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एचआईवी / एड्स एक जानलेवा बीमारी है। एचआईवी संक्रमण कई तरीकों से फैलता है। इनमें से एक संक्रमित मां से बच्चे का होना भी है। इसे लेकर लोगों के कई सवाल हैं। जैसे क्या संक्रमित मां द्वारा दवाएं लेने के बावजूद बच्चे को एचआईवी संक्रमण फैल सकता है? या फिर क्या मां द्वारा बच्चे को एचआईवी संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है? क्या आप जानते हैं कि भारत में एचआईवी/ एड्स का क्या इलाज है? मुंबई स्थित आशीर्वाद हॉस्पिटल में डर्मटोलोजिस्ट डॉक्टर राज हजरानी आपको ऐसे ही तमाम सवालों के जवाब दे रहे हैं।
(1) क्या मां से बच्चे को संक्रमण (MTCT) फैलने से रोका जा सकता है?
अगर आप एचआईवी स्टेटस को लेकर सुनिश्चित नहीं हैं, तो इसे रोका जा सकता है। इसके विकल्प जानने के लिए आपको अपने गाइनोकोलोजिस्ट से बात करने की जरूरत है।
(2) मां से बच्चे को संक्रमण फैलने से कैसे रोका जा सकता है?
अगर आप गर्भवती हैं और आपको एचआईवी स्टेटस की जानकारी नहीं है, तो आप एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी करा सकती हैं। यह संक्रमण की गंभीरता पर निर्भर करता है और आपको डिलीवरी से पहले दवाएं लेने की सलाह दी जाती है। यहां तक की डिलीवरी के बाद भी आपको दवा लेनी पड़ सकती है। किसी एक्सपर्ट के देखरेख में ही आप ब्रेस्टफीडिंग करा सकती हैं। अगर एक योजना के तहत गर्भावस्था है, तो आपको सही मात्रा में दवाएं दी जाती है जिससे भ्रूण को एचआईवी के जोखिम से बचाया जा सके। इसके अलावा यह ध्यान रखा जाता है कि एचआईवी दवाओं से भ्रूण पर किसी तरह का प्रभाव ना पड़े।
(3) एचआईवी पीड़ित महिला स्तनपान करा सकती है क्या?
वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार, अगर महिला रिप्लेसमेंट फीडिंग अफोर्ड कर सकती है, तो उसे ब्रेस्टफीडिंग कराने से बचना चाहिए। यानि अगर आप ब्रेस्ट मिल्क की बजाय फार्मूला फीड करा सकती हैं, तो आपको स्तनपान कराने से बचना चाहिए। हालांकि डॉक्टर फार्मूला फीड नहीं कराने की भी सलाह देते हैं। लेकिन इस स्थिति में डॉक्टर आपको इसकी सलाह दे सकता है।
(4) क्या गर्भावस्था के दौरान एचआईवी टेस्ट करा सकते हैं?
हां, यह बहुत महत्वपूर्ण है। इस दौरान आपको हर तिमाही में एचआईवी टेस्ट कराना चाहिए। वास्तव में पहली तिमाही के दौरान एचआईवी और अन्य इन्फेक्शन के टेस्ट शामिल हैं। इसके अलावा मां-बाप दोनों को गर्भावस्था की पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में क्लिनिकल परीक्षण के लिए जाना चाहिए।
(5) क्या गर्भवती महिलाओं से बच्चे को एचआईवी संक्रमण फैलने की अधिक संभावना होती है?
अगर आपको हाई वायरल है, तो गर्भावस्था में एचआईवी के फैलने का अधिक खतरा होता है। ऐसा अक्सर उन महिलाओं में देखा जाता है जो हाल ही में इन्फेक्शन से पीड़ित हुई हैं या वो महिलाएं, जो दवाएं नहीं ले रही हैं। कई ऐसे मामले भी हैं, जिसमें मां को एचआईवी नेगेटिव है जबकि पिता को एचआईवी पॉजिटिव, जोकि डॉक्टरों के लिए एक चुनौती है। हालांकि एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी से संक्रमण के जोखिम को नियंत्रित किया जा सकता है और महिला किसी भी संक्रमण के बिना एक स्वस्थ बच्चे को गर्भ धारण करा सकती है।
(6) क्या एचआईवी दवाओं के जरिए मां से बच्चे को संक्रमण फैलने से रोका जा सकता है?
हां, यह साबित हो गया है कि एंटीरेट्रोवाइरल उपचारों के जरिए एचआईवी फैलने के जोखिम को रोका जा सकता है। हालांकि संक्रमण फैलने की दर वायरल लोड पर निर्भर करती है। अगर वायरल लोड कम है, तो ट्रांसमिशन के चांस 0 फीसदी होते हैं।
(7) क्या गर्भावस्था में इस तरह की दवाएं लेना सुरक्षित है?
एचआईवी / एड्स की अधिकतर दवाएं संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सुरक्षित हैं। हालांकि अन्य दवाओं की तरह इन दवाओं के साइड इफेक्ट केवल दो फीसदी हैं। आपको बता दें कि इन दवाओं के प्रभाव की तुलना में इनके साइड इफेक्ट्स कम हैं।
(8) अगर महिला ने एचआईवी का इलाज नहीं कराया, तो क्या बच्चे में संक्रमण फैलने की संभावना है?
एचआईवी के हर 100 मामलों यह खतरा 32 फीसदी है। यानि 32 गर्भवती महिलाओं से उनके बच्चे को एचआईवी संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि गर्भावस्था की तीसरी तिमाही के दौरान एचआईवी जांच और अन्य टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है।
(9) क्या एंटी-रेट्रोवायरल इलाज के बावजूद एचआईवी संक्रमण फैल सकता है?
ज्यादातर मामलों में एंटी-रेट्रोवायरल वायरल लोड को कम करने में बहुत प्रभावी रहे हैं। हालांकि कई मामलों में दवाओं से मरीजों का वायरल लोड दबा नहीं है, जिससे शिशु को संक्रमण की संभावना बढ़ जाती। ऐसे मामले में विशेषज्ञ वायरल लोड की तीव्रता को कम करने के लिए दवाएं बदलने की सलाह देते सकते हैं।
(10) बच्चों में एचआईवी / एड्स को रोकने के लिए सबसे बेहतर तरीका क्या हो सकता है?
डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं को नियमित रूप से लेना इसे रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। दवा लेने की तीन श्रेणी हैं। (1) प्रसव पूर्व हस्तक्षेप- जब गर्भवती टेस्ट कराती है और रिजल्ट पॉजिटिव होता है, तो उसे दवाएं लेना शुरु कर देना चाहिए। (2) सी-सेक्शन- इसका कारण यह है सीजेरियन डिलवरी के जरिए बच्चा मां के शरीर के तरल पदार्थ के संपर्क में आने से बच जाता है। (3) प्रसवोत्तर देखभाल-एचआईवी संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए यह बहुत जरूरी है। हालांकि महिला को एचआईवी को एड्स में बदलने जोखिम को कम करने के लिए जीवनभर दवाएं लेना बहुत जरूरी है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock