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Written By: Editorial Team | Published : January 23, 2017 2:04 PM IST
Enema therapy is a specific Ayurvedic treatment crucial in cleansing and strengthening the colon, supporting the liver's natural healing process.
मौजूदा समय में, हमारी तबियत का ख्याल रखना सबसे मुश्किल काम हो गया है। सालों तक खान-पान में गड़बड़ी और अस्त-व्यस्त लाइफस्टाइल के कारण हमारे पेट में विषैले तत्व जमा हो जाते हैं जो धीरे-धीरे हमारी रक्तवाहिनियों में समाने लगते हैं बीमारियों के रुप में दिखायी पड़ते हैं। डॉ. तुलसीदास नायर (रेजिडेंट डॉक्टर, आयुर्वेदिक विलेज, नवी मुंबई) ने बताया कि मानव शरीर में जलन, सूजन और अर्थराइटिस की वजह शरीर में छुपे विषैले तत्व हो सकते हैं। हमारे शरीर से ऐसे विषैले तत्वों का निष्कासन हमारी सेहत की रक्षा करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। डॉ. नायर ने बताया ऐसा करना समय शरीर के प्राकृतिक चयापचय गतिविधि को बनाए रखने के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। यह मरीज़ के लिए आयुर्वेदिक एनीमा इलाज या बस्ती कर्म के साथ किया जा सकता है।
बस्ती कर्मा के फायदे-
'कोलोन थेरेपी (Colon therapy) या बस्ती कर्मा पंचकर्म की 5 शाखाओं में से एक है," डॉ. नायर ने बताया कि यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें आयुर्वेदिक तेलों और तत्वों का मिश्रण पम्प के ज़रिए व्यक्ति की मलाशय में पहुंचायी जाती है। यह शरीर में विषैले तत्वों को निकालने का काम करता और आपकी सेहत में भी सुधार होता है। 'हो सकता है ये तत्व आपके शरीर में बहुत दिनों से बैठे हों।,"बस्ती कर्मा में एक ऐसा माहौल बनाया जाता है जो इस क्षेत्र को साफ करने में मदद करता है और फिर इसे फॉलो किया जाता है।
बस्ती कर्मा के प्रकार
डॉक्टर नायर के अनुसार, मुख्य रुप से बस्ती कर्मा के दो प्रकार हैं। "हम पानी या तेल के साथ बने अर्क का इस्तेमाल करते हैं। अस्थापना बस्ती प्रक्रिया में औषधिय तेल का इस्तेमाल किया जाता है जबकि अनुवसन बस्ती में काशायम या औषधिय अर्क का इस्तेमाल किया जाता है।," ये तेल और अर्क बीमारी की स्थिति और व्यक्ति की क्षमता के अनुसार बनाए जाते हैं।
बस्ती कर्म का तरीका
डॉ. नायर ने बताया कि "यह मिश्रण मलाशय के माध्यम से व्यक्ति की बड़ी आंत में पम्प के ज़रिए पहुंचाया जाता है। यह अंग का अंदरूनी भाग उंगलियों जैसे हिस्सों के साथ कवर होता है जिसे इन्टेस्टनल विल्ली कहते हैं। यह कुछ सेकेंड की अवधि में ही ऑस्मोसिस के माध्यम से दवाओं को अवशोषित करके रक्तवाहिनियों में पहुंचाने में मदद करती है।,” डॉ. नायर ने आगे कहा कि“हमारा शरीर काफी समझदारी से काम लेता है जो इस मिश्रण में से खुद के लिए फायदेमंद दवाओं को अपनी ज़रूरत के हिसाब से ग्रहण कर लेता है।”
बस्ती, एक शक्तिशाली आरोग्य प्रक्रिया
“आयुर्वेद में बस्ती को अर्धचिकित्सा भी कहा जाता है। इसका मतलब है कि केवल बस्ती कर्मा से ही एनिमा की समस्या का आधा इलाज हो जाता है। बस्ती कर्मा की मदद से काशयम में दवाइयों का अवशोषण अधिकतम हो सकता है। मरीज़ को समान मात्रा में दवाइयों का लाभ पाने के लिए इसे काफी लम्बे समय तक लेना पड़ता है।” डॉ. नायर ने यह भी बताया कि यहां तक कि पार्किन्सन (Parkinson’s) जैसी बीमारियां भी बस्ती कर्मा से आसानी से नियंत्रित की जा सकती हैं। “मलाशय के माध्यम से व्यक्ति के शरीर में प्राकृतिक डोपामाइन को पहुंचाने से हम झटके लगने या झुकने जैसे लक्षणों को कम कर सकते हैं।,” डॉ. नायर ने कहा।
बस्ती कर्म किसे नहीं कराना चाहिए
डॉ. नायर ने कहा कि, कोई भी व्यक्ति सही और आवश्यक सलाह-मशविरे के बाद पंचकर्म करवा सकता है। लेकिन जहां तक बात बस्ती कर्मा की है, तो रोगी के रोग-विषयक मुद्दों पर विचार किया जाता है। “लीवर में सूजन, एसिडिटी या दिल से जुड़ी किसी पुरानी या क्रोनिक बीमारी से पीड़ित लोगों को बस्ती कर्मा नहीं कराना चाहिए।,” डॉ. नायर ने समझाया।
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अनुवादक-Sadhna Tiwari
चित्रस्रोत- Shutterstock