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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:40 AM IST
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अनुवादक – Usman Khan
ग्लूकोमीटर खरीदने से पहले आपको कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। मुंबई स्थित श्रेया डायबिटीज सेंटर में डायबिटोलोजिस्ट डॉक्टर प्रदीप गाडगे आपको ग्लूकोमीटर से जुड़ी कुछ जरूरी बातें बता रहे हैं, जिन्हें डायबिटीज के सभी मरीजों को जानना बहुत आवश्यक है।
1) बेशक घर पर ग्लूकोमीटर होने पर आप कभी भी अपना ब्लड ग्लूकोज लेवल चेक कर सकते हैं लेकिन आपको डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से लैब में भी चेकअप कराते रहना चाहिए। क्योंकि ग्लूकोमीटर की रीडिंग से ज्यादा लैब की रीडिंग विश्वसनीय है। वास्तव में ग्लूकोमीटर आपको तभी सही रिजल्ट देता है, जब आपका ब्लड शुगर लेवल 70-150 मिलीग्राम / डीएल की रेंज में होता है।
2) ग्लूकोमीटर पोस्ट मील और फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज लेवल की तुरंत रीडिंग देता है, जिससे आपको ब्लड ग्लूकोज लेवल की निगरानी करने में आसानी रहती है। ज्यादातर मामलों में फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज लेवल 120 एमजी / डीएल और पोस्ट मील ब्लड ग्लूकोज लेवल 40 मिलीग्राम / डीएल के आसपास होता है। ग्लूकोमीटर और लैब की रीडिंग के बीच का अंतर बहुत नेग्लिजबल है और इसलिए इसका इस्तेमाल घर में ब्लड ग्लूकोज की जांच के लिए किया जा सकता है।
3) यह बात हर कोई नहीं जानता है कि अगर ब्लड ग्लूकोज लेवल नार्मल रेंज 70 –150 मिलीग्राम / डीएल से कम या ज्यादा है तो ग्लूकोमीटर की रीडिंग में अंतर हो सकता है। यानि अगर आपका ब्लड ग्लूकोज लेवल 150 - 200 मिलीग्राम / डीएल के बीच है, तो कई मामलों में 20 से 30 यूनिट का अंतर हो सकता है और अगर रीडिंग 250 एमजी / डीएल से अधिक है, तो 50–100 यूनिट का अंतर हो सकता है। इसलिए डॉक्टर से सलाह लें।
4) ग्लूकोमीटर यूज करने से पहले हाथों को अच्छी तरह धो लें। उपकरण को अच्छी तरह साफ कपड़े से पोंछ लें। स्ट्रिप्स को डायरेक्ट हीट से बचाकर सही जगह रखें, वर्ना यह गलत रीडिंग दे सकता है। अगर ग्लूकोमीटर में कोडिंग सिस्टम है, तो सही कोड के लिए सावधानी बरतें।
5) खाने के तुरंत बाद ब्लड ग्लूकोज लेवल जांच ना करें। उदाहरण के लिए अगर आप दाल चावल खा रहे हैं तो उंगलियों पर उनके कुछ अंश लगे रह सकते हैं यानि कार्बोहाइड्रेट है की वजह से गलत रीडिंग आ सकती है।
चित्र स्रोत - Shutterstock