जब आपका बच्चा हो Growing Pains से परेशान

आखिर क्यों होती है बच्चों को ग्रोइंग पेन की समस्या?

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Written By: Editorial Team | Published : February 1, 2017 1:00 PM IST

5 साल का निकी रात को 1 बजे अचानक से नींद से उठकर रोने लगा। उसके पैरों में तेज़ दर्द हो रहा था और वह इसी वजह से परेशान था। उसके माता-पिता ने पैर में मलहम लगाकर मालिश की और आधे घंटे बाद आराम होने पर निकी सो गया। अगली सुबह निकी हमेशा की तरह ही खेल-कूद रहा था ऐसे लग रहा था जैसे पिछली रात कुछ हुआ ही नहीं था। निकी के माता पिता ने भी राहत की सांस ली। लेकिन सप्ताह भर बाद ही एक रात फिर अचानक से दर्द उठा। अगली सुबह चिंतित माता-पिता निकी को लकर डॉक्टर के पास गए। निकी की जांच की गयी और सौभाग्य से पता चला कि उसे ‘ग्रोइंग पेन’(growing pains) की समस्या है।

वैसे बहुत से लोगों को लगता है कि जब बच्चे का विकास बहुत तेज़ी से हो रहा हो तो ‘ग्रोइंग पेन’ की समस्या तभी होती है, जो कि जन्म के बाद के 2 साल के बीच या उसके बाद यह दर्द किशोरावस्था में हो सकता है। लेकिन, ‘ग्रोइंग पेन’ का बच्चे के विकास से कुछ लेना-देना नहीं है! डॉक्टरों के अनुसार यह बच्चों को रात के समय होनेवाले कम गम्भीर दर्द का प्रकार है जो 3 से 12 साल के बच्चों को होता है।

‘ग्रोइंग पेन’ के लक्षण

जांघों के सामने वाले हिस्से, पिंडलियों, या घुटनों के पीछे की मांसपेशियों में दर्द के अलावा इसका कोई निश्चित लक्षण नहीं है। यह दर्द आमतौर पर शाम को या रात को ही उठता है। कुछ बच्चों को यह दर्द गम्भीर महसूस हो सकता है तो कुछ को हल्का। ‘ग्रोइंग पेन’ रोज़ नहीं होता। इससे बच्चे की गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ता। रिसर्चर्स के अनुसार 1-2 सालों में दर्द की गम्भीरता कम होती जाती है, और अधिकांश मामलों में किशोरावस्था तक पहुंचते-पहुंचते दर्द पूरी तरह खत्म हो जाता है। अगर आपका बच्चा नीचे लिखी तकलीफों की शिकायत करे तो उसे डॉक्टर के पास ले जाएं-

• केवल एक पैर में दर्द

• रोज़ रात दर्द होना

• बाहों या पीठ में दर्द

• किसी चोट वाले स्थानपर दर्द होना

• जोड़ों में सूजन

• बुखार

• वजन कम होना

• भूख न लगना

• थकान और कमज़ोरी

अगर आपका बच्चा, विशेषकर सुबह के वक़्त चल नहीं पा रहा तो आपको अपने बच्चे को डॉक्टर के पास भी ले जाना पड़ सकता है। अगर जांच में चीज़ें नॉर्मल बतायी जाती हैं तो हो सकता है कि आपका बच्चा ग्रोइंग पेन की समस्या से जूझ रहा है। हालांकि, अगर दर्द के अलावा कुछ और तकलीफें भी हों तो यह कोई दूसरी बीमारी या समस्या हो सकती है।

ग्रोइंग पेन के अलावा पैर में चोट भी लगने पर भी मरीज़ को गम्भीर दर्द की समस्या होती हैं। हालांकि जांचा में इसका पता बहुत जल्दी लग सकता है। आमतौर पर दर्द किसी विशेष स्थान पर ही होता है। लेकिन, ऐसा ज़रूरी नहीं, विशेषकर, एक्सिडेंट के अलावा लगी चोट या बच्चे को मारने-पीटने जैसी स्थितियों में। इसीलिए डॉक्टर से विचार-विमर्श के समय सारी बातें खुलकर बताएं।

ऑसगुड स्ल़ॉटर डिज़िज और रनर्स नी- ऑसगुड स्ल़ॉटर डिज़िज (Osgood-Schlatter disease) एक ऐसी समस्या है जिसमें घुटने के ठीक नीचे सूजन और दर्द महसूस होता है। यह वह स्थान है जहां नीकैप (kneecap) और टिबिया (पिंडली की हड्डी/ शाइन बोन) एक-दूसरे से जुड़ते हैं। यह हालत सामान्यतः किशोर उम्र के लड़के और खिलाड़ियों में पायी जाती है। इसी तरह रनर्स नी(Runner’s knee) लड़कियों में पायी जाती है।

जुवेनाइल इडियोपेथिक आर्थराइटिस- यह आर्थराइटिस का एक प्रकार है जिसका मुश्किल से पता लगाया जा सकता है। लेकिन इसके लक्षण ग्रोइंग पेन से अलग हैं। जुवेनाइल इडियोपेथिक अर्थराइटिस (Juvenile Idiopathic Arthritis -JIA) में बार-बार सूजन, जोड़ों में दर्द, बुखार और रैशेज होते हैं। जेआईए और ग्रोइंग पेन में मुख्य अंतर लगातार बने रहने वाला दर्द और सुबह के समय दिखनेवाली समस्याएं हैं।

इंफेक्शन- अक्सर इंफेक्शन्स के साथ बुखार और जहरीलापन या टाक्सिसिटी (toxicity) जैसी तकलीफें भी होती हैं। दर्द वाली जगह पर सूजन, लाली और त्वचा बहुत अधिक नर्म होने जैसी समस्याओं से भी इंफेक्शन का पता चलता है।

ट्यूमर- कुछ प्रकार के ट्यूमर्स की वजह से लोगों के पैरों में दर्द हो सकता है, लेकिन ऐसे दर्द के साथ सूजन भी होती है। वैसे दर्द की वजह से बच्चे को रातभर जागना भी पड़ सकता है, लेकिन ग्रोइंग पेन जो थोड़ी-थोड़ी देर के लिए आता है उसकी तुलना में ये काफी देर तक बने रह सकता है या धीरे-धीरे तेज़ हो सकता है। इसी तरह गम्भीर प्रकार के ट्यूमर के साथ बुखार और वेट लॉस भी हो सकता है।

रेस्टलेस लेग सिंड्रोम- वैसे तो ग्रोइंग पेन और रेस्टलेस लेग सिंड्रोम (Restless Leg Syndrome-RLS) के एक-दूसरे से जुड़े होने की कोई पुष्टि तो नहीं की गयी है लेकिन जर्नल स्लीप में छपी एक स्टडी में इस बात का खुलासा किया गया कि जिन बच्चों में जांच के बाद ग्रोइंड पेन पाया गया उनकी समस्या आगे चलकर रेस्टलेस लेग सिंड्रोम में भी तब्दील हो जाती है। इनमें से अधिकांश बच्चों के परिवार में पहले ही लोगों को रेस्टलेस लेग सिंड्रोम हो चुका था। तो वहीं कुछ बच्चों में, लक्षण मानी जानेवाली समस्याएं इतनी गम्भीर थीं कि उन्हें तुरंत ट्रीटमेंट के शुरु करने की आवश्यकता थी।

वैज्ञानिकों को अभी तक उस तंत्र का पता नहीं चल पाया है जहां से दर्द शुरु होता। उन्होंने ग्रोइंग पेन के कारणों के तौर पर कुछ थ्योरीज़ प्रस्तुत की हैं। जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

पोस्ट्युरल या आर्थोपेडिक दोष- स्टडीज़ में पाया गया है कि ग्रोइंग पेन का संबंध पोस्ट्युरल या आर्थोपेडिक दोष (postural or orthopaedic defects) से भी है। सपाट पैर, नॉक-नी (knock-knee), स्कॉलीओसिस (scoliosis) जिसमें रीढ़ की हड्डी मुड़ जाती है और शारीरिक का पोश्चर बिगड़ जाता है। जूतों में विशेष प्रकार के बदलाव करने और उनके साथ ट्रिप्लेन एड़ियां (triplane wedges) या ऑर्थोसेस (orthoses) का इस्तेमाल करने से कुछ लोगों कों दर्द से राहत मिलती है। हालांकि रिसर्च कर रहे लोग अभी भी इस बात पर एकमत नहीं हो सके हैं।

