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एक अच्छे psychologist की इन 6 बातों से करें पहचान

अगर आप किसी साइकोलोजिस्ट से काउंसलिंग का प्लान बना रहे हैं, तो एक बार ये आर्टिकल जरूर पढ़ लें

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:43 AM IST

भारत में बहुत कम लोग ही नियमित रूप से काउंसलिंग के लिए किसी साइकोलोजिस्ट या साइकोथेरेपिस्ट के पास जाते हैं। वास्तव में यहां बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं कि अगर वो परामर्श के लिए किसी साइकोलोजिस्ट के पास जाएंगे, तो लोग उसके बारे में कुछ गलत सोच सकते हैं। पर्सनल या प्रोफेशनल लाइफ में ऐसे कई मुद्दे होते हैं जिनसे निपटने के लिए आपको किसी साइकोलोजिस्ट से परामर्श लेना पड़ता है। आज के इस भाग-दौड़ भरे जीवन में चिंता और तनाव आम बात है। जाहिर है काउंसलिंग के बाद साइकोलोजिस्ट आपको मानसिक और भावनात्मक मुद्दों से निपटने के लिए कुछ दवाओं या काग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (CBT) की सलाह दे सकता है। अब सवाल यह है कि आपको किसी बेहतर साइकोलोजिस्ट के बारे में कैसे पता चलेगा? हो सकता है इसके लिए आप किसी फ्रेंड, फैमिली मेंबर से पता करें या ऑनलाइन सर्च करें। खैर, हम आपको छह ऐसी बातें बता रहे हैं जिनके जरिए आप इस बात का आसानी से पता लगा सकते हैं कि आपका साइकोलोजिस्ट बेहतर है या नहीं।

1) विश्वसनीयता

कई लोग अपनी मेंटल हेल्थ को लेकर काउंसलिंग से दूर भागते हैं। क्योंकि उन्हें किसी अजनबी के साथ अपनी समस्यायों को साझा करने में डर लगता है। अध्ययन में पाया गया है कि लोग किसी से मिलने के बाद कुछ सेकंड में ही यह तय कर लेते हैं कि वो भरोसेमंद है या नहीं। इसलिए साइकोलोजिस्ट से अपनी पहली मीटिंग के दौरान अलर्ट रहें और ऑब्जर्व करें।

2) आपकी बातों में रूचि ले

एक अच्छा साइकोलोजिस्ट एक अच्छा लिस्टनर होना चाहिए। उसे आपकी बातों में रूचि लेनी चाहिए। उसे आपकी बात सुनकर करुणा और सहानुभूति प्रदर्शित करनी चाहिए। अगर आपको लगता है कि वो आपकी बातों से बोर हो रहा है या उसे आपसे बात करने में परेशानी हो रही है, तो इसका मतलब है कि आप अपना समय बर्बाद कर रहे है।

3) रिसर्च को लेकर अप टू डेट रहे

हालांकि यह जानना आपके लिए थोड़ा मुश्किल है कि आपका साइकोलोजिस्ट लेटेस्ट रिसर्च को लेकर अप टू डेट है या नहीं। लेकिन उससे उसकी क्वालिफिकेशन और एक्सपीरियंस पूछने में आपको घबराना नहीं चाहिए। पता करें कि वो किस चीज में स्पेशलिस्ट है और आपके इलाज के लिए उसका क्या प्लान है। उसके पास किसी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से साइकोलोजी में डिग्री है या नहीं। जर्नल और अर्टिकल पढ़कर अपनी रिसर्च करें जिससे आप अपॉइंटमेंट के लिए तैयार हो सकें।

4) वो निर्णायक न हो

यह जरूरी है कि आप अपनी थेरेपी सेशन में सुरक्षित महसूस करें। आपका मनोवैज्ञानिक निष्पक्ष हो सकता है और वो आपके विचारों और भावनाओं को लेकर किसी निर्णायक की भूमिका नहीं निभाता है। एक अच्छा साइकोलोजिस्ट चीजों में संतुलन बनाकर रखता है और आपको यह महसूस नहीं होने देता कि वो आपसे जीतने या अपना फैसला आप पर थोपने की कोशिश कर रहा है।

5) इलाज के बारे में आपसे बात करे

याद रखें कि सभी का इलाज एक तरह नहीं होता है। प्रारंभिक परामर्श के बाद एक बार जब आपका साइकोलोजिस्ट आपका इलाज करना शुरू कर देते तो, उसको यह बताना चाहिए कि वो कैसे किया जाएगा और उससे आपको कैसे मदद मिलेगी। उसे अपनी बातों से आपको संतुष्ट करना चाहिए।

6) वो अपना फीडबैक भी दे

उपचार के दौरान अगर आपको किसी तरह की कोई चिंता या परेशानी होती है, तो आपके साइकोलोजिस्ट को आपकी बातें सुनानी चाहिए। आपको अपनी बातों को खुलकर उसके सामने रखना चाहिए कि कौन से चीज क्या है और कौन सी चीज आपके लिए काम नहीं कर रही है। अगर आपको लगता है कि आपके साइकोलोजिस्ट आपकी समस्यायों को सुलझाने के लिए आंख बंद करके तय नियमों के अनुसार काम कर रहा है, तो यह अच्छा संकेत नहीं है।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock