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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:40 AM IST
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अनुवादक – Usman Khan
मानसून में पीलिया, टाइफाइड, हैजा और फ्लू जैसी बीमारियां होना सामान्य बात है। इसलिए इस तरह के रोगों से राहत पाने के लिए सही इलाज और खानपान बहुत जरूरी है। खैर, अगर आप पारंपरिक दवाएं पसंद नहीं करते हैं, तो इस तरह के रोगों के इलाज के लिए आयुर्वेदिक उपचार भी ट्राई कर सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, मानसून में तीन दोषों (वात, पित्त, कफ) में वात दोष प्रमुख होता है। मुंबई स्थित सोमैया आयुरविहार में डिपार्टमेंट ऑफ आयुर्वेद एंड पंचकर्म विभाग के प्रमुख डॉक्टर शंकर कट्टेकोला वात दोष की वजह से होने वाले रोगों और उसका इलाज बता रहे हैं।
अभ्यंग या तेल मालिश उपचार- तेल मालिश से मानसून में कमजोर हड्डियों के कारण होने वाले जोड़ों के दर्दऔर गठिया के दर्द से राहत मिलती है। इतना ही नहीं इससे आपकी सुस्त स्किन को दोबारा से जीवंत करने में मदद मिलती है। स्टीम ऑयल मसाज से त्वचा की छिद्र ओपन करने और डिटोक्सीफाइंग करने में मदद मिलती है। इससे जोड़ों में सूजन, जकड़न और दर्द को कम होता है और मांसपेशियों को आराम मिलता है।
स्वीडन या हीट उपचार
पत्र पोटली स्वीडन- इससे गठिया की सूजन, स्पोंडिलोसिस, हड्डियों और जोड़ों के दर्द आदि से राहत मिलती है। इसमें औषधीय जड़ी बूटियों की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है।
रक्षा स्वीडन- ये ड्राई ट्रीटमेंट होता है जो रोगी को रुमेटी गठिया और अन्य पुरानी बीमारियों के कारण होने वाले दर्द से राहत देता है।
बस्ती या एनीमा उपचार- ये तेल और काढ़े का उपचार वात दोष के लिए बेहतर है। ऑयल एनीमा और काढ़ा एनीमा डिटोक्सीफिकेशन करने में मदद करता है।
मानसून में ऐसी हो आपकी डायट
ये चीजें खाएं
ये चीजें ना खाएं
चित्र स्रोत - Shutterstock