इसी तरह हाइपरमोबाइल जॉइंट्स (Hypermobile joints), ऑर्नी जॉइंट्स (orknee joints) जो कि आमतौर पर जोड़ों द्वारा अपेक्षित गतिविधियों से कही अधिक गतिशील होते हैं, वे भी ग्रोइंग पेन का कारण बन सकते हैं। हालांकि इस थ्योरी को भी अभी तक मान्यता नहीं मिल पायी है।

हड्डियों की कमज़ोरी- कुछ रिसर्चर्स को लगता है कि ग्रोइंग पेन हड्डियों की कमज़ोरी की वजह से भी होता है। उन्होंनें पाया कि ग्रोइंग पेन से परेशान बच्चों में स्वस्थ बच्चों की तुलना में हड्डियों की सघनता, विशेषकर शाइनबोन के आसपास के क्षेत्र में काफी कम थी। हालांकि, कुछ रिसर्चर्स को ऐसा लगता है कि दर्द की कुछेक घटनाओं के आधार पर इस थ्योरी की पुष्टि नहीं की जा सकती।

मानसिक कारण- नकारात्मक विचार और मानसिक तकलीफों की वजह से भी बच्चों को ग्रोइंग पेन की समस्या हो सकती है। बच्चों को होनेवाले ग्रोइंग पेन और नॉन-आर्थराइटिक पेन पर जॉन ऐप्ली की स्टडी में बताया गया मानसिक परेशानी और पारिवारिक तनाव भी बच्चों में ग्रोइंग पेन से जुड़े हुए हैं।

लोअर पेन थ्रेसहोल्ड- ग्रोइंग पेन से परेशान बच्चों में दूसरे स्वस्थ बच्चों की तुलना में लोअर पेन थ्रेसहोल्ड की समस्या अधिक होती है। साथ ही पेट और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी उन्हें परेशान कर सकती हैं।

अनुवांशिक कारण- परिवार के सदस्यों, माता-पिता, दादा-दादी या भाई-बहनों को होनेवाली बीमारियों और समस्याओं की वजह से भी बच्चों में ग्रोइंग पेन की सम्भावना देखी जाती है।

विटामिन डी की कमी- बहुत से बच्चों को विटामिन डी की कम की वजह से ग्रोइंग पेन की समस्या होती है, खासकर अगर वे धूप में नहीं निकलते। जैसे, एक कोरियन स्टडी में ऐसा पाया गया कि जिन कोरियाई बच्चों में विटामिन डी की भारी कमी दिखायी दी उनमें शरीर के निचले हिस्से में एक असहनीय और कम न होनेवाला दर्द होता है। रिसर्चर्स ने कहा “हमें ऐसा लगता है विटामिन डी बच्चों में ग्रोइंग पेन की समस्या के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।,”जबकि दूसरी तरफ, विभिन्न स्टडीज़ में विटामिन डी की कमी और ग्रोइंग पेन के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया।

ग्रोइंग पेन का मैनेजमेंट

बच्चों में ग्रोइंग पेन की समस्या बहुत गम्भीर नहीं मानी जाती और अधिकांश मामलों में इसे इलाज की भी ज़रूरत नहीं पड़ती। लेकिन माता-पिता या अभिभावक के तौर पर आप ये काम कर सकते हैं-

• बच्चे के घुटनों और पैर की मालिश करें।

• दर्दवाली जगह पर हॉट पैक से सिंकाई करें।

• दर्द होने पर बच्चे को एक एनाल्जेसिक दें। लेकिन बच्चे को बहुत दिनों तक एनाल्जेसिक नहीं देना चाहिए, यह नुकसानदायक हो सकता है।

• मसल्स स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज़ेस करने में बच्चे की मदद करें। दिन में दो बार (सुबह और रात) में 10-10 मिनट के लिए एक्सरसाइज़ करवाएं। इस तरह से बच्चे के साथ थोड़ा ज़्यादा समय बिताने से उसे आपसे मानसिक सपोर्ट भी मिलेगा।

• एक डायरी में नोट करें कि किन गतिविधियों या चीज़ों की वजह से बच्चे का दर्द बढ़ता है।

• बच्चे को अगर आसनीय या पोस्ट्युरल (postural) दोष है, तो मददगार जूते खरीदकर दे सकते हैं।

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अनुवादक-Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत- Getty images, Shutterstock.

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