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क्या आपको भी रात में सोते समय पैर में दर्द होता है ? हो सकता है ये गंभीर रोग

अगर रात में सोते समय पैर में दर्द के साथ अचानक झटके महसूस होते हैं तो समझ लें आप इस बीमारी के शिकार हैं !

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Written By: Editorial Team | Updated : January 3, 2017 4:38 PM IST

पैर में दर्द होना एक आम समस्या है लेकिन कुछ लोगों को बार बार पैरों की मांसपेशियों में तेज दर्द होता रहता है। इस दर्द से राहत पाने के लिए आराम करते समय या सोते समय भी उनका मन करता है की वे अपने पैर को हिलाते रहें। इस समस्या को रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (Restless legs syndrome (RLS) कहा जाता है जो कि एक न्यूरोलॉजीकल समस्या है।

क्या है यह समस्या :

लक्षण:

अगर हम इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों के बारे में बात करें तो वह निम्न है।

  • पैरों में खिंचाव
  • जलन
  • पैर टाइट होना
  • ऐसा महसूस होना जैसे पैर के अन्दर कोई कीड़ा रेंग रहा हो
  • करंट लगने जैसा महसूस होना
  • तेज चुभने वाला दर्द होना
  • कई लोगों में ये सारे लक्षण नहीं पाए जाते हैं और कुछ कुछ लोगों को इतना दर्द भी नहीं होता है।
  • आरएलएस के कुछ लक्षण बाहों और शरीर के कई अन्य अंगों में भी पाये जाते हैं।
  • उम्र बढ़ने के साथ साथ स्थिति और बिगड़ती जाती है।

किन वजहों से स्थिति और ख़राब हो जाती है :

  • जब आप आराम करते हैं उस समय यह समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है।
  • रात में सोने के समय भी यह समस्या काफी बढ़ जाती है जो सुबह होने पर अपने आप ठीक हो जाती है।
  • लम्बी दूरी के सफ़र के दौरान
  • रिलैक्सेशन वाली एक्सरसाइज के दौरान

कारण:

  • अभी तक इसके होने के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि कुछ वैज्ञानिकों में अपने शोध में इस बात की पुष्टि की है कि यह बीमारी काफी हद तक आनुवांशिक है। इसके अलावा मष्तिष्क में आयरन की कमी भी पैरों में होने वाले इस दर्द का मुख्य कारण  है।
  • पार्किन्सन डिजीज, डायबिटीज, अर्थराइटिस, अनिद्रा और आयरन, मैग्नीशियम या बी 12 की कमी के कारण भी यह समस्या होने लगती है।
  • एलर्जी, मिचली आने और डिप्रेशन की कुछ दवाइयों के सेवन के कारण भी यह समस्या होने लगती है।

जांच: ऐसा माना जाता है कि रेस्टलेस लेग सिंड्रोम की जांच जनरल फिजिशियन द्वारा नहीं किया जा सकता बल्कि इसके लिए न्यूरोलॉजिस्ट और मनो चिकित्सक दोनों की ज़रूरत पड़ती है। कई बार शरीर में विटामिन, आयरन, कैल्शियम की कमी या अर्थराइटिस जैसी समस्याओं के कारण यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि आखिर दर्द किस वजह से हो रहा है। हालांकि इसकी जांच के दौरान पैरों में झटकों और रात में सोते समय पैरों की जांच की जाती है साथ ही आपके फॅमिली मेम्बर की भी जांच होती है कि कहीं इसका कारण आनुवांशिक तो नहीं।

ट्रीटमेंट: अभी तक इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है बस कुछ दवाइयों की मदद से इसके लक्षणों को कम किया जा सकता है। सबसे पहले आपको शरीर में आयरन की कमी की जांच ज़रूर करवानी चाहिए। अभी इसके ट्रीटमेंट में इन दो तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

  • नॉन- फार्माकोलॉजिक ट्रीटमेंट
  • फार्माकोलॉजिक ट्रीटमेंट

नॉन- फार्माकोलॉजिक ट्रीटमेंट :

  • अच्छी नींद लेना
  • रोजाना एक ही निश्चित समय पर सोना और निश्चित समय पर उठना
  • नियमित एक्सरसाइज करना
  • कॉफ़ी और अल्कोहल का सेवन न करना
  • इन्फ्रारेड लाइट ट्रीटमेंट

फार्माकोलॉजिक ट्रीटमेंट :

 आयरन सप्लीमेंट : जब शरीर में फेरीटिन की कंसंट्रेशन 50 माइक्रोग्राम/लीटर से कम हो जाती है तब यह ट्रीटमेंट बहुत ज़रूरी हो जाता है। अगर आपके शरीर में आयरन की कमी नहीं है तो फिर इस त्रेत्मेंट की कोई ज़रूरत नहीं होती है।

लेवोपोड़ा:  आरएलएस के माइल्ड लक्षणों के लिए लेवोपोड़ा के साथ बेजेराजाइड  का सेवन कराया जाता है। सोने से एक दो घंटे पहले शुरुवात में इसकी मात्रा 50-62।5 मिलीग्राम राखी जाती है जो बाद में बढ़ाकर 100-250 मिलीग्राम तक की जा सकती है।

साइड इफ़ेक्ट: लेवोपोड़ा के सेवन से मरीज को कई तरह के साइड इफ़ेक्ट भी हो सकते हैं जैसे कि मिचली आना,सिरदर्द,मुंह सूखना इत्यादि।

 डोपामाइन अगोनिस्ट: ऍफ़डीए द्वारा तीन तरह के डोपामाइन एगोनिस्ट को मान्यता मिली हुई है जिनके नाम हैं रोपिनीरोल (ropinirole), प्रामिपेक्सोल और ट्रांसडेर्मल रोटिगोटाईन।

ऐन्टिकन्वल्सन्ट (Anticonvulsants) : आर एल एस से आराम पहुंचाने में ऐन्टिकन्वल्सन्ट दवाइयां जैसे कि गैबेपेंटीन, कार्बामेजेपाइन काफी असरदार मानी जाती हैं। हालांकि अभी तक इन दवाइयों को  ऍफ़ डी ए से मान्यता नहीं मिली हुई है।   शुरुवात में मरीज को गैबेपेंटीन की 300 मिलीग्राम मात्रा दी जाती है जो बाद में चलकर 1500-3000 मिलीग्राम तक बढाई जा सकती है।

इन सबके अलावा भी कई तरह के फार्माकोलॉजी ट्रीटमेंट जैसे कि ओपिओइडस (Opioids) और बेंजोडियाज़ेपिन (benzodiazepines) का इस्तेमाल किया जाता है।

घरेलू उपचार :

इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि इन दवाइयों से आप इस समस्या से छुटकारा पा ही जाएँ लेकिन अगर आप खुद से अपनी केयर करें और अपने लाइफस्टाइल में महत्वपूर्ण बदलाव लायें। हम यहाँ ऐसे ही कुछ टिप्स आपको बता रहे हैं।

  • कुछ लोग दिन में इतना ज्यादा पानी पी लेते हैं जिससे रात में बार बार बाथरूम करने के लिए उनकी नींद खुल जाती है और ऐसे में आर एल एस का दर्द और बढ़ जाता है। इसलिए अगर आप इस समस्या से पीड़ित हैं तो सीमित मात्रा में ही पानी का सेवन करें।
  • एक तरफ जहाँ कुछ लोगों को कम पानी पीना चाहिउये वहीँ दूसरी तरफ कुछ लोगों को जब रात में तेज दर्द होता है तो उठ कर खूब सारा पानी पी लेने से ही आराम मिलता है।
  • अगर आप बहुत दिनों से इस बीमारी से पीड़ित हैं तो अपने पैर को घुटने तक बर्फ वाले पानी में जितनी देर हो सके डुबोकर रखें। इसे दिन में कई बार दोहरायें।
  • अगर आपको बर्फ वाले ठंडे पानी से भी आराम नहीं मिल रहा है तो अपने पैरों को किसी भारी कम्बल से ढँक लें। इससे कुछ ही मिनट में आराम मिल जाता है।
  • अगर आप सुबह से लेकर दोपहर तक मीठी चीजें ज्यादा खातें हैं तो इससे रात में आरएलएस की समस्या कम हो जाती है।
  • कुछ लोग जब डेरी आइटम का सेवन कम कर देते हैं तो उनकी यह समस्या भी कम हो जाती है। इसे आप खुद के साथ चेक कर सकते हैं।
  • कई लोगों को विक्स वेपोरब लगाने से भी इस समस्या से आराम मिलता है। अगर आपके साथ भी ऐसा है तो आप इसका इस्तेमाल दर्द कम करने के लिए कर सकते हैं।
  • बॉडी मसाज कराने से भी इस समस्या से आराम मिलता है।
  • अच्छी और गहरी नींद लेने से भी काफी हद तक यह समस्या कम हो जाती है।
  • इस बीमारी के कई उपाय कुछ लोगों पर काम करते हैं और कुछ पर नहीं। इसलिए आप वही तरीका अपनाएँ जो आप पर असर करता हो।

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अनुवादक: Anoop Singh

चित्र स्रोत: Shutterstock

संदर्भ: 

  1. Singh H, Verma S, Aggarwal S. Restless Legs Syndrome. Journal, Indian Academy of Clinical Medicine. 2008:9(3): 188-92.

  1. Cotter PE, O’Keeffe ST. Restless leg syndrome: is it a real problem? Therapeutics and Clinical Risk Management. 2006;2(4):465-475.

  1. Gupta R, Lahan V, Goel D. Restless Legs Syndrome: A common disorder, but rarely diagnosed and barely treated – an Indian experience. Sleep Medicine. 2012;13(7):838-841. doi:10.1016/j.sleep.2012.03.018.

  1. Wilt TJ, MacDonald R, Ouellette J, Tacklind J, Khawaja I, Rutks I, Butler M, Fink HA. Treatment for Restless Legs Syndrome. Comparative Effectiveness Review No. 86. AHRQ Publication No. 12(13)-EHC147-EF. Rockville, MD: Agency for Healthcare Research and Quality. November 2012.

  1. Comella CL. Treatment of Restless Legs Syndrome. Neurotherapeutics. 2014;11(1):177-187. doi:10.1007/s13311-013-0247-9.
  2. Medications for Willis-Ekbom disease/ Restless Legs Syndrome: A Guide To Help You Control and Manage Your WED/RLS. https://www.rls.org/document.doc?id=2333.