क्या आपके बच्चे को मिर्गी के दौरे पड़ते हैं? इन 5 बातों का रखें ध्यान

Epilepsy से पीड़ित बच्चे के ऐसे ध्यान रखें माता-पिता

WrittenBy

Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:41 AM IST

भारत में 8 से 12 साल के बच्चों में मिर्गी का प्रसार 1000 में से 22.2 के बीच होने का अनुमान है। इस न्यूरोलॉजिकल स्थिति में बच्चे को दौरा, बेहोशी, सांस थमना, सिरदर्द और पेट की समस्याएं हो सकती हैं। अभिभावक के रूप में आपको मिर्गी से पीड़ित बच्चे की विशेष देखभाल करनी चाहिए ताकि वो इस स्थिति में होने के बावजूद एक सामान्य जीवन व्यतीत कर सके। क्या आपको पता है कि मिर्गी के कारण, लक्षण और उपचार क्या हैं? मुंबई स्थित पीडी हिंदुजा हॉस्पिटल में कंसल्टेंट पीडीअट्रिशन न्यूरोलोजिस्ट डॉक्टर नीलू देसाई के अनुसार, जिन लोगों का बच्चा मिर्गी से पीड़ित है, उन्हें इन सुझावों को अपने दिमाग में रखना चाहिए।

1) बच्चे को रोजाना दवाई दें- कई बार परिजन बच्चे को उस समय दवा देना बंद कर देते हैं, जब उन्हें ऐसा लगता है कि बच्चा सही होने लगा है। आपको बता दें कि आपको ऐसी गलती करने से बचना चाहिए। बच्चे की दवा बंद करने से पहले एक बार डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

2) ज्यादा सुरक्षात्मक ना बनें- मिर्गी से पीड़ित बच्चे के साथ सामान्य व्यवहार रखें। यानि उसके साथ सामान्य लोगों की तरह पेश आएं। उसे विभिन्न गतिविधियों में शामिल करें और उसे अन्य खेलों में हिस्सा लेने दें।

3) बच्चे के स्कूल में सूचित करें- कई बार परिजन अपने बच्चे की हालत की जानकारी उसके स्कूल में नहीं देते हैं। शर्म के चलते वो इस संबंध में टीचर्स को बताने में संकोच करते हैं। डॉक्टर के अनुसार, बच्चे की हालत के बारे में स्कूल अधिकारियों को सूचित करना बहुत जरूरी है ताकि किसी भी तरह की समस्या होने पर वो उसकी मदद कर सकें।

4) तनाव ना लें- कई परिजन अपने बच्चे को मिर्गी की अवस्था में देखकर तनाव महसूस करते हैं। आपको बता दें कि बच्चों में मिर्गी के 70 से 80 फीसदी मामलों को दवाओं के जरिए कंट्रोल किया जा सकता है। केवल 20 से 30 फीसदी मामलों में सर्जरी या कीटोजेनिक डायट की जरूरत पड़ती है।

5) दौरे को समझें- ध्यान रखें कि आपका बच्चा समय पर सो रहा है और पर्याप्त नींद ले रहा है या नहीं। मिर्गी से पीड़ित बच्चों में नींद की कमी दौरे का सबसे कॉमन कारण है। पहचान करें और समझें बच्चे को किस वजह से दौरा आता है। इसका अन्य कारण रोजाना दवा ना लेना, बुखार, फोटोसेंसिटिविटी आदि भी हो सकता है। कुछ मामलों में बच्चों को चमकती रोशनी से दौरा पड़ सकता है जिसे फोटोसेंसिटिविटी कहते हैं।

Read this in English

अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

Add The Health Site as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source