आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए अच्छा है फिश ऑयल

आंखों की रोशनी तेज़ बनाए रखने का इससे कारगार तरीका नहीं मिलेगा आपको।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:36 AM IST

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अनुवादक – Shabnam Khan

फिश ऑयल काफी इस्तेमाल किया जाने वाला सप्लीमेंट है। कई लोगों के पास पीले-सुनहरे रंग के इसके कैप्सूल होते हैं। फिश ऑयल इम्यूनिटी समेत पूरे स्वास्थ्य के लिए अच्छा है। पर सबसे ज़्यादा इसे आंखों को पहुंचाने वाले इस्तेमाल के लिए जाना जाता है।

उम्र बढ़ने के साथ-साथ आंखों के बीच का हिस्सा जिसे मैक्यूला कहते हैं, प्रभावित होना शुरू हो जाता है। जिसकी वजह से धीरे-धीरे आपको देखने में समस्या होने लगती है और नज़र कमज़ोर हो जाती है। फिश ऑयल सप्लीमेंट उम्र से जुड़े इस मैक्यूलर डीजेनरेशन (macular degeneration) को रोकने में मददगार होता है। ये एक हद तक नज़र कमजोर होने से बचाता है। (इसे भी पढ़ें - फिश ऑयल के 7 फायदे)

फिश ऑयल में डीएचए जैसे ओमेगा-3 एसिड होते हैं, जो देर से होने वाले फोटल (late foetal) और जल्दी होने वाले नीयोनालट (early neonalat) स्टेज में आंखों में इकट्ठा हो जाता है। आंखों के फोटोरेसेप्टर के काम करने के लिए और आंखों के स्वास्थ्य के लिए डीएचए ज़रूरी होता है। ये नज़र कमज़ोर होने से भी बचाता है।

फिश ऑयल ड्राई आई सिंड्रोम को रोकने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ड्राई आई सिंड्रोम ऐसी स्थिति है जिसमें आंखों में थोड़ी खुजली, दर्द, सूजन आदि होती है, और आंखों में आंसू बनना कम हो जाता है।ऐसा अमूमन कंप्यूटर ज्यादा इस्तेमाल करने से होता है या फिर किसी दवाई का साइड इफेक्ट भी हो सकता है।

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओफथेलमोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में ये बात सामने आई है कि फिश ऑयल ड्राई आई सिंड्रोम को 150% बेहतर बना सकता है। फिश ऑयल के ओमेगा-3 फैटी एसिड इस प्रभाव के लिए ज़िम्मेदार हैं।

चित्र स्रोत - Shutterstock

संदर्भ - 1. Hodge W, Barnes D, Schachter HM, et al. Effects of Omega-3 Fatty Acids on Eye Health: Summary. 2005 Jul. In: AHRQ Evidence Report Summaries. Rockville (MD): Agency for Healthcare Research and Quality (US); 1998-2005. 117.

2. Bhargava R, Kumar P, Kumar M, Mehra N, Mishra A. A randomized controlled trial of omega-3 fatty acids in dry eye syndrome. International Journal of Ophthalmology. 2013;6(6):811-816. doi:10.3980/j.issn.2222-3959.2013.06.13.


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