Adenoids के मरीज़ों को क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?

जंक फ़ूड और मसालेदार चीज़ों से आपको परेशानी या एलर्जिक रिएक्शन दिख सकते हैं।

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Written By: Editorial Team | Published : February 1, 2017 12:54 PM IST

कंठशूल या ऐडनॉइड्ज़ छोटे बच्चों को होनेवाली एक आम समस्या है। अक्सर टॉन्सिल बढ़ने के नाम पर बताई जानेवाली यह समस्या काफी गंभीर नहीं मानी जाती। लेकिन जब यह समस्या उभरती है तो लोगों को रात में सोने में तकलीफ, खाने-पीने की चीज़ों से एलर्जी, गले से खून बहने और बहुत अधिक दर्द या सूजन जैसी परेशानियां होती हैं। हमने बात की श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टिट्यूट, नई दिल्ली के कंसल्टेंट पीडियाट्रिक और पल्मनोलॉजिस्ट डॉ. जसमीत के. वाधवा से जिन्होंने बताया खाने पीने की उन चीज़ों की पहचान में जिनकी वजह से बढ़ सकती है आपके बच्चे के गले की तकलीफ।

कंठशूल और उसके खतरों की पहचान

ऐडिनॉइड लसीकावत तालू के पीछे स्थित टिश्यूज़ हैं। यह एक साधारण लेकिन महत्वपूर्ण संरचना है जो बीमारियों से रक्षा प्रदान करती है। वायरल, बैक्टीरियल इन्फेक्शन या एलर्जी होने पर इनमें सूजन आ जाती है। जिसकी वजह से आपको सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और बच्चे को खर्राटे, बंद नाक या बार-बार ऊपरी अपर रेस्परटोरी इंफेक्शन (upper respiratory infections) हो सकता है। एलर्जी वाली चीज़ों या वायरल इंफेक्शन के सम्पर्क में बार-बार आने से यह एक क्रोनिक समस्या बन सकती है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है।

यह समस्या 2-4 साल के बच्चों में आमतौर पर देखी जाती है और कंठशूल की वजह से अनिद्रा, सोते वक़्त सांस लेने में तकलीफ, खर्राटे और बार-बार नींद टूटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ चबाने, निगलने या बात करने में होनेवाली परेशानियों से इसकी पहचान की जा सकती है। अगर वायरल इंफेक्शन के समय बच्चा ऐसी कोई चीज़ खाता है जिससे कंठशूल के बैक्टेरिया बढ़ते हैं तो आपके बच्चे के गले की स्थिति और बिगड़ सकती है। बैक्टेरिया की मौजूदगी के आधार पर यह स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगती है। लेकिन कुछ मामलों में गंभीर बैक्टेरियल इंफेक्शन हो सकता है।

कंठशूल के दौरान खान पान का रखे इस तरह से ध्यान-

  • जब सर्जरी करके ऐडिनॉइड को निकाला जाता है तो हो सकता है कि गले के निचले हिस्से में कुछ घाव रह जाएं। इसीलिए घावों को जल्दी भरने के लिए तरल और नरम चीजे खाएं।
  • नारियल पानी, सेब का जूस, पानी, ब्रॉथ और फ्लेवर्ड ड्रिंक मिक्स से शुरुआत कर सकते हैं। बहुत गर्म पेय पदार्थ न लें और अपने बच्चे को छोटे-छोटे टुकड़ों में खाने और बार-बार पानी पीने की आदत अपनाने के लिए कहें। इस तरह वह डिहाइड्रेशन से बच सकेगा।
  • बच्चा जो भी खाना खाये वह संतुलित होना चाहिए। यानि ध्यान रखें कि उसके खाने में कार्बोहाइड्रेट, फैट्स और प्रोटीन शामिल हों। बच्चे को मसले हुए आलू, अंडा भुर्जी, क्रीम सूप, दही और पके हुए सेरेल्स जैसी कुछ नरम चीज़े खाने के लिए दें। तरल और नरम चीज़ों के मिश्रण से अपने बच्चे को संतुलित आहार प्रदान करें।
  • खट्टे फलों के जूस और छास जैसी चीज़ों से एलर्जी हो भी सकती है और नहीं भी। अगर मरीज़ को खट्टी चीज़ों से परेशानी या एलर्जी होती है तो उसे ख़राब गले, दर्द या निगलने में परेशानी हो सकती है। ऐसे समय में जंक फ़ूड और मसालेदार चीज़ों से भी आपको काफी परेशानी हो सकती है या एलर्जिक रिएक्शन दिख सकते हैं।
  • ऐसे बच्चे जिन्हें बार-बार सर्दी और खांसी होती है उन्हें चिप्स, ड्राईफ्रूट्स जैसी कड़क और कुरकुरी चीज़ें नहीं खानी चाहिए, क्योंकि इनसे गले में परेशानी और खिचखिच जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

ऐडिनॉइड से राहत के घरेलू उपाय

बढ़े हुए टॉन्सिल और ऐडिनॉइड के लिए आमतौर पर जो घरेलू नुस्खे अपनाए जाते हैं वे इस प्रकार हैं-

  • मौसमी सब्ज़ियां जैसे चुकंदर, ककड़ी और गाजर को मिक्सी में एकसाथ पीसें। इसमें थोड़ा सा नींबू का रस मिलाकर बच्चे को पीने के लिए दें। यह हेल्दी जूस बच्चे की रोगप्रतिरोधक शक्ति बढ़ाएगा और इंफेक्शन से भी फ्री रखेगा।

  • शहद भी एक अच्छा उपाय है जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टेरियल तत्व होते हैं। रोज़ाना शहद के सेवन से ऐडिनॉइड से जुड़ी परेशानियां जैसे सूजन और दर्द से राहत मिलती है।

  • एक गिलास गर्म दूध में चुटकीभर काली मिर्च और हल्दी पावडर पीने से सूजन दूर होती है और बच्चे को गले-छाती में जकड़न से राहत मिलती है।

  • यह भी कहा जाता है कि तेज़पत्ता (sage) और एकिनिसिया (Echinacea) जैसी जड़ी-बूटियां भी सूजन कम करने में मदद करती हैं। यह शरीर की रोग-प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाकर इंफेक्शन से भी बचाती हैं। ताज़ी कूटी अदरक और शहद का मिश्रण दो चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेने से भी राहत मिलती है।

  • सर्ज़री के बाद कोशिश कीजिए कि आपका बच्चा कोई दवा या गोली न खाए। बच्चे को बार-बार छिड़ककर नाक साफ करने से भी मना करें। साथ ही उसे बहुत गहरे या तेज़ी से गरारे करने से भी मना करें।

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अनुवादक-Sadhna Tiwari

चित्रस्रोत- Shutterstock.

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