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Male Hypogonadism के 12 कारण जिनके बारे में पुरुषों को पता होना चाहिए।

क्या आप low testosterone की समस्या से जूझ रहे हैं? इनमें से कुछ हो सकती है आपकी समस्या की वजह।

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:43 AM IST

टेस्टोस्टेरोन (Testosterone), जिन्हें मेल सेक्स हार्मोन्स के तौर पर भी जाना जाता है उनका निर्माण टेस्टिकल्स द्वारा किया जाता है और ये हार्मोन्स एक पुरुष की प्रजनन शक्ति और सेक्सुअल विकास निर्धारित करते हैं। इसके साथ ही यह मसल्स और फैट के वितरण में भी एक अहम भूमिका निभाता है।

ऐसे पुरुष जो लो टेस्टोस्टेरोन (low testosterone) या मेल हायपोगॉनाडिज़्म (male hypogonadism) की समस्या से जूझ रहे हैं वह काफी निराश रहते हैं। इसकी वजह है लो लिबिडो (low libido), इरेक्टाइल डिसफंक्शन (erectile dysfunction), हॉट फ्लैश(hot flashes), लो स्पर्म काउंट(lower sperm count), हेयर लॉस(hair loss), आस्टिओपरोसिस (osteoporosis) और ब्रेस्ट साइज़ में बदलाव। लेकिन एक अच्छी बात है कि टेस्टोस्टेरोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (testosterone replacement therapy) की मदद से मेल हायपोगॉनाडिज़्म से राहत पायी जा सकती है।

मेल हायपोगॉनाडिज़्म के दो प्रकार हैं- प्रायमरी और सेकेंडरी। प्रायमरी हायपोगॉनाडिज़्म या प्रायमरी टेस्टिकुलर फेलियर (primary testicular failure) की शुरुआत टेस्टिकल्स में होती है। सेकेंडरी हायपोगॉनाडिज़्म में से परेशान मरीज़ को हाइपथैलमस या पिटूइटेरी ग्लैन्ड (hypothalamus or the pituitary gland) में समस्या होती है। यह हमारे दिमाग का एक हिस्सा होता है जो टेस्टिकल्स को टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन करने के लिए संकेत देने का काम करता है।

पिछले कुछ समय में छपी कुछ स्टडीज़ में प्रायमरी हायपोगॉनाडिज़्म के जो 6 कारण पाए गए हैं कि वह इस तरह हैं-

1.अविकसित टेस्टिकल्स

अविकसित या अंडिसेंडेड टेस्टिकल (Undescended testicles) एक ऐसी स्थिति है जहां बढ़ते हुए एक बालक के अंडकोष या टेस्टिकल्स, स्क्रोटम(scrotum) में साधारण तरीके से नहीं रह पाते। ऐसी स्थितियों में दोनों टेस्टिकल्स जन्म के समय से अनवतीर्ण या अविकसित स्थिति में नहीं होते। साधारण: यह स्थिति कुछ वर्षों में बिना किसी इलाज के खुद-ब-खुद ठीक हो सकता है। हालांकि, अगर ऐसा नहीं होता या सही समय पर इलाज नहीं किया जाता तो यह टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है जो आगे चलकर या मेल हायपोगॉनाडिज़्म का कारण बन सकता है।

2. हिमोक्रोमटॉसिस

हिमोक्रोमटॉसिस (Hemochromatosis) एक ऐसी स्थिति है जहां शरीर में आयरन की मात्रा अधिक हो जाती है। इसकी वजह से अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचता है और इसके चलते मदद से टेस्टिकल फेलियर (testicular failure or pituitary gland dysfunction) जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

3. टेस्टिकल्स में चोट

बहुत से पुरुषों को खेलकूद के दौरान या किसी दुर्घटना के दौरान टेस्टिकल्स में चोट लग जाती है। चोट लगने के बाद टेस्टिकल्स से टेस्टोस्टेरोन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है जिससे प्रायमरी हायपोगॉनाडिज़्म की समस्या हो सकती है।

4. कैंसर का इलाज

किमोथेरेपी (chemotherapy or radiation) करा रहे मरीज़ों को टेस्टोस्टेरोन और स्पर्म के उत्पादन में समस्या हो सकती है। स्टडीज़ में ऐसा पाया गया है हायपोगॉनाडिज़्म से पीड़ित पुरुषों में से 30% को कैंसर और कुछ मामलों में कैंसर की वजह से होनेवाली इंफर्टिलिटी स्थायी तौर पर हो सकती है। हालांकि कुछ पुरुष किमोथेरेपी के कुछ महीनों बाद ही इससे उबरने में भी सफल हो सकते हैं।

