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Vaginal health in hindi : कई बार योनि (vagina) में तेज दर्द, खुजली, जलन या बहुत बुरी गंध आने लगती है। यकीनन ऐसा होने से किसी भी महिला को काफी बेचैनी होने लगती है। क्या आपको पता है कि ये समस्या योनि संक्रमण (vaginal infection) के कारण हो सकती है। आपको बता दें कि इस तरह की समस्या 11 साल की उम्र में शुरू हो सकती है, जो मेनोपॉज तक आपको सता सकती है। इस समस्या को मेडिकल भाषा में योनिशोथ (vaginitis) कहा जाता है। इस समस्या के इन्फेक्शन विभिन्न प्रकार के होते हैं।
ये एक आम लक्षण है। लगभग 75 फ़ीसदी महिलाएं इससे पीड़ित होती हैं। ये इन्फेक्शन सेक्स के बाद हो सकता है। ये यौन संचारित संक्रमण नहीं है। अगर आपके चार से अधिक बार ये हो रहा हैं, तो इसे रिकरंट कैंडिडिआसिस कहा जाता है। ये प्रेगनेंसी के दौरान आम है। लेकिन इससे बच्चे को नुकसान नहीं होता है। इससे डायबिटीज या एचआईवी इन्फेक्शन का खतरा पैदा हो सकता है।
ये कैंडिडा फंगस के बढ़ने के कारण होता है। योनि का पीएच लेवल बदलने या हार्मोनल असंतुलन होने का कारण ये फंगस बढ़ता है और इन्फेक्शन का कारण बनता है।
तनाव- अध्ययनों के अनुसार, मानसिक कारण विशेषकर तनाव यीस्ट इन्फेक्शन के कारण है।
शुगर और कैफीन- अध्ययनों के अनुसार अधिक मात्रा में शुगर और कैफीन का सेवन इसका कारण हो सकते हैं।
एंटीबायोटिक दवाएं, मौसम परिवर्तन, गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग आदि भी इसका कारण बन सकते हैं।
आमतौर पर एंटीफंगल क्रीम और टेबलेट्स यीस्ट को बढ़ने से रोकने में प्रभावी हैं। इसमें बुटोकोनाजोल (butoconazole), क्लोटरीमेजोल (clotrimazole), माइकोनेजोल (miconazole) और टेरकोनेजोल (terconazole) क्रीम प्रभावी होती हैं। फ्लूकोनाजोल (Fluconazole) इंजेक्शन का भी यीस्ट इन्फेक्शन के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका इलाज कराने से पहले डॉक्टर को उन सभी ओटीसी दवाओं, हर्बल प्रोडक्ट, सप्लीमेंट आदि की जानकारी दें, जो आप ले रही हैं। फ्लूकोनाजोल गर्भवती महिलाओं के लिए सही नहीं होता, इससे बच्चे को नुकसान हो सकता है। दिल और किडनी के रोगोंसे पीड़ितों को ये दवा नहीं लेनी चाहिए।
ये इन्फेक्शन बैक्टीरिया से होता है। यहां लैक्टोबैसिलस (lactobacilli) ई कोलाई, गार्डनेला वेजिनेलिस, माइकोप्लाज्मा प्रजाति के रूप में बैक्टीरिया से बदला है। कई मामलों में इससे कोई खतरा नहीं रहता लेकिन कुछ मामलों में इससे गर्भपात, योनि स्राव, एचआईवी और स्मेल का खतरा होता है।
इसके इलाज के लिए एम्पीसिलीन, पेनिसिलिन, और मेट्रोनिडेजोल (metronidazole) जैसी एंटीबैक्ट्रियल दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इनमें केवल मेट्रोनिडेजोल मौखिक दवा है। हालांकि टिनीडेजोल (tinidazole) का इस्तेमाल भी प्रचलन में है। इसके अलावा क्लिंडामाइसीन (Clindamycin) का भी यूज किया जाता है। दवाओं के अलावा पोलीकार्बोफिल-कर्बोपोल जेल (policarbophil-carbopol gels) और चितोसन (chitosan) बेस्ड लैक्टिक एसिड डिलीवरी जेल को भी सुरक्षित माना जाता है। लैक्टोबैसिलस दही और अन्य मिल्क प्रोडक्ट्स में पाया जाता है। इसलिए आप इस तरह के फूड्स को अपने खाने में शामिल कर सकती हैं। इससे योनि का पीएच संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलती है और ये बैक्टीरिया को नहीं बढ़ने देते हैं।
इसके वायरस अधिकतर यौन संपर्क के माध्यम से फैलते हैं। ये दो तरह के होते हैं-
हर्पीज़ सिंप्लेक्स वायरस- इसमें जननांग वाले हिस्से में दर्द, योनि पर घाव और कभी-कभी योनि के अंदर घाव हो जाता है। इसका दर्द कम से कम एक महीने तक रहता है।
ह्यूमन पेपिलोमा वायरस- इसमें दर्दनाक मस्से हो जाते हैं। कई बार ये मस्से नजर नहीं आते हैं इसलिए आपको पैप टेस्ट की जरूरत पड़ सकती है।
इन दोनों वायरस का कोई इलाज नहीं है। लेकिन इन्हें दवाओं से कंट्रोल किया जा सकता है। हालांकि कंडोम का इस्तेमाल कर इस समस्या से बचा जा सकता है। गर्भावस्था में जननांग हर्पीज़ जटिल हो सकते हैं।
वैजिनाइटिस के कारण ट्रिकोमोनियासिस (Trichomoniasis), क्लैमाइडिया और गानरीअ (gonorrhoea) और अन्य यौन संचारित संक्रमण हो सकते हैं।
ये समस्या 40 फ़ीसदी मेनोपॉज वाली महिलाओं को होती है। ये इन्फेक्शन तब होता है, जब योनि के पीएच और मूत्र मार्ग के बीच एस्ट्रोजन का लेवल घटता बढ़ता है। इसमें योनि संक्रमण के अलावा बार-बार पेशाब आना, पेशाब करने में अक्षम होना या पेशाब को कंट्रोल नहीं कर पाना जैसे लक्षण हो सकते हैं। डॉक्टर इसके इलाज के लिए एस्ट्रोजेन रिप्लेसमेंट थेरेपी (ईआरटी) की सलाह दे सकते हैं। कई बार जीवनशैली में बदलाव कर इससे राहत मिल सकती है लेकिन इससे सभी लक्षणों में सुधार नहीं हो सकता है।