वजन घटाने सहित इस कमाल के फल के हैं ये बड़े फायदे

अगर आपको डायरिया या पेट संबंधी शिकायत रहती है तो, बेल ज़रूर ट्राई करें!

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:32 AM IST

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अनुवादक – Usman Khan

बेल (Bael) या बेलपत्थर या बिल्व एक फल है। इसे बंगाल श्री फल, बेल फल और वुड एप्पल भी कहते हैं। भारत में इसका इस्तेमाल भगवान शिव की पूजा और विभिन्न धार्मिक कर्मकांडों में किया जाता है। इसके अलावा इसका उपयोग विभिन्न औषधीय कार्यों के लिए भी किया जाता है। पढ़ें- पहाड़ी पुदीने के चंद पत्तों से आपकी सेहत को होते हैं ये बड़े फायदे

स्वास्थ्य लाभ

इसके कसैले ( astringent) गुण की वजह से इसका इस्तेमाल डायरिया के इलाज की लिए किया जाता है। हालांकि पकने पर इसमें लैक्सटिव (laxative) गुण पाए जाते हैं। इस जड़ी बूटी का आंत से कीड़े निकालने के लिए एक कृमिनाशक के रूप में प्रयोग किया जाता है। पेट दर्द से पीड़ितों के लिए बेल कार्मिनटिव (carminative) और ऐन्टीस्पैज़्माडिक (antispasmodic) के रूप में काम करता है। बेल की जड़ों का एंटी-इन्फ्लैमटोरी प्रभाव पड़ता है और इसके पत्तों का सिद्ध (Siddha) चिकित्सा में पाचन समस्याओं और तपेदिक के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। बेल को मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों में वजन घटाने के लिए प्रभावी माना जाता है।

उपयोग कैसे करें

बेल पाउडर और कैप्सूल व्यावसायिक रूप से उपलब्ध हो जाते हैं।

सक्रिय तत्व

बेल में अल्फा पाइनीन (alpha pinene), लाइमीन ( limonene), कैर्योफायलेन (caryophyllene) और अल्फा फेलेनड्रेन (phellandrene) यौगिक शामिल होते हैं। इसके अलावा इसमें फ़्लवोनोइड्स (Flavonoids), टैनिन (tannins), कौमरिंस (coumarins), स्टेरोल (sterols) और एल्कलॉइड(alkaloids) भी पाए जाते हैं।

साइड इफ़ेक्ट

आमतौर पर बेल का इस्तेमाल सुरक्षित है। हालांकि उच्च खुराक, लंबे समय तक इस्तेमाल से पेट या कब्ज की समस्या हो सकती है।

चित्र स्रोत - Shutterstock

संदर्भ: Maity P, Hansda D, Bandyopadhyay U, Mishra DK. Biological activities of crude extracts and chemical constituents of Bael, Aeglemarmelos (L.) Corr. Indian JExp Biol. 2009 Nov;47(11):849-61. Review. PubMed PMID: 20099458.

2 VermaRS, Padalia RC, Chauhan A. (2014).Essential oil composition of Aeglemarmelos(L.) Correa: Chemotypic and seasonal variations. J. Sci. Food Agric., 94: 1904–1913


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