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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:43 AM IST
किडनी डिजीज या पेट से जुड़ा कोई लक्षण दिखने पर डॉक्टर आपको पेट के ऊपरी हिस्से का अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देता है। अल्ट्रासाउंड में अंगों और उनकी साउंड वेव्स को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। पेट के ऊपरी हिस्से में लीवर, किडनी, पित्ताशय की थैली और पाचक ग्रंथि होते हैं। अल्ट्रासाउंड से पेट दर्द, किडनी रोग, किडनी की पथरी जैसी विभिन्न बीमारियों के इलाज में मदद मिलती है। मुंबई स्थित बालाभाई नानावती हॉस्पिटल में कंसल्टेंट रेडियोलाजिस्ट डॉक्टर रश्मि पारिख आपको बता रही हैं कि पेट के ऊपरी हिस्से का अल्ट्रासाउंड कराने से पहले या बाद में आपको किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
अल्ट्रासाउंड से पहले क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
आमतौर पर मरीज को इलाज से पहले आठ से दस घंटे तक कुछ नहीं खाने की सलाह दी जाती है और कुछ मामलों में चार से छह घंटे तक। कई रोगियों को फैट-फ्री मील खाने को भी कहा जाता है। किडनी के लिए अल्ट्रासाउंड कराने से पहले चार से छह गिलास पानी पीने को कहा जाता है। इसके अलावा ढीले कपड़े पहनना बेहतर होता है।
यह कैसे काम करता है?
अल्ट्रासाउंड सोनार इमेजिंग के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें ट्रांसड्यूसर द्वारा कैप्चर्ड साउंड वेव्स एक ऑब्जेक्ट के जरिए पास होती हैं और टकराकर वापस आती हैं। एक स्क्रीन होता है जिस पर स्कैन इमेज आती हैं। ट्रांसड्यूसर एक माइक्रोफोन की तरह दिखता है जो जांच के दौरान साउंड वेव्स को ऑर्गन तक भेजता है और डिस्प्ले इमेज के लिए गूंज (echoes) को कैप्चर करता है।
अल्ट्रासाउंड कैसे किया जाता है?
मरीज को टेबल पर लेटाया जाता है। इस टेबल को झुकाया भी जा सकता है। इसके बाद रेडियोलॉजिस्ट स्किन पर जेल लगाकर जांच शुरू करता है। जेल इसलिए लगाया जाता ताकि स्किन और ट्रांसड्यूसर के बीच हवा को नष्ट किया जा सके और इनके बीच उचित संपर्क बनाया जा सके। ट्रांसड्यूसर को वांछित छवियों के कैप्चर करने तक हिलाया जाता है। जांच होने पर जेल को साफ कर दिया जाता है।
क्या जेल हानिकारक होता है?
जेल का इस्तेमाल अंगों की बेहतर छवियों के लिए केवल स्किन और ट्रांसड्यूसर के बीच संपर्क में सुधार के लिए किया जाता है। यह नॉन-टॉक्सिक है और स्किन के लिए सेफ है।
अल्ट्रासाउंड के दौरान दर्द होता है क्या?
अल्ट्रासाउंड के दौरान किसी तरह का दर्द नहीं होता है। कई मामलों में मरीजों के लिए असहज हो सकता है लेकिन इससे दर्द नहीं होता है। हालांकि कई बार मरीज को कुछ देर तक सांस रोकने के लिए कहा जा सकता है।
इसमें कितना समय लगता है?
यह टेस्ट आधे घंटे में पूरा हो जाता है। कई बार दूसरा टेस्ट करने से पहले आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। जांच के दौरान बेहतर चित्र प्राप्त करने के लिए आपको थोड़ा इधर-उधर होने के लिए कहा जा सकता है।
अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट कब मिलती है?
इसकी रिपोर्ट आपको उसी दिन मिल जाती है। यानि अल्ट्रासाउंड के दस या बीस मिनट बाद रिपोर्ट मिल जाती है।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock