इन 5 तरीकों से मेनोपॉज़ करता है आपके दिल को परेशान

मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में वजन तेज़ी से बढ़ता है तो क्या करेंगे?

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:41 AM IST

जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है आपके शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं। महिलाओं की ज़िंदगी में ऐसा ही एक दौर होता है मेनोपॉज़। जिसकी वजह से हार्मोन्स से जुड़े व्यापक बदलाव होते हैं और पीड़ित महिला को मूड स्विंग, शरीर में गर्मी और वज़न बढ़ने जैसी कई समस्याएं होने लगती हैं। हालांकि ज़्यादातर महिलाओं को जिस चीज़ के बारे में जानकारी नहीं है, वह है मेनोपॉज़ का उनके दिल पर असर। जी हां, मेनोपॉज़ से आपको दिल की बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है। वैसे दिल की बीमारियों का कारण उम्र और आनुवांशिक भी हो सकते हैं लेकिन मेनोपॉज़ से गुज़र रही कुछ महिलाएं अपनी जीवनशैली में कुछ बदलाव करके दिल की बीमारियों का ख़तरा कम कर सकती हैं।

मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं को हार्ट अटैक का ख़तरा अधिक होता है। इसका एक कारण है शरीर में एस्ट्रोजन के निर्माण में कमी। बोर्ड ऑफ इंटरनेशनल मेनोपॉज़ सोसायटी के डायरेक्टर डॉ. दुरू शाह कहते हैं कि ‘ऐसी महिलाएं जिन्हें मेनोपॉज़ जल्दी हुआ है (प्राकृतिक रुप से या किन्हीं कारणों से ओवरीज़ के निकाले जाने पर) उनमें समान उम्र की महिलाओं की अपेक्षा दिल की बीमारियों का ख़तरा दोगुना होता है’। जहां मेनोपॉज़ एक प्राकृतिक प्रक्रिया है वहीं एस्ट्रोजन लेवल का स्तर घटने से शरीर पर असर पड़ता है। क्योंकि यही हार्मोन्स महिला के शरीर को दिल की बीमारियों से बचाते हैं।

1. हाई ब्लड प्रेशर- जैसे कि एस्ट्रोजन का स्तर मेनोपॉज़ के बाद घट जाता है, दिल की मांसपेशियां और रक्त वाहिनियां कठोर और कम लचीली बन जाती हैं। इसकी वजह से खून दिल की धमनियों पर अधिक दबाव बनाता है, और ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। हाई ब्लड प्रेशर दिल पर दबाव बनाता है और आपको दिल की बीमारियों का ख़तरा बढ़ने लगता है। इसलिए इस बात का ध्यान रखें कि मेनोपॉज़ के बाद आपका ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहे। जिसके लिए आप नियमित चेकअप कराएं।

2. कोलेस्ट्रॉल- दिल की बीमारियों का एक आम कारण है कोलेस्ट्रॉल। मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में कोलेस्ट्रोल का स्टर बढ़ने का डर होता है। इसका कारण शरीर में एस्ट्रोजन के निर्माण के स्तर का कम होने को माना जाता है। कम एस्ट्रोजन की वजह से लो डेंसिटी लिपोप्रोटीन (low-density lipoprotein) या बैड कोलेस्ट्रोल बढ़ जाता है। इसी तरह हाई डेंसिटी लिपोप्रोटीन (high-density lipoprotein) या गुड कोलेस्ट्रॉल घट जाता है। जिसकी वजह से महिलाओं में दिल की बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है। केवल कोलेस्ट्रॉल ही नहीं, मेनोपॉज़ ट्राइग्लिसराइड (triglycerides) नामक फैट का स्तर भी बढ़ा देता है जो कार्डियोवैस्कुलर डिजीजेस का कारण होता है। इसलिए उम्र बढ़ने के साथ कोलेस्ट्रॉल से भरपूर चीज़ें खाना कम कीजिए और अपनी डायट में कम कोलेस्ट्रॉल वाली चीज़ें शामिल करें।

3. वजन बढ़ना- मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में वजन तेज़ी से बढ़ता है विशेषकर पेट के आसपास के हिस्सों में। दरअसल एस्ट्रोजन फैट बर्न करने में विशेष भूमिका निभाता है और हार्मोन्स की कमी के कारण यह फैट शरीर में जमा हो जाता है। यही नहीं, मेनोपॉज़ की वजह से मेटाबॉलिज़्म भी धीमा हो जाता है और यह उम्र बढ़ने के साथ आपका वज़न बढ़ाने का काम करता है। इससे निपटने के लिए नियमित करसत या कम से 30 मिनट की ब्रिस्क वाक कीजिए।

4. डायबिटीज़- यह बात तो आप भी जानते ही होंगे कि डायबिटीज़ के रोगियों को दिल की बीमारियों का खतरा अधिक होता है। हालांकि बहुत से लोगों को पता नहीं कि जब एक महिला मेनोपॉज़ से गुज़रती है तो वह इंसुलिन रेजिंस्टेंस की संभावना अधिक बढ़ जाती है। यही वजह है कि प्रीमेनोपॉज़ से मेनोपॉज़ के दौर में जानेवाली महिलाओं में डायबिटीज़ की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए जैसे ही मेनोपॉज़ की शुरुआत हो आप अपने ग्लूकोज़ लेवल पर ध्यान दीजिए। ताकि डायबिटीज़ और दिल की बीमारियों का ख़तरे से बचने की कोशिश की जा सके।

5. आसामान्य हार्ट रेट – ऐट्रीअल फिब्रिलेशन (atrial fibrillation ) के नाम से मशहूर आसामान्य हार्ट रेट भी दिल की बीमारियों का ख़तरा बढ़ाती है। जैसे ही आप की उम्र 50 के पार पहुंचती है, एस्ट्रोजन का स्तर घटने लगता है और दिल की सेहत और कार्य भी प्रभावित होते है। हार्मोन्स में यह बदलाव न केवल हार्ट रेट को कम करता है बल्कि ब्लॉकेज भी होने लगती है। जिसकी वजह से दिल और कोरोनरी डिज़िजेस होने लगती हैं। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है तो खतरा और भी बढ़ जाता है। इसलिए अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने की कोशिश करें और अगर आपको चक्कर या थकान जैसे लक्षण दिखे तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock

 

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