5. मम्प्स ऑर्काइटिस

मम्प्स ऑर्काइटिस (Mumps orchitis) एक प्रकार का इंफेक्शन हो जो टेस्टिकल्स में होता है। यह वायरस या बैक्टेरिया या दोनों की वजह से हो जाता है। जहां मम्प्स का इंफेक्शन केवल एक टेस्टिकल को ही प्रभावित करता है वहीं कुछ मामलों में यह दोनों टेस्टिकल्स पर असर डालता है। यह टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन की प्रक्रिया को बिगाड़ सकता है। परिणामस्वरूप प्रायमरी हायपोगॉनाडिज़्म की संभावना बढ़ जाती है।

6. बुढ़ापा

जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है तो उनके शरीर में कम उम्र के पुरुषों की तुलना में टेस्टोस्टेरोन के उत्पादन का स्तर भी कम होने लगता है। अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ एंडोक्राइनोलॉजिस्टस् (American Association of Endocrinologists) ने अनुमान लगाया है कि 75 की उम्र के बाद के 30% प्रतिशत पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर साधारण से बहुत कम होता है।

जहां इन 6 कारणों को प्रायमरी हायपोगॉनाडिज़्म की मुख्य वजह माना जाता है वहीं ज़्यादातर एंडोक्राइनोलॉजिस्ट के अनुसार सेकेंडरी हायपोगॉनाडिज़्म की मुख्य कारण ये हो सकते हैं-

1. पिट्यूटरी विकार

आपका पिट्यूटरी ग्लैंड हार्मोन्स के उत्पादन के लिए व्यापक रुप से ज़िम्मेदार है और यह सीधे-सीधे दूसरे ग्लैंड्स के विकास और कार्यक्षमता पर असर डालता है। जिससे हायपोगॉनाडिज़्म, कुशिंग डिज़ीज़ (cushing’s disease), पिट्यूटरी विकार या पिट्यूटरी विकार डिसॉर्डर (Pituitary disorders) हो सकती है जो टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्रभावित कर सकता है। इसके अलावा पिट्यूटरी ट्यूमर, ब्रेन ट्यूमर (जो पिट्यूटरी ग्लैंड के बगल में स्थित होता है) भी हायपोगॉनाडिज़्म की वजह बन सकते हैं।

2. जलन और सूजन से जुड़ी बीमारियां

तपेदिक या ट्यूबरक्लॉसिस (टीबी) (tuberculosis) और सारकॉइडोसिस (sarcoidosis) जैसी दाहक या जलन और सूजन से जुड़ी बीमारियां जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों में इन्फ्लैमटॉरी सेल्स के विकास का कारण बनता है जो आगे चलकर सेकेंडरी हायपोगॉनाडिज़्म का कारण बन सकती हैं।

3. एचआईवी/एड्स

एचआईवी वायरस न केवल आपकी रोग-प्रतिरोधक शक्ति को बर्बाद कर सकता है लेकिन यह टेस्टिकल्स, हाइपथैलमस या पिटूइटेरी ग्लैन्ड पर असर डालता है और आपके टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है।

4. दवाएं

कुछ पेन किलर्स या दर्द कम करनेवाली दवाएं जिनमें ओपीएट (opiates) और हार्मोन्स होते हैं वह सेकेंडरी हायपोगॉनाडिज़्म का कारण बन सकती हैं।

5. मोटापा

आपका बढ़ा हुआ वज़न और अनहेल्दी लाइफस्टाइल सीधे-सीधे मेल हायपोगॉनाडिज़्म की वजह बन सकती है। विभिन्न स्टडीज़ में ऐसा पाया गया है कि मोटापे और मेल हायपोगॉनाडिज़्म आपस में जुड़े हुए हैं।

6. तनाव

मानसिक तनाव, बहुत अधिक वेट लॉस और बहुत अधिक एक्सरसाइज़ करने जैसी लाइफस्टाइल संबंधी आदतें मेल हायपोगॉनाडिज़्म को बढ़ावा दे सकती हैं।

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अनुवादक -Sadhna Tiwari

चित्र स्रोत- Shutterstock

संदर्भ -[1] Kumar P, Kumar N, Thakur DS, Patidar A. Male hypogonadism: Symptoms and treatment. Journal of Advanced Pharmaceutical Technology & Research. 2010;1(3):297-301. doi:10.4103/0110-5558.72420

Image Source: Shutterstock