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डेंगू के मरीज़ को भूलकर भी न दें एस्प्रिन!

डेंगू होने पर कौन-सी दवाई लेना हो सकता है प्राणघातक?

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Written By: Editorial Team | Updated : January 4, 2017 8:12 PM IST

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इस साल डेंगू के प्रकोप ने राजधानी दिल्ली को अपने चपेट में ले लिया है। डेंगू के तांडव का समाचार सुनने और पढ़ने के बावजूद कितने लोगों को डेंगू के बारे में सही जानकारी है यह कहना मुश्किल है। डेंगू की प्रथम अवस्था में बुखार के साथ बदन में दर्द होता है जो कि वायरल फीवर जैसा ही लक्षण होता है। इसलिए लोग बिना की जांच के खुद से ही ऐस्परिन या इबूप्रोफेन जैसी दवाएं ले लेते हैं। इस अवस्था में परिणाम भयानक होता है यानि ब्लीडिंग आदि भी हो सकता है। क्या आप जानना चाहते हैं कि क्यों ऐसा होता है?

डेंगू संक्रमित शरीर प्लेटलेट्स को बुरी तरह से प्रभावित करता है। जिसके कारण ब्लड क्लॉट हो जाता है और ब्लीडिंग होने की नौबत आ जाती है। ऐस्परीन या इबूप्रोफेन का भी यही एक्शन होता है। दोनों दवाओं के असर के कारण ब्लीडिंग ज्यादा होने की संभावना बढ़ जाती है और इस अवस्था को ‘डेंगू शॉक सिन्ड्रोम’ कहते हैं। इस अवस्था में मेडिकल ट्रीटमेंट की बहुत ज़रूरत होती है, यहाँ तक कि हॉस्पिटल में भर्ती कराना ही बेहतर होता है। पढ़े-पपीते के पत्ते के जूस से करें डेंगू का इलाज, जानिये कैसे

डेंगू क्या है?

यह रोग जो मच्छरों के काटने से होता है जिनके सामान्यतः एक ही तरह के लक्षण होते है, जैसे- फीवर, सिर दर्द, मसल्स और जोड़ो में दर्द और स्किन रैशेज़ आदि। यहाँ तक कि डेंगू के लिए कोई टिका या वैक्सिन भी नहीं है। इससे बचने का एक ही उपाय है, वह है मच्छर के काटने से खुद को बचाना और मच्छरों को पनपने नहीं देना। इस वायरस के लड़ने के लिए किसी वैक्सिन को बनाना भी बहुत मुश्किल है क्योंकि टिका के प्रयोग के लिए कोई एनिमल मॉडल भी नहीं है। डेंगू से हर साल पाँच हजार लोग मरते हैं जिसका प्रकोप विशेषकर मानसून के महीने में होता है। पढ़े- ‘कैरीपिल’ टैबलेट से डेंगू को करें कंट्रोल

डेंगू के लक्षणों के बारे में क्या आप जानते हैं?

फ्लू जैसे लक्षणों वाला डेंगू बच्चों से लेकर बड़ों सबको प्रभावित कर सकता है वह भी घातक तौर पर। डेंगू के क्लिनिकल स्वरूप (manifestations) मरीज़ के उम्र के साथ बदलती रहती है। डेंगू पीड़ित को फीवर 40°C/ 104°F तक हो सकता हैं और इन लक्षणों में कम-से-कम दो लक्षण तो ज़रूर दृष्टिगोचर हो सकते हैं:

बहुत ज्यादा सिरदर्द

• आँखों के पीछे दर्द

• उल्टी या मतली का एहसास

• ग्लैंड में सूजन

• मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द

• रैशेज़

लक्षण साधारणतः 2-7 दिनों तक रहता है जो बाद में भयंकर रूप धारण करता है, यानि एक संभावित घातक रूप में बदल जाता है,जैसे- प्लाज्मा का लीक होना, फ्लूइड जमा होना, श्वसन संकट, ब्लीडिंग होना और अंग हानि (organ impairment ) आदि लक्षण भयंकर रूप धारण करते रहते हैं। 3-7 दिनों तक प्रथम अवस्था में इसके लक्षण नजर आते हैं, जैसे- बॉडी टेम्परेचर के कम होने के साथ पेट में दर्द, मतली का एहसास, श्वसन प्रणाली में समस्या, मसूड़ों से ब्लीडिंग होना, खून की उल्टी, थकान और बेचैनी आदि। क्या आपको पता है कि डेंगू होने पर किस प्रकार का डायट लेना चाहिए?

मूल स्रोत:Dengue fever – do not give Aspirin or Ibuprofen to the patient

अनुवादक - Mousumi Dutta

चित्र स्रोत - Shutterstock image


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