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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:41 AM IST
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अनुवादक – Usman Khan
आजकल अधिकतर लोग वेस्टर्न टॉयलेट यूज करते हैं। बेशक इस टॉयलेट में आराम के साथ बैठकर पॉटी करने में आपको बड़ा मजा आता है लेकिन आपको बता दें कि इससे आपको बहुत ज्यादा नुकसान भी हो सकते हैं। बचपन में माता-पिता बच्चे को घुटने पर बैठाकर पॉटी कराते हैं। जाहिर है इससे बच्चा नेचुरल पोजीशन में बैठकर पॉटी करना सीख जाता है। वास्तव में घुटने मोड़कर मल त्याग करना एक नेचुरल तरीका है। इंडियन टॉयलेट में जिस पोजीशन में बैठा जाता है, उसे स्क्वाट (squat) यानि उकड़ूँ पोजीशन कहा जाता है। इंडियन टॉयलेट क्यों है बेहतर और उकड़ूँ पोजीशन में बैठकर पॉटी करने से क्या फायदे होते हैं, चलिए हम आपको बताते हैं।
वास्तव में पॉटी करते समय व्यक्ति को नैचुरली झुकना पड़ता है। इसका कारण ये है कि स्क्वाट पोजीशन में बैठने से शरीर के अन्य अंगों पर दबाव नहीं बनता है और आप आसानी से मल त्याग कर पाते हैं। आगे पढ़ने से पहले एक बार इस डाइग्राम को अच्छी तरह देख लें।
स्क्वाट पोजीशन में बैठने से शरीर के साथ ये होता है
कमोड यानि वेस्टर्न टॉयलेट पर बैठना क्यों है नुकसानदायक
स्क्वाट पोजीशन में बैठकर पॉटी करने के लाभ
बवासीर होने का कम खतरा- जर्नल डिजीज ऑफ दी कोलन एंड रेक्टम में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इस पोजीशन में बैठने से एनस और रेक्टम पर दबाव बनता है जिस वजह से मल त्याग में आसानी होती है। जाहिर है अगर मल जमा रहेगा तो आपको कब्ज और बवासीर का खतरा हो सकता है।
कब्ज से बचाता है- अगर आप कब्ज से पीड़ित हैं, तो आपको स्क्वाट पोजीशन में बैठकर पॉटी करनी चाहिए। जर्नल यूरिनरी ट्रैक्ट सिम्पटम्स में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, इस पोजीशन में बैठकर पॉटी करने से ना केवल मल त्याग में आसानी होती है बल्कि बाउल मूवमेंट में भी सुधार होता है।
गर्भवती महिलाओं का लेबर आसान करता है- लेबर के दर्द से बचने के लिए पेल्विस, हिप्स और वैजाइना के आसपास के मसल्स का मजबूत और फ्लेक्सिबल होना बहुत जरूरी होता है। इस पोजीशन से इन हिस्सों को मजबूत बनाने में मदद मिलती है। एक अध्ययन के अनुसार, इस पोजीशन में बैठने से बर्थ कैनल का हिस्सा 20 से 30 फीसदी तक बढ़ जाता है जिससे डिलीवरी में आसानी होती है।
पेट के कैंसर से बचाता है- एक अध्ययन के अनुसार अक्सर कब्ज की समस्या से पीड़ित रहने वाले लोगों को कोलन कैंसर का खतरा अधिक होता है। जाहिर है पॉटी नहीं आने से मल पेट की दीवारों पर चिपक जाता है जो बाद में कोलन कैंसर का रूप ले सकता है।
चित्र स्रोत - Shutterstock
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