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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:42 AM IST
भारतीय महिलाएं अक्सर दिल की बीमारियों की गंभीरता को नजरअंदाज कर देती हैं। आपको जानकार हैरानी होगी कि भारत में हर 31 में से एक महिला की मौत ब्रेस्ट कैंसर से जबकि तीन में एक महिला की मौत हृदय रोग की वजह से होती है। नोएडा स्थित जेपी हॉस्पिटल में डायरेक्टर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी डॉक्टर गुंजन कपूर के अनुसार, पुरुषों के विपरीत महिलाओं में हृदय रोग का दस साल बाद पता चलता है और मेनोपॉज के बाद हृदय रोग का खतरा महिलाओं में अधिक होता है।
हार्ट डिजीज से भारतीय ही हैं ज्यादा पीड़ित- अन्य जातीय मूल के लोगों की तुलना में एशियाई भारतीयों को कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) का ज्यादा खतरा है। भारत में कोरोनरी आर्टरी डिजीज एक महामारी की तरह है और अमेरिकियों की तुलना में शहरी भारतीयों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज जोखिम चार गुना ज्यादा है। पिछले तीस वर्षों में वेस्ट में सीएडी दर आधी रह गई है, जबकि भारत में दोगुनी हुई है।
भारत में दिल का पहला दौरा पड़ने की औसतन उम्र 20 साल से कम है। भारत में सभी दिल के दौरे पचास की उम्र में और एक चौथाई चालीस साल से कम आयु में होते हैं। भारतीयों में समय से पहले सीएडी का कारण आनुवांशिक संवेदनशीलता भी है। एक तिहाई लोगों में इसका कारण लिपोप्रोटीन (ए) का बढ़ना, खराब जीवनशैली, खानपान और तनाव है।
महिलाओं में हार्ट डिजीज पुरुषों से कैसे अलग है- वैज्ञानिक अध्ययनों से यह पता चला है कि महिलाओं में चेस्ट पेन यानि एंजाइना (angina) के लक्षण तो अक्सर दिखाई देते हैं लेकिन कोरोनरी आर्टरी में किसी तरह की रुकावट का पता नहीं चल पाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि एंजियोग्राफी टेस्ट में धमनियों में होने वाली रुकावट का पता लगाना बहुत ही मुश्किल होता है। इसके अलावा, चालीस फीसदी महिलाओं को दिल का दौरा पड़ने के दौरान सीने में दर्द नहीं होता है। क्या आप दिल का दौरा पड़ने के लक्षण जानते हैं? हालांकि उन्हें सांस लेने में परेशानी और कमजोरी हो सकती है। इसके अलावा दिल का दौरा पड़ने के दौरान पीठ या कंधे में दर्द होता है जबकि आर्म्स में नहीं।
अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं, तो आपको दिल का दौरा पड़ने का जोखिम तीन गुना अधिक हो सकता है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान हाई बीपी से पीड़ित को भी दिल का दौरा पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। स्मोकिंग करने वाली महिलाओं को पुरुषों की तुलना में दिल का दौरा पड़ने का जोखिम छह गुना अधिक होता है।
हृदय रोग के जोखिम को कैसे कम कर सकते हैं- महिलाओं में हृदय रोग के जोखिम को कम करने के चार आसान तरीके हैं- बेहतर खानपान, नियमित रूप से एक्सरसाइज़ करना, स्मोकिंग नहीं करना और स्वस्थ वजन बनाए रखना। इन चार तरीकों से आप हार्ट डिजीज का जोखिम 82 फीसदी तक कम कर सकती हैं।
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अनुवादक – Usman Khan
चित्र स्रोत - Shutterstock