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Frozen shoulder के संकेत और राहत दिलानेवाली फ़िज़ियोथेरेपी एक्सरसाइजेस

अकड़ी हुई पीठ के दर्द से बिना किसी सर्ज़री के भी राहत मिल सकती है।

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Written By: Editorial Team | Published : January 4, 2017 5:01 PM IST

एड्हीसिव कैप्सलाइटिस (adhesive capsulitis) के नाम से भी जाने जाने वाली समस्या यानि अकड़े हुए कंधे एक ऐसी स्थिति है जहां पीड़ित व्यक्ति को अकड़े हुए कंधे और गंभीर दर्द जैसी परेशानियां झेलनी पड़ती है, जिसकी वजह से कंधे को घुमाना मुश्किल हो जाता है। यह एक बहुत अधिक अड़चनभरी और गंभीर स्थिति है, लेकिन इसके दर्द से बिना किसी सर्ज़री के भी राहत मिल सकती है। डॉ. सुपर्णा टंडन (पीटी), सीनियर फ़िज़ियोशेरेपिस्ट, इंडियन स्पाइनल इंजरीस सेंटर, वसंत कुंज, नई दिल्ली फ्रोज़ेन शोल्डर (frozen shoulder) या अकड़ी हुई पीठ की समस्या के बारे में बता रही हैं साथ ही उन्होंने बताया कि इससे राहत कैसे पायी जा सकती है।

फ्रोज़ेन शोल्डर क्या है?

प्रारम्भिक फ्रोज़ेन शोल्डर डिसॉर्डर, जिसे एड्हीसिव कैप्सलाइटिस या पेरीअर्थराइटिस( periarthritis), भी कहा जाता है, इसकी पहचान जकड़न और कैप्सुलर प्रतिबंध (capsular restrictions) की उत्पत्ति के कारण होता है। इसमें आर्थ्रिटिक बदलाव या कार्टिलेज(cartilage)  में गठिया जैसे परिवर्तन नहीं होते जो कि रूमटॉइड अर्थराइटिस (rheumatoid arthritis or osteoarthritis) में देखे जाते हैं।

फ्रोज़ेन शोल्डर के प्रमुख लक्षण

आम गड़बड़ियां-

1. रात में दर्द और चमक के कारण नींद में गड़बड़ी।

2. हिलने-डुलने में तकलीफ।

3. जोड़ों के तालमेल और गतिविधियों में दिक्कत (सीमित बाहरी रोटेशन, कुछ आंतरिक रोटेशन और बल के साथ)

4. गति के दौरान हाथ घुमाने में कमी

5. मसल्स में आम कमज़ोरी और ग्लेनोह्यूमनल मसल्स(glenohumeral) में कमज़ोरी और स्कंधास्थि मांसपेशियों या स्कैप्यलर मसल्स(scapular muscles) के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण ट्रेपिजिअस (trapezius) और पीछे सर्विकल मसल्स में दर्द।

आम तकलीफें-

1. सर के ऊपर, पीछे, कंधों के बाहर और पीछे की तरफ हाथ ले जाने में मुश्किल होती हैं। इसीलिए कपड़े पहनने (जैकेट या कोट पहनने में दिक्कत या कपड़ों को पीछे की तरफ से बांधने) में दिक्कत, पीछे की जेबों में हाथ न पहुंचना (बटुआ आदि निकालने या रखने में), कंघी करने, दांत ब्रश करने, चेहरा धोने और चम्मच-गिलास आदि मुंह तक लाना भी मुश्किल हो जाता है।

2. भारी चीज़ें उठाने में दिक्कत।

3. कुछ आम गतिविधियों को करने में दिक्कत।

फ्रोज़ेन शोल्डर की समस्या किसे हो सकती है?

