दिल की धड़कन तेजी से बढ़ने (tachycardia) के कारण

जानिए हार्ट रेट 100 बीट्स प्रति मिनट से ज्यादा क्यों हो जाती है

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:43 AM IST

नॉर्मल हार्ट रेट 60-90 बीट्स प्रति मिनट होती है। अगर हार्ट रेट बढ़कर 100 बीट्स प्रति मिनट से ज्यादा हो जाती है, तो इस स्थिति को टैकीकार्डिया (tachycardia) कहते हैं। अगर आप किसी ह्रदय रोग से पीड़ित हैं, तो इससे हार्ट का इलेक्ट्रिक सिस्टम प्रभावित हो सकता है जिससे हार्ट रेट आसामान्य हो सकती है। आपको बता दें कि अगर आप दिल से जुड़ी किसी भी तरह की परेशानी से पीड़ित नहीं हैं, तो भी हार्ट के इलेक्ट्रिक सिंग्लिग में खराबी होने से आप टैकीकार्डिया से पीड़ित हो सकते हैं। मुंबई स्थित एशियन हार्ट इंस्टीट्यूट में कंसल्टेंट कार्डियोलॉजी और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी डॉक्टर संतोष डोराआपको टैकीकार्डिया के कारण बता रहे हैं।

1) ऑटोमैटिसिटी (Automaticity)- हार्ट रेट इलेक्ट्रिक इम्पल्स हैं जो हार्ट की पम्पिंग को कंट्रोल करती हैं। इसलिए हर समय आपका दिल पम्प करता और धड़कता है। यह इलेक्ट्रिक सिग्नल्स एक निश्चित मार्ग जिसे एवी नोड कहते के जरिए अपर चैम्बर से लोअर चैम्बर की तरफ जाते हैं। नॉर्मल हार्ट बीट्स 60 से 90 बीट्स प्रति मिनट होती हैं लेकिन जब आप एक्सरसाइज़ करते हैं, तो यह बढ़कर 120/130 बीट्स प्रति मिनट हो जाती हैं जोकि चिंता का कारण नहीं है। कई मामलों में अपर और लोअर चैम्बर की मसल्स बिना किसी कारण हाइपरएक्टिवेटिड हो जाती हैं। इसलिए अपर चैम्बर में हाइपरएक्टिविटी का कारण अट्रियल टैकीकार्डिया (atrial tachycardia) बनता है और लोअर चैम्बर में वेंट्रिकुलर टैकीकार्डिया (ventricular tachycardia)। इस स्थिति में हार्ट रेट 140 बीट्स प्रति मिनट तक पहुंच जाती है।

2) अबनॉर्मल कंडक्टशन- इस मामले में इलेक्ट्रिक इम्पल्स इलेक्ट्रिसिटी पास करने के लिए एक रूट के बजाय दो या उससे अधिक रूट्स लेते हैं। ऐसा आमतौर पर जन्म के बाद या उम्र बढ़ने के मामले में देखा जाता है। इसलिए इलेक्ट्रिक इम्पल्स एक रूट के जरिए लोअर चैम्बर तक जाते हैं और दूसरे रूट के जरिए अपर चैम्बर तक जाते हैं जिससे टैकीकार्डिया का खतरा रहता है।

3) ट्रिगर एक्टिविटी- यह ऑटोमैटीसिटी की तरह है लेकिन इसमें हार्ट रेट किसी बाहरी वजह से प्रभावित होती है। ऐसा दवा या वायरल इन्फेक्शन के कारण हो सकता है, जो हाइपरएक्टिविटी का कारण बन सकते हैं और हार्ट रेट बढ़ सकती है। हालांकि मूल कारणों पर काम करके टैकीकार्डिया का इलाज किया जा सकता है। इसमें एनीमिया, ब्लीडिंग, बुखार, चोट या दर्द, थाइरोटाक्सीकोसिस और इन्फेक्शन शामिल है। थाइरोटाक्सीकोसिस के मामले में इलेक्ट्रिकल इम्पल्स साइनस नोड पर रुक जाती हैं। साइनस टैकीकार्डिया में हार्ट रेट बढ़कर 130 से 140 बीट्स प्रति मिनट हो जाती हैं।

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

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