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डिप्रेशन में कब जायें डॉक्टर के पास ?

कहीं आपका लगातार दुखी रहना क्लिनिकल डिप्रेशन के लक्षण तो नही ?

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:12 AM IST

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बुरे वक़्त का हम सबको अनुभव है। उन दिनों जब हम बेड से उठना नही चाहते ,देर तक सोना चाहते हैं ,किसी से बात नही करते ,कुछ खाते नही, कभी-कभी हम कुछ भी नही करना चाहते। ज़िन्दगी में उतार चढ़ाव तो लगे ही रहतें हैं यह एक बुरा दौर होता है जो गुज़र जाता है। लेकिन कभी- कभी ये दौर नही गुजरता  और हालात दिन-ब-दिन खराब होते जाते हैं। तब आपके व्यवहार में काफी बदलाव देखने को मिलते हैं  जैसे कि-

  • रोजमर्रा के कामों से खुद को दूर रखना और किसी भी काम में मन न लगना

  • किसी भी बात को नेगटिव तरीके से सोचना और बार बार खुद को हर्ट करने जैसी फीलिंग आना

  • बिना किसी बात के ही अकेले में रोना और खुद को हमेशा एकांत में रखना

  • कुछ नया करने कि सोचना और फिर उस काम के असंभव से लगने पर बिना शुरुवात के ही पीछे हट जाना और एकांत में चले जाना

ऊपर बताये हुए सारे या उनमे से कम से कम तीन लक्षणों को अगर आपने तीन महीनो से ज्यादा अनुभव किया हो, तो यह डॉक्टर के पास जाने का सही वक़्त है। हो सकता है आप क्लिनिकल डिप्रेशन के शिकार हों । इस डिप्रेशन को समझने की ज़रूरत है, अगर सही समय पर इसका इलाज नही हुआ तो यह आपकी ज़िन्दगी भी ख़त्म कर सकता है। ऐसा माना जाता है की दुखी या डिप्रेस्ड होना लाइफ का हिस्सा है और हर किसी की लाइफ में कभी न कभी ऐसे दौर आते हैं। लेकिन यह तब एक रोग बन जाता है जब ये दुःख वाली फीलिंग हमेशा आपके साथ लगी ही रहती है और बाद में चलकर ये आपका स्थायी मूड बन जाती है। इसलिये इस अवस्था में आपको डॉक्टर की सलाह ही लेनी चाहिए, वो ही बता सकते हैं की आपके इस डिप्रेशन का इलाज दवाइयों से करना है या किसी मनोवैज्ञानिक तरीके से।  डिप्रेशन एक मानसिक रोग है इसका सही समय पर इलाज़ होना बहुत ज़रूरी है । पढ़ें - बालों और त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है आपका डिप्रेशन!

भारत में आज भी लोग डिप्रेशन को लेकर ज्यादा जागरूक नही हैं। अन्य मानसिक बीमारियों कि तरह डिप्रेशन का कारण भी आनुवांशिक या आपके आस पास के सामाजिक माहौल पर निर्भर करता है। डिप्रेशन होने के और भी कारण हो सकते हैं जैसे कि किसी दवा का दुष्प्रभाव या फिर आपकी जिंदगी में बुरे दौर का बार बार आना। परिवार या दोस्तों के साथ ज्यादा समय बिता कर डिप्रेशन से काफी हद तक बचा जा सकता है।

लेकिन कभी- कभी मेडिकल जांच ज़रूरी होती है।  दुर्भाग्यवश आज भी किसी मनोचिकित्सक या साइकोथेरेपिस्ट के पास जाना हमारे समाज में कलंक के रूप में माना जाता है,लोगों में अभी भी यह एक गलत धारणा है कि ऐसे डॉक्टरों के पास सिर्फ पागल हो चुके लोग ही जाते हैं।

डिप्रेशन को आज भी लोग सर्दी जुखाम की तरह साधारण बीमारी समझते हैं और सोचते हैं कि यह अपने आप ही कुछ दिन में ख़त्म हो जाएगा। लेकिन जिस तरह हम लम्बे समय तक खांसी जुखाम का इलाज़ न कराए तो आगे चलकर सांस सम्बंधित कई बड़ी बीमारियाँ हो जाती है, वैसे ही अगर सही समय पर डिप्रेशन का इलाज न कराए तो यह आगे चलकर आपकी जिंदगी भी खत्म कर सकता है ।

इसलिए क्लिनिकल डिप्रेशन को इग्नोर न करें और समय पर इसका इलाज करायें ।

मूल स्रोत - When should you see a doctor for your depression?

अनुवादक – Anoop Singh

चित्र स्रोत - Shutterstock


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