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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:22 AM IST
Menopause brings with it a horde of pains and problems. The good news is that you can easily deal with it with the right foods. Dr Swati Dave, Ex-Senior Dietitian & Nutritionist Shalby Hospitals, Ahmedabad tells you simple dietary tips to relieve menopausal symptoms.
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अनुवादक -Mousumi Dutta
शायद ये बात सभी को पता है कि मेनोपॉज़ या रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं। ये इसलिए होता है क्योंकि ओवरीज़ या अंडाशय ओवा या अंडाणु का उत्पादन करना बंद कर देते हैं,जिसके कारण शरीर में तरह-तरह के हार्मोनल फ्लक्चूएशन होने शुरू हो जाते हैं। शरीर में इस तरह के परिवर्तन के कारण बहुत सारे रोगों के होने की संभावना बढ़ जाती है। डॉ. नूपुर गुप्ता, गाइनाकॉलोजिस्ट और ऑब्सट्रेसियन, वेल वुमन क्लिनिक, गुड़गांव का कहना है कि वैसे तो मेनोपॉज़ के बाद डाइबिटीज़ होने का कोई सीधा संबंध होने का प्रमाण तो नहीं मिलता है लेकिन उम्र के इस चरण में हाई ब्लड प्रेशर और वज़न के बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसी आधार पर मेनोपॉज़ के बाद डाइबिटीज़ होने का भी चांस बढ़ जाता है।
मेनोपॉज़ के बाद एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरॉन हार्मोन का उत्पादन होना अचानक रूक जाता है जो मासिक धर्मचक्र को नियंत्रित करने में अहम् भूमिका अदा करता है। अचानक इस हार्मोन में बदलाव आने के कारण शरीर में ब्लड शुगर के लेवल में उतार-चढ़ाव आता है साथ ही वह सेल्स भी इन्सुलिन से प्रभावित होने लगते हैं जो हार्मोन ब्लड-शगुर लेवल को नियंत्रित करते थे।
इस उम्र में आप निष्क्रिय लाइफस्टाइल जीना चाहेंगे क्योंकि आप पहले से आलसी हो जायेंगे और आपका फिटनेस लेवल कम हो जायेगा। अगर आप वर्किंग वुमन है तो घर पर रहने पर अवसाद में घिर जायेंगे। पचास के दहलीज़ तक पहुंचते-पहुंचते अधिकतर महिलाओं के कम और नितंभ के आस-पास फैट जमने लगता है। ये इसलिए होता है मेनोपॉज़ के दौरान आप प्रोटीन युक्त खाद्द के जगह पर फैट युक्त खाद्द ज्यादा खाने लगते हैं। इन सबके कारण ब्लड-ग्लुकोज़ लेवल में उतार-चढ़ाव आने लगता है और डाइबिटीज़ होने का खतरा बढ़ जाता है। ये खतरा और भी बढ़ जाता है अगर आप हाइपरटेंशन के ज्यादा ग्रस्त हो जाते हैं। और ये सारे चक्र मिलकर डाइबिटीज़ होने का खतरा और भी बढ़ा देते हैं।
इसलिए अगर आप मेनोपॉज़ के बाद डाइबिटीज़ होने का खतरा कम करना चाहते हैं तो हेल्दी डायट और एक्टिव लाइफस्टाइल को अपनायें। साथ ही जैसे ही आप 50 के दहलीज़ पर कदम रखें नियमित रूप से अपना ब्लड शुगर टेस्ट करवाते रहें।
चित्र स्रोत- Shutterstock