चित्र स्रोत- Shutterstock