यह है पीलिया (jaundice) का आयुर्वेदिक इलाज

Jaundice क्या है और इसका आयुर्वेद में क्या इलाज है, सारी जानकारी मिलेगी यहां!

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Written By: Editorial Team | Updated : January 5, 2017 8:42 AM IST

पीलिया को आयुर्वेद में कमाला (Kamala) के रूप में जाना जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें त्वचा, श्लेष्मा झिल्ली और आंखों का सफेद हिस्सा पीला हो जाता है। खून में बिलीरुबिन (bilirubin) लेवल बहुत ज्यादा होने कारण पीलापन होता है। बिलीरुबिन एक बाइल पिग्मेंट है, जो खून में होता है। क्या आप पीलिया के लक्षण  के  बारे में जानते हैं? चलिए हम आपको बताते हैं।

पीलिया के लक्षण

पीलिया होने का क्या कारण है

  • लाल रक्त कोशिकाओ का विघटन लीवर में होता है और उसमे मौजूद हीमोग्लोबिन के टूटने से बिलिरुबिन बनता है। यह बिलिरुबिन लीवर से पित्त थैली में जाता है और फिर पित्त की नाली से होता हुआ अंतड़ी में जाकर मल के साथ निकल जाता है। पीलिया तब होता है, जब मेटाबोलिज्म और मल के साथ कुछ गलत होने के कारण शरीर में बिलिरुबिन बनने लगता है। इसकी वजह से पीला रंग होता है।
  • पीलिया वायरल इन्फेक्शन लीवर- हेपाटाइटिस, पैन्क्रीऐटिक कैंसर और ब्लॉक्ड बाइल डक्ट के कारण भी हो सकता है। अत्यधिक शराब पीने से सिरोसिस हो सकता है, जो पीलिया का कारण बन सकता है।
  • इसके अलावा कुछ दवाओं जैसे- एसिटामिनोफेन, स्टेरॉयड और बर्थ कंट्रोल पिल्स से भी लीवर को नुकसान हो सकता है और पीलिया का कारण बन सकती हैं।
  • आयुर्वेद में, पीलिया पित्त दोष विकार का परिणाम है। तेल, मसालेदार और गर्म खाने, शराब व कैफीन से पित्त बिगड़ सकता है जिससे धमनी में रुकावट पैदा हो सकती है और बाइल खून में जैम जाता है जिससे आंखों और त्वचा का रंग बदल सकता है।
  • दिन में सोना, ज्यादा काम करना, क्रोध, चिंता और तनाव भी इसके कारक हैं।

आयुर्वेद में पीलिया का इलाज

गिलोय या गुडूची (Giloe or guduchi)- ये औषधि भारत, श्रीलंका और म्यांमार में पाई जाती है। इस पौधे की डंठल का पाउडर बनाया जाता है जिसे गुडूची सत्व कहा जाता है। अनेस्थेसिया इंडियन जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पता चला है कि पीलिया से पीड़ित लोगों के इलाज में दिन में 16 मिलीग्राम / किग्रा गुडूची शामिल किया गया जिससे मृत्यु दर 61.5 फीसदी से कम होकर 25 फीसदी हो गई थी जबकि जिसके इलाज में इसे शामिल नहीं किया गया था 39 फीसदी से 6.25 फीसदी हुई। इसके अलावा गुडूची लेने वाले पीड़ितों को बुखार में भी सुधार हुआ और मतली भी कम हुई। इस पाउडर को गर्म पानी में मिलाकर दिन में दो बार लिया जाता है।

कुटकी (Kutki)- यह एक बारहमासी जड़ीबूटी है जो भारत के शीतोष्ण क्षेत्रों में पाई जाती है। इस जड़ीबूटी का पीलिया सहित लीवर की बीमारियों के इलाज का लिए इस्तेमाल किया जाता है। शोधकर्ताओं के कहना है कि इसमें पिक्रोलिव (picroliv) तत्व पाया जाता है जिसका एंटी-कोलेस्टेटिक प्रभाव पड़ता है और यह ब्लॉक्ड डक्ट सिस्टम को ओपन करने में सहायक है जिस वजह से पित्त खून में जमा नहीं हो पाता है। इसके पाउडर को गर्म पानी में मिलाकर दिन में दो बार लिया जाता है।

वसका (Vasaka)- यह सदाबहार झाड़ी हिमालय में पाई जाती है। इसका इस्तेमाल पीलिया सहित ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के रोग के इलाज के लिए किया जाता है। ध्यान रहे अगर आप किसी अन्य दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो आपको इसे लेने से बचना चाहिए। इसके पत्तों का पीलिया के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके पत्तों का दो औंस रस, मुलेठी की छाल का पाउडर, इतनी मात्रा में ही चीनी और आधा चम्मच शहद मिलाकर खाने से लाभ होता है।

कुमारी असव (Kumari Asav)- यह दालचीनी, इलायची, काली मिर्च और त्रिफला सहित 20 से अधिक आयुर्वेदिक जड़ीबूटियों और शहद व गुड़ का मिश्रण है। यह श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ (Leukorrhea) के लिए बहुत प्रभावी है। इसके अलावा इससे पित्त की नाली की रुकावट को दूर करने और लीवर और पित्ताशय के कामकाज में सुधार करने में मदद मिलती है। इसकी दिन में दो बार दो से छह चम्मच लेनी चाहिए।

आरोग्यवर्धिनी वटी (Arogyavardhini Vati)- इस जड़ीबूटी का इस्तेमाल पीलिया, फैटी लीवर सिंड्रोम, वायरल हैपेटाइटिस और अल्कोहोलिक हैपेटाइटिस के इलाज के लिया किया जाता है। दिल्ली स्थित एम्स के शोधकर्ताओं के अनुसार, इसका दिमाग, लीवर और किडनी पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इसे दिन में दो बार 250 से 500 मिलीग्राम मात्रा में लेना चाहिए।

आयुर्वेदिक दवा लेने का साथ ऐसा हो आपका डायट प्लान

  • पीलिया से पीड़ित व्यक्ति को गन्ने का रस, फलों का रस, सूखे अंगूर का भरपूर सेवन करना चाहिए। इन चीजों से मूत्र के जरिए बिलीरूबिन की निकासी होती है।
  • खूब पानी पिएं और छाछ का भी सेवन करें। इसके कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। इसके अलावा खूब फल-सब्जियां खाएं।
  • पीलिया से पीडित व्यक्ति के लिए नींबू, टमाटर और मूली भी काफी फायदेमंद हैं।

इन चीजों को खाने से बचें

  • गर्म, मसालेदार, ऑयली फूड्स
  • केक, पेस्ट्री, चॉकलेट
  • मांसाहारी भोजन
  • शराब
  • धूम्रपान और तंबाकू

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अनुवादक – Usman Khan

चित्र स्रोत - Shutterstock

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