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हाल के कुछ सालों में हमारे देश में डिप्रेशन और एंग्जायटी से पीड़ित मरीजों की संख्या में अप्रत्याशित रूप से बढ़ोतरी हुई है और इसी के चलते अब लोग इस बीमारी को लेकर काफी सचेत हो चुके हैं। अक्सर लोगों को जब यह पता चल जाता है कि वे इस बीमारी के शिकार हो चुके हैं या फिर चपेट में आने ही वाले हैं तो ऐसे में सबसे बड़ी दिक्कत तब आती है जब उन्हें इस बात की जानकारी नहीं होती कि अब इसका सही इलाज कहाँ और कैसे करवाया जाए। डिप्रेशन और एंग्जायटी को दूर भगाने के लिए बाज़ार में कई तरह की एंटी-डिप्रेसेंट दवाइयां मौजूद हैं लेकिन आपको इनके साइड इफ़ेक्ट के बारे में भी पता होना चाहिये। इन दवाइयों के साइड इफ़ेक्ट से आलसीपन, चक्कर आना, कब्ज़, डायरिया और सेक्सुअल डिसफंक्शन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हालांकि अगर आप क्रोनिक डिप्रेशन के शिकार हैं तो ये दवाइयां आपके इलाज के लिए ज़रूरी हो जाती हैं और डाइट में सही बदलाव लाकर और मैग्नीशियम से भरपूर चीजों को डाइट में शामिल करके आप आसानी से इस समस्या से छुटकारा पा सकते हैं।
जर्नल न्यूरोफार्माकोलॉजी द्वारा साल 2012 में प्रकाशित एक शोध के अनुसार मैग्नीशियम की कमी के कारण एचपीए एक्सिस (HPA axis) ठीक से काम नहीं कर पाता जिससे कुछ लोग एंग्जायटी के शिकार हो जाते हैं। अगर साधारण शब्दों में इसे समझा जाए तो शरीर की पीयूष ग्रंथि, एड्रेनल ग्लैंड और हाइपोथाल्मस(hypothalamus) तीनो मिलकर एचपीए एक्सिस (HPA axis) का निर्माण करते हैं जो आपके मूड और इमोशन को नियंत्रित करता है। इसलिए इसका ठीक से काम करना बहुत ज़रूरी होता है। इसके अलावा एचपीए एक्सिस पाचन तंत्र और इम्यून सिस्टम को भी नियंत्रित करता है। शोध में इस बात की पुष्टि हुई है है कि जब आप बहुत ज्यादा स्ट्रेस में रहते हैं तो आपका शरीर मैग्नीशियम का इस्तेमाल करने लगता है जिससे शरीर में मैग्नीशियम की कमी होने लगती है। दूसरे शब्दों में कहें तो मैग्नीशियम की कमी से आप डिप्रेशन और एंग्जायटी के शिकार हो सकते हैं।
एक दूसरे शोध ऑस्ट्रलियन एंड न्यूजीलैंड जर्नल ऑफ़ साइकाइट्री द्वारा साल 2009 में प्रकाशित एक शोध के अनुसार 5708 लोगों पर किये एक सर्वे में जिसमें लोगों की उम्र 46-49 और 70-74 के बीच में थी, उसमें पाया गया कि उनके मैग्नीशियम लेने की मात्रा और डिप्रेशन में इनवर्स रिलेशनशिप था। इसका मतलब जिनमें मैग्नीशियम की मात्रा कम थी वे ज्यादा स्ट्रेस और एंग्जायटी के शिकार थे। इसलिए इन शोधों से यह पता चलता है कि अगर आप डिप्रेशन और एंग्जायटी के खतरे को कम करना चाहते हैं तो मैग्नीशियम से भरपूर चीजों का सेवन बढ़ा दें। केला, तिल के बीज, खजूर, डार्क चॉकलेट,सोयाबीन, अखरोट और हरी सब्जियों में मैग्नीशियम अधिक मात्रा में पाया जाता है। इसलिए अपनी रोजाना की डाइट में इन चीजों को ज़रूर शामिल करें।
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अनुवादक: Anoop Singh
चित्र स्रोत: Shutterstock
स्रोत: [1] Sartori SB, Whittle N, Hetzenauer A, Singewald N. Magnesium deficiency induces anxiety and HPA axis dysregulation: Modulation by therapeutic drug treatment. Neuropharmacology. 2012;62(1):304-312. doi:10.1016/j.neuropharm.2011.07.027.
[2] Aust N Z J Psychiatry. 2009 Jan;43(1):45-52. doi: 10.1080/00048670802534408. Association between magnesium intake and depression and anxiety in community-dwelling adults: the Hordaland Health Study. Jacka FN, Overland S, Stewart R, Tell GS, Bjelland I, Mykletun A.