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इन वजहों से हफ़्ते भर बाद भी खत्म नहीं होते पीरियड्स

पीरियड्स के अधिक समय तक चलने की समस्या यूटरस में किसी बदलाव या हार्मोन्स के असंतुलन का संकेत हो सकता है।

पीरियड्स हर महीने एक निश्चित समय के आसपास आते हैं जो 7 दिन (कुछ लड़कियों को 5 या 3 दिन) से अधिक नहीं चलते। लेकिन, कई बार ये साधारण से अधिक अवधि के लिए आते हैं, जिसका मतलब है कि आपके शरीर में सबकुछ सही नहीं है। इसे मेनोर्रागिया (menorrhagia), के तौर पर भी जाना जाता है। पीरियड्स के अधिक समय तक चलने की यह समस्या यूटरस में किसी प्रकार के बदलाव या हार्मोन्स के असंतुलन का संकेत है जिसे नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। इसलिए ऐसी स्थिति में किसी गाइनकोलॉजिस्ट से बात करना ठीक होगा, ताकि इस समस्या के सही कारण का पता लगाया जा सके और उसका इलाज किया जा सके। गाइनकलॉजिस्ट और आब्स्टिट्रिशन डॉ. नुपुर गुप्ता (वेल वूमेन क्लिनिक गुडगांव), बता रही हैं महिलाओं में मेनोर्रागिया या अधिक समय तक पीरियड्स चलने की समस्या के विभिन्न कारणों के बारे में। घरेलू नुस्खे अनियमित पीरियड्स की समस्या से राहत के लिए ज़रूर आज़माने चाहिए!

1. डिस्फंक्शनल ब्लीडिंग (Dysfunctional bleeding) - इसे गर्भाशय से असामान्य रक्तस्राव या अब्नॉर्मल यूटरीन ब्लीडिंग (abnormal uterine bleeding) के तौर पर जाना जाता है, यह शरीर में हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है। ज्यादातर मामलों में, यह एक एनोवुलेटरी साइकल (anovulatory cycle) का संकेत देता है, जो एक ऐसी अवस्था जिसमें ओवरीज़ एग का उत्पादन नहीं कर पाती हैं, लेकिन गर्भाशय से रक्तस्राव होता है। यह प्रजनन करने में सक्षम उम्र यानि मुख्य रूप से 18 साल से 35 वर्ष की महिलाओं में देखा जाता है।

2. ब्लीडिंग डिसॉर्डर (Bleeding disorders)- यह समस्या अक्सर किशोरावस्था या व्यस्क अवस्था में देखी जाती है। ब्लीडिंग डिसॉर्डर का पता लगाने के लिए आपका डॉक्टर आपको ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकता है। कुछ मामलों में पेट के निचले हिस्से का अल्ट्रासाउंड (ultrasound) कराने की भी सलाह दे सकते हैं ताकि यूटरस (uterus) में हो रहे बदलावों का पता लगाया जा सके। इसीलिए अगर मेनार्क (menarche) के बाद आपके पीरियड्स भी 7 दिन से अधिक समय तक रहते हैं किसी डॉक्टर से बात करें। अगर आपको ब्लीडिंग डिसॉर्डर होने की बात पता चलती है तो इसकी वजह आयरन और विटामिन्स की कमी हो सकती है। ऐसे में, आपको अपनी स्थिति में सुधार करने के लिए मल्टीविटामिन की सलाह और नुस्खा दिया जा सकता है।

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3. थायरॉइड- जी हां, लम्बे समय तक पीरियड्स चलने का मतलब थायरॉयड हार्मोन्स के निचले स्तर तक पहुंचने से हो सकता है। इसीलिए, अगर आपको हाइपोथायरायडिज्म (hypothyroidism) या थायरॉइड है तो अपने डॉक्टर से जांच कराकर इसका इलाज कराएं। हो सकता है कि यह दवाइयों की वजह से हार्मोन्स के स्तर में बदलाव के कारण हुआ हो। थायरॉइड रोग का इलाज करने के लिए, आपका डॉक्टर आपको खून की जांच कराने की सलाह भी दे सकता है।

