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हमारे देश में अलग अलग समुदायों के लोग रहते हैं और सबके व्यवहार और रहन सहन का तरीका भी काफी अलग है। अलग अलग समुदायों के ये लोग अपने धर्मों से जुड़े हर एक नियमों का तो पूरी निष्ठा से पालन करते हैं लेकिन जब बात कुछ नैतिक और सामाजिक नियमों की आती है तो ये उसमें काफी पीछे रह जाते हैं। ऐसा ही एक नैतिक नियम है अपने आस पास और सार्वजनिक स्थलों की साफ़ सफाई का जिसमें हम अभी तक नाकाम हैं। आज भी अगर साफ़-सफाई के क्षेत्र में हमारी तुलना दुनिया के अन्य विकसित देशों से की जाती है तो हम उसमें काफी पीछे रह जाते हैं। पढ़ें:स्वच्छ सर्वेक्षण सर्वे 2016 में मैसूर रहा नंबर वन
आखिर इसके पीछे क्या कारण है और क्यों हम अपने देश और समाज को साफ-सुथरा नहीं रख पाते हैं? सामान्य तौर पर देखा जाए तो हममें से हर कोई सिर्फ अपने घर और आस पड़ोस की साफ़ सफाई तक ही सीमित है। आपने देखा होगा कि अधिकतर लोग अपने घर के अलावा किसी भी सार्वजनिक जगह पर गन्दगी करने से बाज़ नहीं आते हैं चाहे हो रेलवे स्टेशन हो,बस स्टेशन हो या कोई सार्वजनिक पार्क। इन्ही सब को ध्यान में रखते हुए हमारे देश के वर्त्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने 2 अक्टूबर 2014 को ‘स्वच्छ भारत अभियान’ की शुरुवात की थी। इस अभियान का मकसद यह है कि अपने देश को स्वच्छ रखने के लिए प्रत्येक नागरिक द्वारा हर मुमकिन प्रयास किये जायें। इस अभियान का लक्ष्य है कि 2 अक्टूबर 2019 को गांधी जी के 150 वें जन्मदिवस पर स्वच्छ भारत के रूप में उन्हें श्रद्धांजलि दी जाये। पढ़ें: गंगा की सफाई से पर्यावरण के स्थिति में सुधार
हालांकि अब इस अभियान को शुरू हुए करीब डेढ़ साल हो चुके हैं फिर भी इसके उतने सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिल रहे हैं। कुछ जगहों पर ज़रूर लोगों ने इसे गंभीरता से लिया है और अब वे सार्वजनिक जगहों पर गन्दगी नहीं करते हैं और वहां की गंदगी को दूर करने में मदद भी करते हैं। फिर भी अभी अधिकतर लोगों में जागरूकता और नैतिक जानकारी की कमी है। इसके लिए ज़रूरी है कि आप उन लोगों को समझाएं और सार्वजनिक जगहों पर गंदगी करने से रोकें और उन्हें इस महा अभियान में भाग लेने के लिए प्रेरित करें। आइये देखते हैं स्वच्छ भारत अभियान से जुड़ा यह दिलचस्प वीडियो :
चित्र और वीडियो स्रोत : Facebook/BestAdspage