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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:29 AM IST
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अनुवादक - Shabnam Khan
मैं 20 वर्षीय युवती हूं। चलते हुए मेरा पैर मुड़ गया था। हालांकि उस वक्त मुझे दर्द नहीं हुआ था लेकिन शाम को दर्द होना शुरू हो गया और मेरा टखना सूज गया। मेरी एक आंटी का कहना है कि मुझे ठंडी सिकाई करनी चाहिए जबकि एक रिश्तेदार ने कहा है कि गर्म सिकाई करूं। मुझे क्या करना चाहिए? मुझे नहीं मालूम कि मुझे कब ठंडी सिकाई करनी चाहिए या कब गर्म। कृपया मेरी मदद करें।
गर्म सिकाई और ठंडी सिकाई दर्द दूर करने का नैचुरल तरीका है, लेकिन आपके लिए कौन-सा तरीका ठीक है ये आपके दर्द और चोट पर निर्भर करता है। आपके मामले में, ठंडी सिकाई की जानी चाहिए क्योंकि अचानक आई मोच से जलन होती है जो बाद में जाकर सूजन में बदल जाती है। इसलिए ठंडी सिकाई करने से इस स्थान का ब्लड फ्लो धीमा हो जाएगा और जलन व सूजन रूक जाएगी। लेकिन ध्यान रखें मोच आने के 24-48 घंटों के बीच ही कोल्ड पैक यानी ठंडी सिकाई का इस्तेमाल करना चाहिए, तभी जलन व सूजन से राहत मिलेगी। (ठंड में पैर सूज जाएं, तो अपनाएं ये 6 उपाय)
ठंडी सिकाई करते हुए इन बातों को ध्यान रखें
कब करें गर्म सिकाई
अगर दर्द किसी पुरानी चोट का हो तो उसे दूर करने में गर्म सिकाई मदद करती है। जब पुरानी चोट का ब्लड सर्कुलेशन किसी तरीके से रूक जाए तो गर्म सिकाई से वो फिर से शुरू हो जाता है। इससे मसल्स का दर्द दूर होता है।
गर्म सिकाई के दौरान याद रखने वाली बातें:
चित्र स्रोत - Shutterstock