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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:40 AM IST
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अनुवादक -Sadhna Tiwari
मेरे दो बच्चे हैं। मैं अपनी बच्ची को हेपेटाइटिस के टीके लगवाने जा रही थी लेकिन फिर मेरी सहेली ने मुझे बताया कि टीके लगवाने के बाद भी उसके बेटे को हेपेटाइटिस हो गया। क्या ये टीके लगवाने चाहिए? क्या इनसे कोई फायदा होता है?
फोर्टिस एस्कॉर्ट्स लीवर एंड डायजेस्टिव डीसिजेज इंस्टिट्यूट के सीनियर कंसल्टेंट, डॉ. मानव वाधवन ने दिया इस सवाल का जवाब-
लीवर में सूजन को हेपेटाइटिस कहते हैं। और भारत में शराब के बाद वायरस ही हेपेटाइटिस का दूसरा सबसे बड़ा कारण है। हेपेटाइटिस के वायरस या तो पानी से फैलते हैं (हेपेटाइटिस ए और ई), या फिर खून से (हेपेटाइटिस बी, सी, डी)। हेपटाइटिस ए और इ के वायरस की वजह से पीलिया और उल्टी जैसे परिणाम होते हैं और इससे जान जाने का ख़तरा 5% है, वो भी उन मरीज़ों को जिनका लीवर काम करना बंद कर देता है। जबकि दूसरी तरफ, हेपेटाइटिस बी और सी के वायरस लीवर संबंधी क्रोनिक समस्याओं के कारण बनते हैं और लीवर कैंसर या सिरोसिस (cirrhosis) जैसी बीमारियां हो सकती हैं।
हेपेटाइटिस आम तौर पर बच्चों को प्रभावित करता है और प्रभावित लोगों में से केवल 5 फ़ीसदी में गंभीर लक्षण देखे जाते हैं। भारत में अधिकांश लोग बचपन में ही हेपेटाइटिस ए के शिकार हो जाते हैं। आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को टीके लगाने की सलाह दी जाती है क्योंकि ये टीके बीमारी को रोकने में 85-90 प्रतिशत मददगार साबित हो सकते हैं। क्या आप जानते हैं कि हेपेटाइटिस और पीलिया के मरीज़ पीली चीज़ें खा सकते हैं?
हेपेटाइटिस ए के टीके अभी वैश्विक टीकाकरण योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं। लेकिन ज़्यादातर पीडियाट्रिक्स बेहतर सुरक्षा के लिए एक साल की उम्र के अंदर ही बच्चे को टीका लगाने की सलाह देते हैं। रिसर्च में पाया गया है कि हेपेटाइटिस बी के तीनों टीके लगवाने वाले 95 प्रतिशत लोगों में वायरस से लड़ने की प्रतिरोधक शक्ति बढ़ गई। इससे पता चलता है कि इस बीमारी की रोकथाम में टीके किस तरह सहायक हैं।साथ ही जानिए कितने ज़रूरी हैं बढ़ती उम्र में वैक्सीनेशन।
यही नहीं, हेपेटाइटिस के टीके का असर जिंदगीभर रहता है। फिलहाल यूनिवर्सल इम्मूनाइजेशन प्रोग्राम (universal immunisation program) के तहत
देश के कई हिस्सों में हेपेटाइटिस बी के टीके लगाए जा रहे हैं। हेपेटाइटिस ए के उलट हेपेटाइटिस बी किसी भी उम्र में हो जाता है। हमारे देश में हेपेटाइटिस बी की प्रबलता 4% है। इसका मतलब देश के 6 करोड़ लोगों को हेपेटाइटिस बी से खतरा है।
हालांकि टीके लगाने के बाद भी हेपेटाइटिस बी होने के कुछ मामले मिलते हैं, लेकिन ऐसा कभी-कभार ही होता है। हेपेटाइटिस दूषित पानी और भोजन से भी फैल सकता है इसलिए सुरक्षा के लिहाज से टीके लगवाना ठीक है। पछताने से अच्छा है कि पहले से ही बचाव की तैयारियां कर ली जाएं। हेपेटाइटिस को जड़ से उखाड़ने के लिए सभी को टीकाकरण कराना चाहिए।
चित्र स्रोत: Shutterstock