Upper gastrointestinal (GI series) एक्स-रे कराने से पहले जान लें ये बातें

इस एक्स-रे को कराने से 8 घंटे पहले से ही आप चाय,पानी स्मोकिंग या चुइंगम जैसी कोई भी चीज न खाएं।

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Written By: Editorial Team | Published : February 27, 2017 1:38 PM IST

अपर गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल ट्रैक्ट के एक्स-रे को अपर गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल सीरीज (Upper gastrointestinal series) के नाम से जाना जाता है। इस एक्स-रे से आहार नली, पेट और छोटी आंत के एक हिस्से की जानकारी मिलती है। आज हम आपको इस एक्स-रे के बारे में विस्तार से बतायेंगें। एक्स-रे फिल्म में लिक्विड सस्पेंशन तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है जो मुख्य तौर पर बेरियम का घुलनशील मिश्रण होता है। बेरियम सफेद रंग का सूखा पाउडर होता है जो कि एक अच्छा एक्स-रे एबजोर्बर माना जाता है। एक्स-रे फिल्म पर बेरियम पाउडर सफ़ेद रंग का दिखता है। जब आप बेरियम युक्त ड्रिंक पीते हैं तो यह आपके शरीर के अंदर गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल ट्रैक्ट (Gastrointestinal Tract) के दीवारों पर चिपक जाती है जिससे एक्स-रे में उनके साइज़ और आकार के बारे में स्पष्ट जानकारी हासिल हो जाती है।

आइये जानते हैं अपर गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल सीरीज (Upper GI series) से किन किन बीमारियों का पता चलता है।  

आइये जानते हैं इस टेस्ट के दौरान और क्या क्या होता है-

  • इस टेस्ट को कराने से पहले डॉक्टर ये सलाह देते हैं कि कम से कम 8 घंटे पहले से ही आप चाय,पानी, स्मोकिंग या चुइंगम कुछ भी न लें।

  • टेस्ट से पहलें टेकनीशियन आपसे बेरियम और पानी के मिश्रण को पीने के लिए कहता है और फिर उसे पीने के बाद आपको एक्स-रे टेबल पर लिटा दिया जाता है। इस दौरान रेडियोलाजिस्ट आपके गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल ट्रैक्ट में बेरियम के मूवमेंट की जांच करते हैं और अलग अलग समय पर एक्स-रे इमेज कैप्चर करते हैं।

  • कुछ मामलों में जीआई सीरीज के एक्स-रे के लिए फ्लूरोस्कोपी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें लगातार एक्स-रे किरणों से आपकी गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल ट्रैक्ट पर भेजा जाता है और उसी समय रेडियोलाजिस्ट स्क्रीन पर बेरियम की डिटेल चेक करते रहते हैं।

  • कुछ मामलों में डॉक्टर डबल कंट्रास्ट स्टडी (double contrast study) के लिए प्रेफर करते हैं। इसमें आपको स्ट्रॉ की मदद से बेरियम पीना होता है जिसके कारण बेरियम के साथ कुछ हवा भी अंदर चली जाती है। ये हवा एक्स-रे फिल्म में ब्लैक कलर में दिखती है जिससे एक्स रे में आपकी नली और बाकी अंगों के आकार की आउटलाइन बन जाती है। जिससे जांच करने में काफी आसानी रहती है। इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम 5-7 घंटों का समय लगता है।

नोट:

  • कभी कभी डॉक्टर आपसे बॉवेल सीरीज ऐड करने के लिए भी कह सकते हैं जिससे वे छोटी आंत की भी जांच कर सकें।
  • हर एक इंसान के लिए बेरियम ट्रांजिट की टाइमिंग अलग अलग होती है।
  • अगर आपको अपनी दवाइयों से किसी तरह की एलर्जी है या पहले से ही आपको कोई समस्या है तो इस बारे में अपने डॉक्टर को ज़रूर बताएं।
  • ये पूरी प्रक्रिया खत्म होने के बाद आपको पेट फूलने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
  • अपर जी आई सीरीज में बेरियम के कारण कई लोगों को कब्ज़ की शिकायत हो जाती है। अगर इस प्रक्रिया के बाद अगले 1-2 दिन तक आप शौच नहीं जाते हैं तो अपने डॉक्टर को इस समस्या के बारे में ज़रूर बताएं।
  • आपके गैस्ट्रोइन्टेस्टाइनल ट्रैक्ट में बेरियम होने के कारण अगले कुछ दिन तक आपके मल का रंग हल्का रंगीन सा हो जाता है।
  • अगर आप प्रेगनेंट हैं तो टेस्ट के पहले ही अपने डॉक्टर को बताएं।

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अनुवादक: Anoop Singh

चित्र स्रोत: Shutterstock 

संदर्भ:

  1. University of Maryland Medical Center. Chest CT. Diagnostic Radiology and Nuclear Medicine.https://umm.edu/programs/diagnosticrad/services/technology/ct/scan-with-contrast/chest-ct
  2. Heller M, Krieger P, Finefrock D, Nguyen T, Akhtar S. Contrast CT Scans in the Emergency Department Do Not Increase Risk of Adverse Renal Outcomes. Western Journal of Emergency Medicine. 2016;17(4):404-408. doi:10.5811/westjem.2016.4.28994.
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