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आजकल तनाव के कारण लोग जीवन से मुक्ति पाने के लिए आत्महत्या करने की बात पहले सोचने लगते हैं। क्या आपके मन में भी ऐसा ही कुछ कशमकश चल रहा है? या आप ऐसे किसी को जानते हैं जो आत्महत्या करने की बात कहता है? इन दोनों हालतों को आप कैसे संभालेंगे? चलिये इसके बारे में कुछ सोचते हैं-
पहले ये सोचते हैं कि क्यों लोग आत्महत्या करना चाहते हैं? यह भावना उनके मन में क्यों आती है?
• किसी अपने की मौत पर उसके खो जाने के दर्द की भावना।
• किसी के रिश्ते के टूट जाने पर या तलाक होने पर।
• नीजी रिश्ते में किसी प्रकार की समस्या होने के कारण।
• किसी प्रकार के दुर्व्यवहार होने पर।
• जीवन में कोई भी लक्ष्य न होने पर।
• अपने जीवन पर कोई कंट्रोल न होने पर।
• व्यापार या नौकरी में कोई घाटा होने पर।
अगर आपके मन में आत्महत्या करने के विचार बार-बार आ रहा है तो ये बातें आपकी सहायता करेंगी:
• कुछ भी बुरा करने से पहले किसी अपने के साथ बैठकर अपने मन की बात कहें। आत्महत्या करने की चाह रो लेने पर या बात करने पर कम हो जाती है।
• अपने परिवार के लोगों या दोस्त के साथ दिल खोलकर बात करो। अगर नहीं कर पा रहे हैं तो किसी काउनसेलर या मनोवैज्ञानिक डॉक्टर से सलाह लें और उन्हें अपने दिल की सारी बात बतायें।
• खुद को अहमियत देने का मिशन- इसके लिए आप अपने बारे में कुछ अच्छी बातें लिख कर दिवार पर लगा दें। जो भी कुछ करने का मन कर रहा है वह पहले करें। उन लोगों से मिलें जिन्हें आप चाहते हैं।
• ताजी हवा में सुबह सैर के लिए निकलें इससे आपके मन का नकारात्मक मनोभाव चला जाएगा।
• कोई जिम ज्वाइन करें या स्पोर्ट खेले, इससे मन की अवस्था बेहतर होती है।
• नया भाषा सीखें या कोई हॉबी ट्राइ करें। जो भी अच्छा लगे आपके मन को वही काम करें, इससे आप बेहतर फिल करेंगे।
• किसी दलित या शोषित की मदद करें, इससे आपके दिल को बहुत सुकुन मिलेगा। आप यह जानकर आश्चर्य में पड़ जायेंगे कि कितने ज़रूरतमंद है जिनकी आप मदद कर सकते हैं। लोगों के विश्वास और भरोसा से आप बहुत कुछ सीख सकते हैं।
• अपने आपको एक मौका दीजिए।
अगर आपको पता चले कि कोई आत्महत्या करने जा रहा है तो आप क्या करेंगे-----
• उनकी आत्महत्या करने की बात को अहमियत दें क्योंकि वे दूसरों के समक्ष कुछ न कुछ इशारा ज़रूर देते हैं।
• जब वह इंसान अपने दिल की बात कहे तो मन लगाकर सुने और उसे इस बात का एहसास करवाये कि वह हर समस्या को काबू में ला सकता है।
• उसको कभी भी अकेलापन का एहसास न होने दें हमेशा उसका साथ देने की कोशिश करें।
• उसे उसके सफलताओं का ध्यान करवायें, उसके लक्ष्य और काम के बारे में बतायें। उसके सपने के बारे में बतायें। जितना हो सके उसको अपनों के बीच रखने की कोशिश करें। उसे इस बात का एहसास करवाये कि जीवन कितना अच्छा है, व्यर्थ में न गवायें।
• अगर इनमें से कोई भी कोशिश काम नहीं कर रहा है तो तुरन्त काउन्सेलर या साइकोलॉजिस्ट के पास ले जायें।
मूल स्रोत: How to deal with suicidal thoughts
अनुवादक : Mousumi Dutta
चित्र स्रोत : Shutterstock images
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