4. हाइपरप्रोलेक्टिनेमिया- प्रोलैक्टिन की अधिक मात्रा की वजह से होनेवाली यह समस्या होती है। प्रेगनेंसी के दौरान ब्रेस्ट के विकास के लिए प्रोलैक्टिन हार्मोन्स (prolactin hormone) की आवश्यकता पड़ती है, जो नवजात बच्चे की मां के दूध बनने के लिए भी मददगार है। हाइपरप्रोलेक्टिनेमिया (Hyperprolactinemia) प्रेगनेंसी के समय होनेवाली एक साधारण समस्या है। हालांकि अगर किसी वजह से प्रेगनेंसी खत्म हो जाती है और आपके पीरियड्स लम्बी अवधि तक रहते हैं, तो जांच की मदद से पता लगाएं कि आपको हाइपरप्रोलेक्टिनेमिया तो नहीं है। यह समस्या तनाव, कुछ विशेष दवाइयों के सेवन, किडनी से जुड़ी बीमारियों और ट्यूमर की वजह से भी होती है।

5. पेरीमेनोपॉज- भारतीय महिलाओं में मेनोपॉज़ का समय 47–51 वर्ष की उम्र होती है। लेकिन कुछ महिलाओं में इस समय से पहले मेनोपॉज़ या पेरीमेनोपॉज (perimenopause) की सम्भावना अधिक होती है। इसीलिए 40–45 वर्ष की उम्र में 7 दिन से अधिक समय तक पीरियड्स की समस्या होती है तो यह पेरीमेनोपॉज का संकेत हो सकता है। यही नहीं, मेनोपॉज़ के सालभर बाद अगर आपको पोस्टमेनोपॉज़ल ब्लीडिंग (postmenopausal bleeding) होती हैं, तो आपको इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। आपका डॉक्टर आपको कैंसर की सम्भावना जानने के लिए एंडोमेट्रियल बायोप्सी (endometrial biopsy) का सुझाव दे सकता है।

6. यूटरीन फाइब्रॉएड और पॉलीप्स- अधिक अवधि तक पीरियड्स चलने का एक और कारण गर्भाशय या यूटरस में फाइब्रॉएड (Uterine fibroids) की समस्या हो सकती है। यह गर्भाशय में सौम्य मांसपेशियों की चिकनी वृद्धि होती है, जो कैंसर का ख़तरा भी पैदा करती हैं। जबकि दूसरी तरफ यूटरीन पॉलीप्स (uterine polyps) एंडोमेट्रियल लाइनिंग में कोशिकाओं की अतिरिक्त वृद्धि होती है, आमतौर पर इनकी प्रकृति कैंसर को बढ़ावा देनेवाली नहीं होती। साथ ही, सर्विक्स में सूजन की पुरानी समस्या जिसे सर्वाइकल इरोश़न (cervical erosion) कहते हैं, उसके चलते भी लम्बी अवधि के पीरियड्स हो सकते हैं।

7. कैंसर- एक आखिरी वजह, सर्वाइकल कैंसर (cervical cancer) भी हो सकती है, जिसके चलते 45 की उम्र के बाद आपको सप्ताहभर से अधिक समय के लिए पीरियड्स हो सकते हैं। इसीलिए, आपकी गाइनकलॉजिस्ट आपको अल्ट्रासाउंड या पैप स्मियर टेस्ट करा उसकी मदद से यूटरस और सर्विक्स में होनेवाले इस कैंसर का पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं। कुछ मामलों में, हिस्टोरोस्कोपी (hysteroscopy- एक प्रक्रिया जिसमें एक एन्डोस्कोप को गर्भाशय गुहा या यूटरीन कैविटी (uterine cavity) की जांच के लिए उपयोग किया जाता है) की भी सलाह एक सुरक्षित तरीके के तौर पर दी जाती है।

इसीलिए अगर आपके पीरियड्स हफ्तेभर से अधिक (खून के धब्बे या स्पॉटिंग के बगैर भी) रहते हैं तो, बेहतर है कि आप किसी गाइनकलॉजिस्ट, से सलाह-मशविरा करें। इस तरह कैंसर या अन्य अन्य सामान्य स्त्रीरोग समस्याओं का पता लगाया जा सकेगा।

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अनुवादक-Sadhana Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock.

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