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World TB Day-DOTS और tuberculosis को संभालने के 5 बेसिक उपाय।

अगर आप डॉक्टर के निर्देश अनुसार दवाइयां खाते रहेंगे तो टीबी 6 महीने के भीतर पूरी तरह (लगभग 100% तक) ठीक हो सकता है।

प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो के अनुसार भारत में टीबी ट्यूबरक्लोसिस (tuberculosis) भारत में संसर्गजन्य या एक से दूसरे व्यक्ति तक फैलने वाली ऐसी बीमारी है जिसकी वजह से सबसे अधिक मौतें होती हैं। जहां प्रतिदिन 1,000 लोगों की मौत या हर 3 मिनट में 2 लोगों को फेफड़ों से जुड़ी इस बीमारी के शिकार होने के दावे किए जाते हैं। वहीं हमारे देश में प्रतिवर्ष 2.2 मिलियन या लगभग 2 करोड़ बीस लाख टीबी के मामले देखे जाते हैं। ऐसा अनुमान भी लगाया जा रहा है कि 3.5 मिलियन या लगभग 3 करोड़ 50 लोग ऐसे हैं जिनके शरीर में टीबी के बैक्टेरिया मौजूद हैं। हालांकि डॉट्स (DOTS) की मदद से भारत में टीबी के मरीज़ों की संख्या में काफी कमी आयी है। लेकिन इससे पहले कि आप पूछें कि डॉट्स क्या है, हम आपको टीबी से जुड़ी कुछ और बातें भी बताते हैं जो आपके लिए जानना ज़रूरी है।

टीबी के इलाज का कोर्स पूरा करना क्यों ज़रूरी है?

टीबी के लक्षण सामान्यतः उपचार शुरू करने के कुछ हफ्तों के भीतर ठीक होने लगते हैं और कई मरीज़ दवाओं का अपना कोर्स पूरा नहीं करते और दवाएं लेना बीच में ही बंद कर देते हैं। भले ही आप पहले से बेहतर महसूस कर रहे हों। लेकिन किसी भी मरीज़ को दवाइयां बीच में बंद नहीं करनी चाहिए, क्योंकि टीबी के बैक्टेरिया अभी भी आपके शरीर में मौजूद होते हैं और उनके दोबारा सक्रिय होने की सम्भावनाएं भी बहुत अधिक होती हैं। इसीलिए, आपकी दवाओं का पूरा कोर्स करना टीबी के इलाज के लिए आवश्यक है। अगर आप डॉक्टर के निर्देश अनुसार दवाइयां खाते रहेंगे तो टीबी 6 महीने के भीतर पूरी तरह (लगभग 100% तक) ठीक हो सकता है। जो मरीज़ अपने टीबी के इलाज का पालन अनियमित और अविश्वसनीय तरीके से करते हैं, उनकी ट्रीटमेंट नाकामयाब होने, बीमारी के दोबारा उभरने शरीर में विभिन्न दवाइयों के प्रतिरोध की क्षमता का निर्माण होने का खतरा होता है। जिसके चलते टीबी की मानक दवाइयां को बेअसर करती हैं और आपकी टीबी की बीमारी का उपचार कठिन और महंगा बन जाता है।

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डॉट्स (DOTS) क्या है?

डायरेक्टली ऑब्जर्वड ट्रीटमेंट, शॉर्ट कोर्स यानि डॉट्स (DOTS– Directly Observed Treatment, Short-Course) विश्व स्वास्थ्य संगठन या वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) द्वारा मान्य टीबी की रोकथाम की एक मुहिम है। डॉट्स की मदद से 6-8 महीनों में टीबी के पूर्ण इलाज की कोशिश की जाती है। यह हमारे देश के सभी सरकारी अस्पतालों में मरीज़ों को मुफ्त में मुहैया करायी जाती है। भारत में, संशोधित राष्ट्रीय टीबी नियंत्रण कार्यक्रम (Revised National TB control programme -RNTCP) नें डॉट्स को टीबी की रोकथाम की पूरी ज़िम्मेदारी दी है। इसी तरह डॉट्स ने मल्टी-ड्रग रेज़िस्टेंस ट्यूबरक्लोसिस ( multi-drug resistant tuberculosis -MDRTB) की घटनाओं को रोकने में भी सफल रहा है। यह टीबी की सम्भावना वाले लोगों में एमडीआरटीबी की प्रवृत्ति को भी कम करता है और एचआईवा पॉजिटीव मरीज़ों की टीबी का भी इलाज कर सकता है।

डीओटीएस (DOTS) के 5 बुनियादी घटक हैं –

#1 राजनीतिक इच्छाशक्ति

राष्ट्रीय स्तर से लेकर शहरों, जिलों, गांवों और कस्बों तक इस कार्यक्रम के प्रचार और प्रसार की ज़िम्मेदारी लेना, और इसके लिए आवश्यक आर्थिक, कानूनी, मानव संसाधन, प्रबंधन और प्रशिक्षण सम्बंधी मदद करना ताकि इस कार्यक्रम को सफल बनाया जा सके।

#2 सही जांच की मदद से मरीज़ का पता लगाना

स्पूटम स्मियर माइक्रोस्कोपी (Sputum smear microscopy) और फिर उसके बाद कल्चर एंड ड्रग ससेप्टबिलटी टेस्टिंग ((culture and drug susceptibility testing-DST) की जाती है। यह टीबी के मरीज़ की पहचान का सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किया जानेवाला तरीका है। साथ ही अच्छे प्रशिक्षित कर्मियों और उचित सुसज्जित प्रयोगशालाओं या लैब्स की आवश्यकता भी पड़ती हैं।

#3 सही इलाज के लिए उन्नत तरीकों का इस्तेमाल

मरीज़ों की स्थिति और आवश्यक उपचार के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन की निर्देशों के आधार पर देशभर में मानक स्तर की उपचार प्रक्रिया अपनायी जाती है। सुपरवाइज़्ड ट्रीटमेंट जो कि डॉट्स प्रोग्राम का मुख्य भाग है, उसमें डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन ऑफ थेरेपी (direct observation of therapy -DOT) भी शामिल होती है। जहां मरीज़ अस्पताल के चिकित्सक या प्रशिक्षित व्यक्ति के सामने दवाइयां खाता है। इससे मरीज़ नियमित रुप से दवाइयां खाता है और इलाज पूरा होता है।

#4 दवाइयां उपब्ध कराने के लिए सही प्रबंधन

अच्छी गुणवत्ता वाली दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए एक अच्छी और बिना रूकावट वाली वितरण व्यवस्था टीबी के नियंत्रण के लिए बहुत आवश्यक है। जिसकी मदद से मरीज़ों को आवश्यक और मुफ्त दवाइयां उपलब्ध कराया जा सकती हैं।

#5 निगरानी और रिपोर्टिंग

कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सिस्टम की निरंतर निगरानी भी आवश्यक है। औसतन, 1.25 लाख से अधिक रोगियों का हर महीने भारत के डीओटीएस कार्यक्रम के तहत इलाज किया जाता है। देस के 531 जिलों में से, 446 जिलों में राष्ट्रीय क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम या नेशनल ट्यूबरक्लोसिस कंट्रोल प्रोग्राम (National Tuberculosis Control Programme) के तहत कवर किया जाता है। इनमें से 292 जिले शॉर्ट कोर्स किमोथेरेपी (Short Course Chemotherapy-SCC) जिले हैं। यह इलाज की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें 6-8 महीनों की अवधि में दो हिस्सों- इंटेसिव फेज (Intensive phase) और कन्टिन्यूएशन फेज़ (Continuation phase) में पीड़ित व्यक्ति का इलाज किया जाता है। टीबी के रोकथाम में मदद करने वाली दवाइयां हैं- स्ट्रेप्टोमाइसिन (Streptomycin-S), आइसोनियाजिड (Isoniazid-H), एथम्बूटोल (Ethambutol-E), रिफाम्पिसिन (Rifampicin-R) and पायराजिनामाइड (Pyrazinamide-Z).

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock.

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