1. 40 से 60 वर्ष के लोगों को

2. डायबिटीज़ के मरीज़

3. ऐसे लोग जिन्हें पहले चोट या घाव, फ्रैक्चर, टिश्यू इंजरी हो चुकी हो।

4. रूमटॉइड की वजह से कलाई की गतिविधियों में दिक्कत

5. ऐसे लोग जिन्हें कलाई घुमाते वक़्त तकलीफ होती हो।

फ्रोज़ेन शोल्डर के लिए फ़िज़ियोथेरेपी एक्सरसाइज़

1. पेंडुलम एक्सरसाइज़- इस एक्सरसाइज़ में एक ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जिसमें गुरुत्वाकर्षण शक्ति का प्रयोग कर ह्यूमरस (humerus) को ग्लेनॉइड फॉसा (glenoid fossa) से दूर किया जाता है। इस तरीके से हल्की थरथराहट और कम्पन के ज़रिए दर्द से राहत पाने की कोशिश की जाती है। इस एक्सरसाइस के अभ्यास के लिए अपने कंधों को आराम की स्थिति में रखें। सीधे खड़े हों और ऐसे झुकें कि प्रभावित बांह नीचे की तरफ हो। अब धीरे-धीरे बांह को घुमाएं। क्लॉकवाइज़ और एंटी क्लॉकवाइज़ दिशा में 10-10 बार घुमाएं।

2. टॉवेल स्ट्रेच- स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज गतिविधियां बढ़ाने में मदद करती हैं। एक लम्बा तौलिया लीजिए, एक हाथ से पकड़िए और कंधों-पीठ पर बांधिए। दूसरे हाथ को पीठ पर ले जाते हुए टॉवेल को पकड़िए। धीरे-धीरे टॉवेल को ऊपर और नीचे ले जाइए ताकि आपका हाथ पूरी पीठ पर घूम सके। यह हल्का स्ट्रेच आपके कंधों और पीछे भी महसूस होना चाहिए। इसे 10 बार दोहराएं।

3. आर्मपीट स्ट्रेच- वह बांह जिसमें तकलीफ न हो रही हो उसे, सीने के सामने तक उठाएं। धीरे से अपने घुटने मोड़ें, और कांख या बगल को खुलने दें। घुटनों को थोड़ा और मोड़ें और बांहों को और खुलने दें। हर बार घुटने मोड़ते हुए थोड़ा और स्ट्रेच करते रहें, लेकिन जबरदस्ती न करें। 10-15 बार दोहराएं।

4. क्रॉस-बॉडी रीच- अपनी दूसरी बांह से तकलीफवाली बांह को कोहनी तक उठाएं, और इसे अपने शरीर के स्तर तक लाएं, कंधों के स्ट्रेच करने के लिए थोड़ा-सा स्ट्रेच करें। 30 सेकंड तक इसी मुद्रा में रहें। 5 से 10 बार दोहराएं।

5. आउटवर्ड और इंवर्ड रोटेशन- थेरा बैंड या स्ट्रेच बैंड की मदद से अपनी कलाई को घुमाने की कोशिश की जाती है। बैंड को किसी फर्निचर या दरवाजे की कुंडी से बांधें। अपनी कोहनी को अपने शरीर के पास और 90-डिग्री पर रखें। 10 बार बाहर की तरफ और 10 बार अंदर की तरफ घुमाएं और इस एक्सरसाइज़ को 10 बार घुमाएं।

फ़िज़ियोथेरेपिस्ट कई बार गर्मी की मदद ले सकते हैं ,वह भी एक्सरसाइज़ से पहले। गर्मी की मदद से जोड़ों की गतिविधियों को बढ़ाने और बेहतर स्ट्रेचिंग के लिए फ़िज़ियोथेरेपिस्ट ऐसा कर सकते हैं। एक्सरसाइज़ के बाद की तकलीफ को कम करने के लिए आइस पैक का इस्तेमाल कर सकते हैं।

नोट- इस बात का ध्यान रखें कि ऐसी बहुत सी एक्सरसाइज़ेस हैं जो फ्रोज़ेन शोल्डर से मरीज़ को राहत दिलाने के लिए इस्तेमाल की जा सकती हैं। ऐसी ही एक्सराइज़ेस हैं जॉइंट मोबिलाइज़ेशन तकनीक और विशेष स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज़ेस। मरीज़ों को सलाह दी जाती है कि वह किसी योग्य फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा एक विस्तृत जांच कराएं और अपने लिए एक विशेष प्रोग्राम बनवाकर तकलीफ से आराम पाने की कोशिश करें।

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock